Pawan Jury BhilwaraRj
हल्दीराम (जिसमें अब विदेशी कम्पनी हिस्सेदारी ले चुकी है) , बीकाजी एवं फास्ट फ़ूड के कारोबार से जुडी ऐसी ही बड़ी कम्पनियों को अतिरिक्त मुनाफा देने के लिए मोदी साहेब द्वारा छापा गया क़ानून कहता है कि -- अब कचौरी बनाने वाले प्रत्येक दुकानदार को बीएससी केमेस्ट्री पास युवक को नौकरी पर रखना होगा !!
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<https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/bikaner/news/kachori-makers-will-have-to-hire-a-youth-pass-bsc-chemistry-to-get-a-food-license-127850875.html>
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और भी ऐसे ही कई नियम जिन्हें पूरा करना किसी भी छोटे कारोबारी के लिए मुमकिन नहीं है। तो फर्स्ट राउंड में फ़ूड इंस्पेक्टर इनसे हफ्ता वसूलना शुरू करेंगे और सेकेण्ड राउंड में जब बड़ी कंपनियों से उन्हें मोटा पैसा और ऑर्डर आएगा तो वे दुकाने सील करना शुरू कर देंगे। छोटे कारोबारियों के बाजार से बाहर होने से बड़ी कंपनियों का हिस्सा बाजार में बढ़ जाएगा।
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जाहिर है, बड़ी कंपनियों ने मोदी साहेब को इसके लिए ऊँचे दिए है, और बिहार चुनाव में बीजेपी द्वारा किया गया चुनावी खर्चा अब कचौरी-पकौड़ी-भुजिया बनाने वाले छोटे कारोबारी चुकायेंगे !!
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कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेता एवं उनके कार्यकर्ता भी इस क़ानून के समर्थन में है !! क्योंकि उनकी आई टी सेल एवं मीडिया कवरेज का पैसा भी यही एवं इसी तरह की कम्पनियां चुकाती है !!
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पेड दैनिक भास्कर ने रिपोर्ट किया है कि, "अब 1 नवंबर, 2020 से फूड लाइसेंस उन्हें जिले का चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नहीं दे सकेगा। फूड लाइसेंस के लिए उन्हें फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड आथोरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) नई दिल्ली का दरवाजा खटखटाना होगा। इसके साथ ही पापड़, भुजिया, रसगुल्ला, कचौरी, नमकीन व मिठाई के व्यापार को प्रोपराइटर एक्ट में शामिल करने से कई ऐसी शर्तें इसमें जुड़ गई हैं।
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एक कचौरी बनाने वाले को भी फूड लाइसेंस लेने के लिए दुकान में बीएससी केमेस्ट्री पास युवक को तकनीकी इंचार्ज रखना होगा, सालाना लाइसेंस फीस 100 रुपए की जगह 7500 हजार रुपए देनी होगी। ऐसे ही नियम घरों में पापड़-बड़ी बनाने वाले, रसगुल्ला का छोटा व्यापार करने वाले हर व्यापारी पर लागू होंगे।"
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