Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
1. इस बात का प्रमाण कि बिकाऊ- मीडिया अरविन्द गांधी का अत्यधिक प्रचार- प्रसार कर रहा है।
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2. इस बात का प्रमाण कि बिकाऊ- टीओआई (टाइम्स ऑफ़ इण्डिया) नमो- विरोधी नही है, और नमो के साथ उनके घनिष्ठ सम्बन्ध हैं।
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1. आआपाइ यह झूठी अफवाह फैला रहे हैं कि बिकाऊ- मीडिया उनसे सम्बंधित खबरें नही दे रहा। कृपया कल के हिंदुस्तान टाइम्स , English, का ई- पेपर, दिल्ली संस्करण, कवर पृष्ठ और पृष्ठ- 2 देखें। कवर पृष्ठ पर पृष्ठ-2 पर प्रकाशित समाचार का लिंक है जिसमे लिखा है कि एके दिल्ली का फ़्लैट खाली कर कौशाम्बी जा रहे हैं। पृष्ठ- 2 पर इस समाचार को 1/8 पेज में प्रकाशित किया गया है। इसका अर्थ है कि कोई लगातार एके को खबरों में बनाये रखने के लिए मीडिया को पैसे दे रहा है। अब हो सकता है कि आआपाइ चाहते हों कि पूरे अखबार में सिर्फ एके के बारे में ही खबरें छपी हों, इससे कम कुछ भी होने पर उन्हें लगता है कि उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। लेकिन यह आआपा के मापदंड हैं। यदि बड़े समाचारपत्र प्रति दिन 3 जगह भी जिक्र कर रहे हैं, तो यह आआपा= एके को चर्चा में बनाये रखने के लिए पर्याप्त है। अतः आआपा को पर्याप्त से ज्यादा बिकाऊ- मीडिया का कवरेज मिल रहा है।
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२. टीओआई (टाइम्स ऑफ़ इण्डिया), इंडियन एक्सप्रेस आदि ने लगभग चार दिन पहले इस समाचार को प्रकाशित करने से इंकार कर दिया कि आंध्र प्रदेश/ तेलंगाना के किसानों ने टमाटर थोक खरीददारों द्वारा थोक (होलसेल) मूल्य10 रूपये प्रति किलो से घटाकर 8 रूपये प्रति किलो करने के निर्णय के विरोध में 400 टन से भी अधिक टमाटर फेंक दिए!!! इस समाचार को सिर्फ संडे गार्जियन ने प्रकाशित किया। कीमतों में असमानता का कारण यह है कि अंतर्राज्यीय सब्जी व्यापार में सरकारी लाइसेंस होना जरूरी है, और यह केवल भाजपा/ कांग्रेस के मंत्रियों के नजदीकी व्यापारियों को ही दिए जाते हैं। बिकाऊ- मीडिया ये सारे कारण छिपा रही है, और पूरा दोष बारिश, रेलों की कमी, ट्रकों की कमी, आदि पर डालती रही है। इसलिए ऐसा प्रतीत होता है कि टाइम्स ऑफ़ इण्डिया, इंडियन एक्सप्रेस आदि कभी भी नमो- विरोधी नहीं रहे। इनकी नमो- विरोधी मुद्राएं महज नाटक रही हैं।