Pawan Jury BhilwaraRj
'बुलेट नही बेलेट लाइये जापान से'
जापान में भारत की तरह भ्रष्ट और लापरवाह जज क्यों नही है ?
क्योंकि जापान में न्यायतंत्र को आंशिक रूप से प्रजा अधीन किया गया है, जबकि भारत की सरकारों में न्यायपालिका को शासक अधीन रखने की प्रवृति रही है । नमो भी अपवाद नही है, बल्कि उन्होंने तो राष्ट्रीय न्यायिक आयोग का गठन कर और भी ऊँची छलांग लगाने की कोशिश की है ।
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जापान में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति प्रधानमन्त्री द्वारा की जाती है । नियुक्ति के पांच वर्ष पश्चात जब चुनाव होते है, तो नागरिको को अपने MP को चुनने के साथ साथ एक मतपत्र पर और वोट करना होता है । यह वोट सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश को बनाए रखने या हटा देने के सम्बन्ध में होता है । यदि बहुसंख्य नागरिक मुख्य न्यायधीश को हटाने के लिए वोट करते है तो न्यायधीश को पद से हटा दिया जाता है । इस प्रकार जापान में 'न्यायिक पुनरवलोकन' की शक्ति करोड़ो नागरिको को दी गयी है, जबकि भारत में यह फैसला 6 व्यक्ति एक बंद कमरे में बैठकर करते है ।
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जापान में निचली अदालतों के जजों की नियुक्ति UPSC जैसे संस्था करती है, जिसमे नियुक्ति का आधार लिखित परीक्षा होता है, न कि साक्षात्कार ।
भारत में लिखित परीक्षाओं की नियुक्ति प्रक्रिया में साक्षात्कार का प्रावधान है, और यहाँ भी साक्षात्कार मंडल के 6 सदस्य बंद कमरे में बैठ कर नियुक्तियों का निर्धारण करते है । जापान में सुप्रीम कोर्ट के जज हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति करते है, और भारत में भी ऐसा ही है । किन्तु भारत का सुप्रीम कोर्ट एक नीम अँधेरे, धुंआ आच्छादित कमरे के अधीन है, जबकि जापान का सुप्रीम कोर्ट आंशिक रूप से प्रजा अधीन किया गया है ।
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चुनाव प्रचार के दौरान नमो ने ऐलान दिया था कि 'भारत की न्यायपालिका को स्वतंत्र और विश्वसनीय "माना" जाता है' ।
लेकिन वे इसका कारण बताना भूल गए कि यदि आप न्यायपालिका की आलोचना या निंदा करते है तो आपको हवालात में पहुचायाँ जा सकता है, अत: भारत के नागरिक मजबूर है कि वे न्यायपालिका को स्वतंत्र और ईमानदार 'माने' ।
अमेरिका के कई राज्यों और अन्य पश्चिमी देशो के विकास का मुख्य कारक यह है कि उन्होंने स्वतन्त्र न्यायपालिका की रचना के लिए न्यायतंत्र को प्रजा अधीन किया है, जैसा कि आंशिक रूप से जापान में किया गया है । तो आखिर नमो जापान की बुलेट ट्रेन के साथ साथ स्वतंत्र न्यायपालिका का विचार भी भारत में क्यों नही ला रहे है ।
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इस सम्बन्ध में जब मिडिया समूहों तथा स्तंभकारो से पूछा गया कि, जब आप 24×7 जापान को कवर कर रहे है, तो वहाँ की न्याय व्यवस्था के बारे में भारत के नागरिको को जानकारी क्यों नही दे रहे है ?
तो उनका जवाब था कि हमें विशिष्ट वर्ग और धनिको द्वारा भारी मात्रा में इस जानकारी को छिपाने के लिए भुगतान किया जा रहा है, ताकि भारत की न्याय प्रक्रिया धीमी बनी रहे और उनके हितो को चोट नही पहुंचे ।
भारत में स्वतंत्र न्यायपालिका की स्थापना का सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने इसीलिए हमेशा विरोध किया है क्योंकि सभी राजनेतिक पार्टियाँ चुनाव लड़ने के लिए पेड मिडिया और धनिक वर्गो पर निर्भर है । भारत तथा विदेशी धनिक वर्ग यह कतई नही चाहता कि न्यायपालिका जनता के नियंत्रण में रहे, वे न्यायपालिका की लगाम अपने हाथ में ही रखना चाहते है । यदि कोई राजनेतिक पार्टी या नेता स्वतंत्र न्याय्पालिका की रचना की बात करेगा तो वो तुरंत ही इन शक्तिशाली समूहों के निशाने पर आ जाएगा, और कोई भी पार्टी इस जोखिम को उठाने के लिए तैयार नही है ।
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जब इस सम्बन्ध में चूपावादी संघठन आरएसएस से पूछा गया तो उन्हें भी ये बात बिलकुल भी अच्छी नही लगी कि, भारत में स्वतंत्र न्यायपालिका की स्थापना की जाए । हालांकि उन्होंने कारण स्पष्ट नही किया, किन्तु सहज ही यह अनुमान लगाया जा सकता है कि, वे पूर्व राजाओं और भारी भरकम मठाधीशो के दान पर निर्भर है, अत: इस प्रस्ताव का समर्थन करना उनके लिए भी घातक हो सकता है । वेसे भी आरएसएस समाधानों की जगह नारों, बयानों, पथ संचलनो आदि गतिविधियों में ज्यादा रुचि रखता है , ताकि लाखों प्रचारको के समय को इन व्यर्थ गतिविधियों में खपाया जा सके ।
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प्रजा अधीन राजा समूह 1998 से न्यायतंत्र को प्रजा अधीन करने की मांग कर रहा है, और ये मांग बयानों तक सीमित नही है, समूह ने समाधान के लिए लिखित कानूनी ड्राफ्ट्स दिए है । किन्तु चूंकि सोनिया-मोदी-केजरीवाल जैसे बड़े नेताओं और आरएसएस जैसे संघठनो ने हमेशा स्वतंत्र न्यायपालिका का विरोध किया इसलिए इन नेताओं के अंधभक्तो और कार्यकर्ताओं ने भी इन प्रस्तावों का विरोध किया , फलस्वरूप आज तक देश में न्यायपालिका में सुधार नही हो सका ।
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समाधान : कार्यकर्ताओं से निवेदन है कि वे इन संघठनो के नेताओं से न्यायपालिका में सुधार हेतु, लिखित कानूनी ड्राफ्ट्स देने को कहे । ऐसा करने पर नेता आपको संघठन छोड़ कर चले जाने को कहेंगे, और आपका समय व्यर्थ होने से बच जाएगा ।
अपने क्षेत्र के सांसद को प्रजा अधीन न्याय तंत्र का कानूनी ड्राफ्ट गेजेट में छापने का ऑर्डर भेजे ।
प्रजा अधीन न्याय तंत्र का कानूनी ड्राफ्ट यहाँ से मुफ्त डाउनलोड करे -
rahulmehta . com / 301 . h . htm
प्रजा अधीन राजा @ pk