Pawan Jury BhilwaraRj

'इन वकीलों को क़ानून पढ़ाइये'

राजस्थान बार कौंसिल ने पिछले डेढ़ महीने से जजों के भ्रष्टाचार के खिलाफ हड़ताल कर रखी है, सैकड़ो आरोपी पिछले 45 दिनों से जेलों में पड़े है, रोज जो नए केस दर्ज हो रहे है उनसे कैदियों की संख्या बढ़ती जा रही है, भीलवाड़ा की जेल ओवरलोड होने से कैदियों को टोंक भेजा गया है, अन्य जिलो में भी यही स्थिति है, राजस्थान की सभी अदालतों में काम काज पूरी तरह से ठप है , मुवक्किल अदालतों के चक्कर लगा रहे है, जबकि ये क़ानून पढ़े बुद्धिजीवी समस्या के निराकरण के लिए कानूनी ड्राफ्ट देने के स्थान पर हुडदंगियो के समूह की तरह पेश आ रहे है ।
...

22 अगस्त को 'आल राजस्थान एडवोकेट्स संघर्ष समिति' ने राजस्थान बंद की अपील जारी करते हुए आम जन से यह आव्हान किया कि :
'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए अपने कारोबार, प्रतिष्ठान और दुकाने बंद रखे' ।

बताइये !! यह है वकीलों का न्यायपालिका से भ्रष्टाचार दूर करने का 'तरीका' ।
यह बात वकीलों से कहते हुए अच्छा नही लगता कि :
- देश को क़ानून चलाते है ।
- किसी भी समस्या का समाधान कानूनी होता है ।
- यदि समाधान के रूप में आपके पास लिखित कानूनी ड्राफ्ट नहीं है तो आपके पास समाधान नही है ।

तो आपने न्यायपालिका के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कानूनी ड्राफ्ट्स दिए है ?
- जवाब है : नहीं

क्या आप उम्मीद कर रहे है कि क़ानून ड्राफ्ट्स आधारित आन्दोलन कोई गोल गप्पे बेचने वाला समूह करेगा ?
या फिर आपको काले कोट उतार कर गोल गप्पे बेचने चाहिए ?
आप किस तरह का आन्दोलन कर रहे है ?
समस्या के समाधान के लिए कानूनी ड्राफ्ट्स कहां है ?
...

जैसा कि हर हडताली समूह के पास होता है, इन काले चोगो वालो के पास भी 10 पैसे के पेम्फलेट पर छपा एक रूटीन 'मांग पत्र' है ,जिसमे नारों के रूप में भ्रष्टाचार दूर करने की मांग की गयी है ।
मेरे दो तीन मित्रो ने अपनी दुकाने इस उम्मीद में बंद रखी थी कि, इस से न्यायपालिका में भ्रष्टाचार कम होगा । पर नही हुआ । शायद एक दिन और बंद रखने से कुछ फर्क पड़े ।
ये कानूनविद् बजाय गंभीरता से पेश आने के निम्नलिखित हरकते करके खुद का मनोरंजन और जनता का टाइम वेस्ट कर रहे है :
- मानव श्रुन्ख्लाये बना रहे है ।
- रास्ते जाम कर रहे है ।
- कारोबारियों के प्रतिष्ठान बंद करवा रहे है ।
- आम जन से अपीलें कर रहे है ।
- नारेबाजी , रेलियों के फोटो खिंच कर शोशल मिडिया पर चला रहे है ।

असल में इनकी रुचि न्यायपालिका के भ्रष्टाचार को कम करने में नही है, बल्कि पोलिटिकल माइलेज लेने और माहौल बनाने में है ।
जब नमो न्यायपालिका को पिंजड़े में डाल कर सरकारी तोता बना रहे थे , तब ये सब वकील कहाँ थे । तब इस संस्था ने कोई विरोध नही किया, कोई निंदा प्रस्ताव पारित नही किया । तो क्या न्यायपालिका को सरकार से पृथक रखने में वकीलों की रुचि नही है , या न्यायिक आयोग बनने से न्यायपालिका में भ्रष्टाचार कम हो जाएगा ।
...

