Pawan Jury BhilwaraRj
"तोते मिर्ची खाते है"
1992 से हमने विदेशी पूँजी ( FDI) से जो 'विकास' करना शुरू किया है , वो आगे भी जारी रहने वाला है ।
पिछले 20 साल से बजट मतलब FDI.. FDI.. FDI
और नमो के पहले बजट में 'विकास' के लिए क्या कदम उठाये गये है ..?
- और ज्यादा FDI
रेल, रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचे में FDI की अनुमति से भारी मात्रा में विदेशी पूँजी बाज़ार में आएगी और विकास दर 5% से बढ़ कर 8% या शायद 10% भी हो जायेगी ।
इस तरह फिर से देश 'गुड फील' करने लगेगा । 2-4 साल बाद फिर मंदी, फिर FDI.
अत: ये 'विकास' हमारे क़र्ज़ को और अधिक बढ़ा देगा ।
हालाकि इस समस्या के जिम्मेदार मोदी अकेले नही है । क्युकी सभी पूर्ववर्ती सरकारों ने विकास के लिए विदेशियों को बुलाया है । और विरासत में मोदी को ये सब झंझावात मिला है ।
लेकिन पिछले 10 वर्ष के दौरान बीजेपी ने हमेशा उन कानूनों का विरोध किया जिनके लागू होने से भारत का निर्यात बढे और हमें विदेशी मुद्रा का संकट न झेलना पड़े ।
और अब जबकि मोदी ने FDI की स्पीड इसीलिए बढ़ा दी है ताकि विकास दर में उछाल आ सके ,तो मोदी भी उसी सिलसिले को आगे बढ़ा रहे है जिसे पिछली सरकारों ने आगे बढ़ाया ।
मायने यह कि देश के भूत और वर्तमान को पिछली सरकारों ने बदतर बनाया और मोदी भविष्य को बदतरीन बना रहे है ।
विडंबना यह है कि जब भी यह सवाल पूछे जाते है कि -
1. मिडिया, रियल एस्टेट, रेलवे, बीमा आदि निर्यात शून्य विदेशी कम्पनियों द्वारा अर्जित किये गए मुनाफे का पुनर्भरण हम डालर में कैसे कर पायेंगे ?
*निर्यातशून्य - ऐसे क्षेत्र जिनमे निर्यात की सम्भावनाए शून्य होती है ।
2. क्यों सभी पार्टिया ऐसे कानूनों का विरोध कर रही है जिनसे स्वदेशी उत्पादन और निर्यात बढ़े ?
तो निम्नलिखित जवाब मिलते है -
शूर्पनखा गाँधी भक्त : आप सुधारों का विरोध मत करिए, बी पोजिटिव, सब ठीक होगा, सोनिया गाँधी जिंदाबाद, राहुल भैया की जय , भारत आगे बढेगा, बी सेकुलर, आप देखते जाइये, बी पोजिटिव ।
केजरी भक्त : कोंग्रेस बीजेपी मिले हुए है, मुझे चाहिए स्वराज, लोकपाल लोकपाल, हम आम आदमी की सरकार चाहते है , जनलोकपाल जिंदाबाद , सब पार्टिया चोर है, जय लोकपाल जय स्वराज ।
मोदी भक्त : बी पॉजिटिव, वेट एंड वाच, सब ठीक कर देंगे मोदी जी, हर हर मोदी घर घर मोदी , अच्छे दिन आने वाले है ( गाते हुए )
लेकिन जब ये प्रश्न मोदी भक्तो से बार बार पूछा जाता है तो जवाब मिलता है -
मोदी भक्त - वन्दे मातरम्, बी पॉजिटिव, भारत माता की जय, भारत माता की जय, हिन्दू जागो, एक हो जाओ, जागो जागो, भारत विश्व गुरु बनेगा, ॐ भूर्भुव: स्व तत्सवितुर्वरेणयम ..... ॐ शान्ति शान्ति शान्ति ....!!!!!!
जाहिर है सभी पार्टियों के पास जवाब की जगह नारे है, स्लोगन है, बयान है और मुद्दे को साईड में करने के अपने तरीके है ।
समाधान :
जो भी पार्टी सत्ता में आती है 'ऋणम कृत्वा घृतम पिबेत" को मूल मन्त्र बना कर विदेशी निवेश को बढ़ावा देती है । पिछले 22 वर्षो में किसी भी पार्टी ने विदेशी मुद्रा संकट को दूर करने के लिए निर्यात बढाने वाले क़ानून नही बनाए है, इसलिए हम कार्यकर्ताओ को ऐसे कानूनों का प्रचार करने में शक्ति लगानी चाहिए जिस से हमारे निर्यात को बढावा मिले और हमारा देश दिवालिया होने से बच जाए ।
सभी नागरिको से निवेदन है कि अपने क्षेत्र के सांसद को निम्नलिखित कानूनों को पास करने का ऑर्डर sms या पत्र द्वारा भेजे ।
1. स्वदेशी उद्योगों को सरंक्षण देने के लिए जज सिस्टम की जगह नागरिको की जूरी द्वारा मुकदमो की सुनवाई हो ।
2. स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के लिए गणित एवं विज्ञान विषयों की शिक्षा में सात्य प्रणाली लागू की जाए ।
3. MNCs द्वारा कमाए जा रहे मुनाफे का पुनर्भरण, डॉलर में करने के समझौते को रद्द किया जाए ।
4. MNCs को दी जा रही कर राहते समाप्त की जाए ।
5. मोरिशस रूट (mother of FDI) को तत्काल बंद किया जाए।
6. वित्त मंत्री तथा प्रधानमन्त्री को प्रजा अधीन किया जाए ।
पुनश्च : सभी मतदाताओ से निवेदन है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के तकनिकी पक्ष को समझे और इस बारे में अधिक से अधिक जानकारी स्वतंत्र स्त्रोतों से जुटाए ( पेड मिडिया से नही ) ।
प्रजा अधीन राजा द्वारा प्रस्तावित इन प्रजा लक्षी कानूनों के ड्राफ्ट देखने के लिए मुफ्त डाउनलोड करे -
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प्रजा अधीन राजा @ pk