> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2021-09-20

Pawan Jury BhilwaraRj

इस समय किसान आन्दोलन का जमाव एकीकृत (दिल्ली के आस पास) है। किसान आन्दोलन के शीर्ष नेता निम्नांकित निर्देश जारी करके इसे देश व्यापी बना सकते है :
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"जो भी नागरिक / कृषक अमुक तीनो क़ानून रद्द करवाना चाहते है वे 'प्रत्येक' महीने की 5 तारीख एवं 20 तारीख(*) को सांय 5 बजे मुख्य डाकघर के लेटर बॉक्स पहुँच कर Pm को एक खुला पत्र भेजे। खुले पत्र के रूप में वे पोस्टकार्ड भी भेज सकते है। पोस्टकार्ड में यह लिखे कि - तीनो कृषि क़ानून रद्द किये जाए।"
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(*) किसान आन्दोलन के शीर्ष नेता चाहे तो महीने में किन्ही अन्य तारीखों का भी चयन कर सकते है। किन्तु एक बार तय की गयी तारीख को किसी भी स्थिति में बदला नहीं जाना चाहिए, और खुला आदेश पत्र भेजने का यह क्रम प्रत्येक महीने तब तक निरंतर चलना चाहिए, जब तक ये क़ानून रद्द न हो जाए।
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भारत और विशेषकर उत्तरी भारत के राज्यों में ऐसे लाखो नागरिक / कृषक मौजूद है जो किसान आन्दोलन के समर्थन में है। किन्तु वे असीमित दिनों के लिए दिल्ली आकर जमाव लगाने में अक्षम है। यदि उन्हें अपने ही शहर में एकत्रित होने का विकल्प दे दिया जाए तो वे न्यूनतम असुविधा उठाकर इस आन्दोलन में भागीदार बन सकते है।
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सिर्फ पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश की बात करें तो तय की गयी तारीख पर लाखों समर्थको का जमाव हो सकता है। और ये जमाव निरंतर बढ़ता जाएगा। क्योंकि ये कदम उठाने के लिए न तो अमुक जिले के समर्थको को स्थानीय स्तर पर किसी नेता की जरूरत है, न संसाधनो की जरूरत है और न ही प्रशासन से अनुमति की आवश्यकता है।
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तो किसान आन्दोलन के शीर्ष नेता आन्दोलन को मजबूत बनाने के लिए ऐसे कदम क्यों नहीं उठा रहे है जिससे अन्य नागरिक उनके आन्दोलन में शामिल हो सके ?
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इसकी 2 संभावित वजहें है :
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(1) एक वजह यह है कि अपने राजनैतिक हितो को सुरक्षित रखने के लिए आन्दोलन के शीर्ष नेता आन्दोलन को अपने नियंत्रण में रखना चाहते है।
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तारीख, स्थान एवं आदेश पत्र की इबारत तय होने से किसान आन्दोलन के शीर्ष नेताओं के हाथ से आन्दोलन का नेतृत्व (Switch) निकल जाएगा। क्योंकि स्पष्ट एवं स्थायी रूपरेखा सामने आने के बाद सभी जिलों में अमुक समर्थक निरंतर एकत्र होकर चिट्ठी भेजने की प्रकिया को जारी रख सकते है, और आन्दोलन के शीर्ष नेता उन्हें नियंत्रित नहीं कर सकेंगे।
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किन्तु आन्दोलन के शीर्ष नेता आन्दोलन का स्विच अपने पास रखना चाहते है, ताकि अवसर के अनुसार इसे धीमा या तीव्र कर सके।
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(2) किसान आन्दोलन के शीर्ष नेताओं को लगता है कि, अमुक तीनो कानूनों को रद्द करने के लिए देश के अन्य राज्यों / जिलो में पर्याप्त समर्थन मौजूद नहीं है।
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हालांकि, मेरा मानना है कि अमुक तीनो कानून रद्द करने के लिए नागरिको / कृषको का पर्याप्त समर्थन मौजूद है, अत: मैं बिंदु (2) को ख़ारिज करता हूँ।

अत: मेरे विचार में यदि किसान आन्दोलन के शीर्ष नेता इस आन्दोलन को देश व्यापी बनाना चाहते है तो उन्हें नागरिको / कार्यकर्ताओं के लिए ऊपर दिए गए निर्देश जारी करने चाहिए।
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जहाँ तक मेरी बात है, मैं सरकार द्वारा लाये गए अमुक तीनो कानूनों के खिलाफ हूँ, और मैं इन कानूनों की पूर्ववर्ती व्यवस्था के भी खिलाफ हूँ।
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किसानो को कृषि उपजो का उचित मूल्य न मिल पाने की समस्या का समाधान करने के लिए मैंने न्यूनतम खरीद मूल्य (Minimum Buying Price) का कानून प्रस्तावित किया है। मैं महीने की प्रत्येक 5 तारीख को Pm को खुला आदेश पत्र भेजता हूँ। अत: मैंने 5-3-2021 को ही MBP गेजेट में छापने की चिट्ठी भेज दी थी।
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<https://www.facebook.com/3692483057536570>;
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इस प्रस्ताव का क़ानून ड्राफ्ट किसान आन्दोलन के शीर्ष नेताओं को भी सुपुर्द किया जा चुका है।
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<https://www.facebook.com/2880222845625022>;
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#MinBuyingPrice
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