Pawan Jury BhilwaraRj
Pawan Jury BhilwaraRj:
एक समय की बात है मकान्धी नामक देश पर मंदासुर नाम का राजा शासन करता था । मकान्धी प्राकृतिक सम्पदा जैसे जमीन, जल, वन, प्रकाश, खनिज आदि से संपन्न राज्य था । मंदासुर ने मकान्धी को और अधिक वैभव शाली बनाने के लिए तथा मकान्धी की प्रजा की भोग लिप्सा के शमन हेतु कुछ व्यापारियों को सूदूर देश से आमंत्रित किया । व्यापारियों ने मंदासुर को ट्रक भर के 1 करोड़ स्वर्ण मुद्राओं का भुगतान किया और बदले में मकान्धी की 60 करोड़ लोह मुद्राये प्राप्त की । मंदासुर ने व्यापारियों को वचन दिया कि वे मकान्धी क्षेत्र में व्यापार द्वारा जो भी लाभ लोह मुद्राओं में कमाएंगे उसके बदले स्वर्ण मुद्राये मंदासुर उन्हें दे देगा ।
व्यापरियो ने अपनी बुद्धिमता , तकनीक और चातुर्य से तरक्की की और खूब फले फूले । मंदासुर ने 1 करोड़ स्वर्ण मुद्राओं को मकान्धी के नागरिको की सुविधाओं पर खर्च किया जिस से मंदासुर की कीर्ति सभी दिशाओं में फैलने लगी ।
हर कोई खुश था ।
व्यापारी खुश थे , उन्होंने बहुत मुनाफा कमाया।
मंदासुर अपनी वाह वाही और मकान्धी का वैभव देख कर खुश था।
नागरिक वैभव पाकर खुश थे ।
बीस वर्ष पश्चात् व्यापारियों ने मंदासुर से कहा कि हमने जो लाभ अर्जित किया है वो हम अपने देश में लेकर जाना चाहते है अत: आप हमारे द्वारा अर्जित मकान्धी की मुद्रा लेकर हमे अपने देश की मुद्रा दे दीजिये ।
व्यापारियों ने 6000 करोड़ लोह मुद्राये 6000 ट्रको में भर कर मंदासुर को दी तथा बदले में 100 करोड़ स्वर्ण मुद्राये देने को कहा ।
मंदासुर के पास इतनी अधिक मात्रा में स्वर्ण मुद्राये नही थी न ही ऐसा कोई स्त्रोत था जिस से वो इतनी बड़ी संख्या में स्वर्ण हासिल कर सके ।
व्यापारियों ने स्वर्ण मुद्राये नही देने पर उनके देश के बादशाह से न्याय की गुहार की ।
बादशाह दानवसुर बहुत शक्तिशाली था इसलिए मंदासुर को मकान्धी को आक्रमण से बचाने के लिए दानवसुर के सामने समर्पण करना पड़ा ।
समझौते के अनुसार मकान्धी की उपजाऊ और कीमती जमीनों पर , खनिज क्षेत्रो पर व्यापारियों का एवं दानवसुर का तब तक अधिकार रहेगा जब तक कि उनकी 100 करोड़ स्वर्ण मुद्राओं की भरपाई नही हो जाती ।
तथा नागरिक विद्रोह को रोकने और शान्ति स्थापित करने के लिए दानवसुर ने अपनी सेना की तैनाती माकान्धी की भूमि पर कर दी ।
इस प्रकार मकान्धी भी जूपन, कुरियन, अरबियन, लिबियन, इर्कियन की तरह दानवसुर के उपनिवेश में परिवर्तित हो गया ।
*वे 6000 लोह मुद्राओ से भरे ट्रक अभी भी मंदासुर के राजभवन में खड़े है ।जिनका प्रयोग मंदासुर का मंत्रिमंडल सितौलिया खेलने में करता है ।
पात्र:
मंदासुर - मोदी
मकान्धी - भारत
व्यापारी - FDI
स्वर्णमुद्रा - डॉलर
लोहमुद्रा - रुपया
दानवसुर - बराक ओबामा
नागरिक - FDI के समर्थक
प्रजा अधीन राजा @ pk