यह खुला रहस्य है कि :
न्यायपालिका पूरे तरीके से भ्रष्ट है और ज़्यादातर जज सर से पाँव तक बिके हुए है । स्वतंत्र न्यायपालिका शब्द ही बकवास लगने लगा है, सरकार ने न्यायपालिका को कंट्रोल में ले लिया है, भाई भतीजा वाद का बोलबाला है ।
करोड़ो केस लंबित पड़े है, जज और वकील तारीख तारीख खेल रहे है और आम आदमी अदालत, वकील आदि के पास जाना भी इनकी चपेट में आना समझता है ।

लेकिन इस समस्या का मूल समाधान जूरी सिस्टम है जिसका विरोध खुद बार एसोशिएसन कर रही है ।
ये मेरा निजी अनुभव है कि मेरे एक मित्र जो कि जज की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार का सामना करने वाले है, को मैंने जूरी सिस्टम की जानकारी दी । उन्होंने सिर्फ पांच मिनिट से भी कम समय में जूरी सिस्टम का विरोध करना शुरू कर दिया और इसे पूरी तरह बकवास बताया ।
मैंने उन्हें जूरी सिस्टम के बारे में अपने विरोध का तर्क रखने को कहा । इस पर उन्होंने जवाब दिया कि 'नागरिको को फैसले देने का अधिकार नही होना चाहिए और हमारे देश की न्यायप्रणाली में किसी बदलाव की आवश्यकता नही है' ।
...

सच्चाई यह है कि सभी वरिष्ठ और बार कौंसिलो में घुसे हुए वकील जूरी सिस्टम और राईट टू रिकाल जज का विरोध करते है, क्योंकि न्यायपालिका से फेवरिट जजमेंट लेने में इनकी बड़ी भूमिका होती है ।
यही भ्रष्टाचार के वे चेनल है जिनके माध्यम से जजो को भ्रष्टाचार करने की सुविधा मिलती है ।
बचे खुचे जूनियर वकील RJS की परीक्षा पास करके जज बनने की उत्कट इच्छा के चलते उन कानूनों का विरोध करते है जो कि भारत में न्यायपालिका को प्रजा अधीन बना कर स्वतंत्र न्यायपालिका की स्थापना कर सकता है ।
इसलिए बजाय ऐसे कानूनों का प्रचार करने के जिस से न्यायपालिका में भ्रष्टाचार दूर हो ,,ये पढ़े लिखे कुबुद्धिजिवी खुद जज बनकर भ्रष्टाचार करना चाहते है, अपनी प्रेक्टिस और आमदनी बनाए रखने के लिए जज प्रणाली का समर्थन करते है और सुधार के नाम पर सडको पर उतर कर ड्रामा करते है । ऐसे वकीलों की संख्या बहुत कम है जो ईमानदारी से न्यायपालिका से भ्रष्टाचार दूर करना चाहते हो ।
...

छद्म समाधान - जैसा कि यह कोई बच्चा भी बता देगा कि ऐसे आधारहीन और बेसिर पैर के आन्दोलन का यह नतीजा निकलेगा कि एक कमेटी या कुछ और नाम से कमेटी टाइप की कोई चीज़ बना दी जायेगी । और दो चार दिन में उस कमेटी का नाम ये वकील भी भूल जायेंगे जो 47 दिन से ये सर्कस चला रहे है ।

===

वास्तविक समाधान :
- कार्यकर्त्ता ऐसे छद्म आंदोलनों को समर्थन नही देवें , जो कि सिर्फ नारे लगाकर, मांगपत्र बाँट कर, हडताले कर के आम आदमी के जीवन में बाधा डालते है । इस से ऐसी नौटंकियों को बढ़ावा मिलता है और जनता को परेशानी झेलनी पड़ती है ।
- नागरिक सिर्फ ऐसे आन्दोलनो को समर्थन देवें जिस संघठन के पास समस्या के वास्तविक समाधान के लिखित कानूनी ड्राफ्ट्स हो ।

- न्यायपालिका में भ्रष्टाचार दूर करने के लिए अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा ऑर्डर भेजे कि नागरिको की जूरी द्वारा सुनवाई के ड्राफ्ट को गेजेट में छापा जाए ।

जूरी सिस्टम का ड्राफ्ट यहाँ से मुफ्त डाउनलोड करें -
rahulmehta . com / 301 . h . htm ( अध्याय - 21 )

प्रजा अधीन राजा @ pk