Pawan Jury BhilwaraRj
ये पोस्ट नही एक मिर्ची है जो मोदी भक्तो को बहुत तीखी लग सकती है :
- 1930 के सेन्सस में मुस्लिम आबादी 9% थी ।
- 1951 के सेन्सस में मुस्लिम आबादी 8.5% थी , हिन्दू (हिन्दू+सिख+जैन+बौद्ध) लगभग 90%
- 2001 के सेन्सस में मुस्लिम आबादी 13% तथा ईसाई आबादी 1.5% थी ।
2011 के सेन्सस के आंकड़े क्या कहते है किसी को पता नही है ।
शूर्पनखा गांधी ने 2011 के सेन्सस के धर्म और भाषा के आंकड़े प्रकाशित नही करवाए ।
इसका समर्थन बीजेपी और केजरी ने किया । दोनों पार्टियों ने इस मुद्दे को नही उठाया और तीन साल तक खामोश रहे ।
क्यों.... ?
ज्ञातव्य है कि प्रजा अधीन राजा यह मुद्दा मई 2012 से उठा रहा है, इस क्रम में प्रजा अधीन राजा ने 2 विज्ञापन राष्ट्रीय समाचार पत्र में तथा गुजरात समाचार में दिया । इसी क्रम में प्रजा अधीन राजा ने 2013 में एक विडिओ भी बनाया कि कैसे सभी पार्टिया इस आंकड़े को दबा रही है , और क्यों ?
अब जबकि 283 सांसदों के साथ मोदी सत्ता में है वे क्यों नही ये आंकड़े जारी करते ?
- जन सांख्यिकी विभाग से छन कर आने वाली खबरे बताती है कि हिन्दू आबादी में भारी गिरावट आई है तथा ये अनुपात 76% से 80% के बीच कही रह गया है ।
- तो मन्दासुर ने चुनाव के दौरान धार्मिक आंकड़े जारी करने की मांग क्यों नही की ?
-अनुमान है कि गुजरात में ईसाई आबादी 2001 में 1.5% थी जो कि 2011 में 6.5 % हो चुकी है । तो ये तथ्य सामने आने से जो मंदासुर को हिंदुत्व के अंडरकरंट का भारी वोट मिला है उसमे कमी आ सकती थी ।
लेकिन अब नमो क्यों ये आंकड़े जारी नहीं कर रहे है ?
क्योकि-
1. ऐसा करने से धर्मान्तरण के कारणों पर बहस शुरू हो सकती है। जिस से ये तथ्य सामने आएगा कि पिछले 400 सालो का इतिहास है कि MNC या FDI जहां भी गयी है वहां एक पॉइंट के बाद बड़े पैमाने पर धर्मान्तरण हुए है ।इस से विकास के निमित्त उनके द्वारा चलाया जा रहा FDI का सर्कस बंद हो सकता है ।
2. राम कृष्ण जन्म भूमि, काशी विश्वनाथ, सामान नागरिक संहिता, पोपुलेशन कंट्रोल , जुवेनाइल एक्ट (मदर ऑफ़ लव जेहाद) आदि बेताल फिर से जाग सकते है जिनका तर्पण नमो ने चुनाव पूर्व ही कर दिया था ।
- भाषाई आंकड़े आने से बांग्लादेशी घुस्पेठियो की संख्या सामने आ जायेगी ( संसद में LK ने 2002 ने 1 करोड़ बताया था , अब 2 का अनुमान है ) । जिस कारण इन्हें खदेड़ने के लिए क़ानून बनाने का दबाव बनेगा ।
तो इस प्रकार इन आंकड़ो को प्रकाशित नही किया जा रहा, और जितना ही देरी होगी उतनी ही संभावना है कि डाटा टेम्पर्ड यानि कि तथ्यों में हेराफेरी कर दी जायेगी ।
समाधान :
सभी नागरिको से निवेदन है कि अपने सांसद महोदय को sms द्वारा ऑर्डर भेजे कि धर्म और भाषा के आधार के आंकड़े जारी किये जाए ।
- मोदी भक्तो से कहे कि अपने नेताओं से इन आंकड़ो को प्रकाशित करने के लिए दबाव बनाए । रोज़ एक बार अवश्य कहे ।
- सोनिया भक्तो से कहे कि विपक्ष का दर्ज़ा साबित करने के लिए इस मुद्दे को उठाये ।रोज एक बार अवश्य कहे ।
प्रजा अधीन राजा @ pk