Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

Imo , nonsense verdict. Solution i propose is : make certificates of all who took large benefit public. So that such fakes can be discovered asap.

Court Verdicts:

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक रिटायर्ड कर्मचारी के रिटायरमेंट और पेंशन से जुड़े लाभों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया। मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने की।

अपीलकर्ता की नियुक्ति वर्ष 1994 में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई में जूनियर इंजीनियर (सिविल) के पद पर 'टोकरे कोली' अनुसूचित जनजाति के कम्युनिटी सर्टिफिकेट के आधार पर हुई थी। हालांकि, वर्ष 2020 में स्क्रूटनी कमेटी ने उनके जाति प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित कर दिया, जिसे बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा। इसके बाद कर्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के तहत वह सेवा में बने रहे और अंततः 30 जून 2025 को रिटायर हुए।

सुप्रीम कोर्ट ने स्क्रूटनी कमेटी और हाईकोर्ट द्वारा कम्युनिटी सर्टिफिकेट को अमान्य घोषित किए जाने के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया। हालांकि, कोर्ट ने इस तथ्य को ध्यान में रखा कि अपीलकर्ता ने वर्ष 1994 से अपनी रिटायरमेंट की तारीख तक तीन दशकों से अधिक समय तक सेवा की थी। ऐसी परिस्थितियों में कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए उनकी सेवा को केवल रिटायरमेंट और पेंशन से जुड़े लाभों की गणना एवं भुगतान के सीमित उद्देश्य से सुरक्षित रखने का आदेश दिया।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस राहत का अर्थ यह नहीं है कि अपीलकर्ता के 'टोकरे कोली' अनुसूचित जनजाति से संबंधित होने के दावे को मान्यता दी गई है। न ही अपीलकर्ता या उनके परिवार का कोई सदस्य भविष्य में अमान्य किए गए जाति प्रमाण पत्र के आधार पर किसी लाभ का दावा कर सकेगा।

इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने Surekha Baljorsingh Thakur v. Caste Scrutiny Committee & Ors. (2024) और Chairman & Managing Director, Food Corporation of India v. Jagdish Balaram Bahira & Ors. (2017) जैसे महत्वपूर्ण फैसलों का भी संदर्भ लिया। यह फैसला एक बार फिर दिखाता है कि जहां गलत जाति प्रमाण पत्र के आधार पर प्राप्त नियुक्ति सामान्यतः सुरक्षित नहीं रहती, वहीं असाधारण परिस्थितियों में पूर्ण न्याय के लिए अनुच्छेद 142 के तहत सीमित राहत दी जा सकती है।

📌Case Title: SHIRISH PANDHARINATH PATIL VERSUS THE STATE OF MAHARASHTRA & ORS.

💬 आप सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को कैसे देखते हैं? क्या तीन दशकों से अधिक की सेवा को देखते हुए रिटायरमेंट और पेंशन लाभ सुरक्षित रखना उचित है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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