Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

अहमदाबाद/ गांधीनगर लोकसभा चुनाव----- परिणाम मेरे पक्ष में बहुत अच्छे नही होंगे, इसके कई कारण हैँ (१) नमो के पक्ष में सशक्त जनसमर्थन (२) भाजपा/ कांग्रेस को नापसंद करने वाले लोगों के बीच आआपा की लहर (३) अहमदाबाद मिरर द्वारा मेरा विज्ञापन प्रकाशित नही करना (४) अहमदाबाद मिरर ने आआपा के उम्मीदवार को ही तीसरे नम्बर के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया!!
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किसी भी चुनाव में, कांग्रेस के कट्टर समर्थक कांग्रेस के पक्ष में ही मतदान करेंगे, तथा भाजपा के कट्टर समर्थक भाजपा के पक्ष में ही मतदान करेंगे। साथ ही अभी पूरे अहमदाबाद में नमो के पक्ष में जबरदस्त समर्थन है।
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अब भाजपा- विरोधी तथा कांग्रेस विरोधी मतदाताओं के बीच आआपा की लोकप्रियता है, जिसका कारण उन्हें लगातार 3 वर्षों से बिकाऊ मीडिया (जिंदल, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मालिकों आदि के हाथों बिका मीडिया) द्वारा मिल रहा कवरेज है। साथ ही अहमदाबाद के वैसे एनजीओ जिन्हें फोर्ड आदि के द्वारा फंड प्राप्त होता है, ने कांग्रेस के पक्ष में, अथवा जिन इलाकों में कांग्रेस को कोई वोट नही मिल सकता वहां आआपा के पक्ष में प्रचार किया है।
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रास्ता मेरे लिए और अधिक कठिन हो गया, जब अहमदाबाद मिरर ने मेरा विज्ञापन औपचारिक रूप से विज्ञापन शुल्क के साथ भी लेने तक से इंकार कर दिया!!! अहमदाबाद मिरर शिक्षित युवावर्ग द्वारा पढ़ा जानेवाला समाचारपत्र है। और इसने व्यापक रूप से आआपा को कवरेज दिया।
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मई-2009 में जो लोग भाजपा तथा कांग्रेस दोनों पार्टियों को नापसंद करते थे, उनके लिए दो विकल्प थे- मल्लिका साराभाई तथा मैं। अतः मैने लगभग 7300 मत प्राप्त किये, चूँकि मल्लिकाबेन हालाँकि एक अच्छी समाज सेविका थीं किन्तु प्रशासनिक मामलों में बहुत योग्य नही मानी जाती थीं।
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जबकि इस बार, आआपा की एक (नकली) सुधारवादी छवि जनता के बीच बन चुकी है। 3 वर्षों तक लगातार बिकाऊ मीडिया द्वारा दिये गए कवरेज के कारण आआपा तथा एके- 420 बड़ी संख्या में लोगों के प्रिय बन चुके हैं। अतः इस बार भाजपा- विरोधी तथा कांग्रेस विरोधी मतों का बड़ा हिस्सा आआपा के पक्ष में जायेगा।
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अतः इस बार मुझे सिर्फ़ उन्ही लोगों के मत प्राप्त होंगे जिन तक राइट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम आदि के बारे में गहराई से जानकारी पहुँच पाई है, जो इसके लिए प्रतिबद्ध हैं, तथा जो यह समझ चुके हैं कि आआपा ढोंगी है, कानून ड्राफ्ट महत्वपूर्ण हैं आदि। किन्तु यह संख्या अभी भी बहुत कम है, यह दुखद है।