Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
पहली बार निर्वाचित होने वाले हर सांसद को , बंगला नहीं, फ्लैट ही आवंटित किया जाता है। लेकिन आम आदमी भगवंत मान ने यह कहते हुए अपने लिए बंगले की मांग की है कि वे सेलेब्रिटी हैं !! उनका तर्क है कि परेश रावल को बंगला मिला, इसलिए उन्हें भी मिलना चाहिए।
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अब तो आआपा सांसद यह भी कहेंगे कि "कॉर्पोरेट भाजपा/ कांग्रेस सांसदों को रिश्वत देते हैं, तो कॉर्पोरेटको उन्हें भी उतनी ही रकम की रिश्वत देनी चाहिए" !!!
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यह मांग करने की जगह कि परेश रावल को भी बंगला न दिया जाये या उनसे इसका किराया वसूल किया जाये, ये आम आदमी भगवंत मान अपने लिए भी बंगले की मांग करने लगे।
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पहली बार सांसद बने व्यक्ति भी यदि पहले से ख्याति प्राप्त (सेलेब्रिटी) हैं, तो उन्हें बंगला दिया जाये, यह एक गलत नियम है। और इस झूठे नियम की आड़ में परेश रावल को बंगला मिल गया। लेकिन कम से कम परेश रावल ने सार्वजनिक रूप से यह तो नही कहा कि वे आम आदमी हैं, और वे खुले तौर पर कहते हैं कि वे सेलेब्रिटी अर्थात ख़ास आदमी हैं। जबकि भगवंत मान ने दावा किया कि वे आम आदमी हैं, और अब वही यह दावा कर रहे हैं कि वे सेलेब्रिटी अर्थात ख़ास आदमी हैं, और सेलेब्रिटी उर्फ़ ख़ास आदमी को मिलने वाली गलत सुविधाएं पाना चाहते हैं।
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भगवंत मान ---- जब वोट मांगने थे, तब आम आदमी बने थे। अब जब फ़्लैट- बंगला की बात आई, तो खास आदमी बन गए।
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अब इससे भी बड़ी बकवास देखिये। भगवंत मान कहते हैं कि राज्यवर्धन राठोड़ को बंगला मिला इसलिए उन्हें भी मिलना चाहिए। राठोड एक ओलम्पिक मेडल विजेता तथा भूतपूर्व सेना अधिकारी रहे हैं, ये भगवंत मान अपनी तुलना एक ओलम्पिक पदक विजेता और भूतपूर्व सेना अधिकारी से कर रहे हैं। यह आआपा द्वारा की गयी भद्दी हास्य प्रस्तुति है और कुछ नही।
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आआपा के सांसद कांग्रेस/ भाजपा के सांसदों जैसा ही व्यवहार कर रहे हैं। आआपा के सदस्य भी शीघ्र ही कांग्रेस/ भाजपा के सदस्यों की तरह व्यवहार करने लगेंगे।
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मुझे लगता है सारे आआपाई भगवंत मान और एके-४२० जैसे ही हैं। यदि ऐसा नही होता तो वे क्यों इस प्रकार के पाखंडियों और ड्रामेबाजों के साथ रहना पसंद करते ?