Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

ए.के. ने एइस्तिफ़ा क्यों दिया था
.
(यह पोस्ट मैंने मार्चने लिखा था , जिसका अनुवाद अब हुआ है)
.
दिल्ली राज्य सरकार के कर्मचारी 1 मार्च 2014 के आस- पास सामूहिक हड़ताल पर जाने वाले थे, क्योंकि एके- 420 ने एक सप्ताह के अंदर नौकरी में स्थायी करने का उन्हें दिया हुआ अपना वादा पूरा नहीं किया। इस हड़ताल से एके- 420 की प्रतिष्ठा को भारी क्षति होती। अतः उनके पास मुख्य मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देने के सिवाय कोई और विकल्प शेष नही रह गया था। यहाँ तक कि उनके इस्तीफ़ा देने की घटना को भी बिकाऊ मीडिया महिमामंडित कर सकता था। .
.
इसी बीच, फ़रवरी- 2014 के आखिरी कुछ दिनों में नमो ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मालिकों की सभी शर्तें मान ली। अतः एके को मिलने वाला सकारात्मक कवरेज कम हुआ और उसकी जगह नकारात्मक कवरेज बढ़ा। यही कारण है कि बिकाऊ मीडिया ने एके तथा नमो के बीच खुला वाद विवाद आयोजित कराने की मांग नही रखी, और न ही गैस कीमतों में वृद्धि के मुद्दे को तूल दिया। साथ ही नमो की कई कमजोरियाँ, जैसे- गुजरात राज्य सरकार, गुजरात पुलिस, आदि में व्याप्त भ्रष्टाचार का मुद्दा भी बिकाऊ मीडिया द्वारा नही उठाया गया। यहाँ तक कि सोनिया द्वारा जनगणना- 2011 के आंकड़े छिपा लेने के निर्णय का समर्थन करने का जो निर्णय नमो ने लिया, इसका भी जिक्र बिकाऊ मीडिया ने नहीं किया। यह सब कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मालिकों के द्वारा किया गया, ताकि नमो एक विजेता के रूप में उभर सकें।
.