> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-10-31

Pawan Jury BhilwaraRj

अंतरधर्मी विवाहों में महिलाओं को सरंक्षण
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(Protection of women in Inter Religious Marriages)
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भारत में अनेक धर्मो का पालन करने वाले नागरिक रहते है, और भारत में विविध धर्मो के लिए भिन्न भिन्न विवाह अधिनियम लागू है। इनमें कुछ धर्मो के विवाह अधिनियम महिलाओं को मजबूत सरंक्षण प्रदान करते है जबकि कुछ धर्मो के विवाह अधिनियम में महिलाओं को पर्याप्त सरंक्षण नहीं है, और इस वजह से उन महिलाओं की स्थिति विवाह के बाद कमजोर हो जाती है, जिन्होंने किसी अन्य धर्म के युवक से विवाह किया है और अमुक युवक के धर्म का विवाह अधिनियम महिलाओं को पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता।
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यह कानून अंतरधर्मी विवाह करने वाली उन महिलाओं को विवाह के उपरान्त अपने वैवाहिक विवादों के निस्तारण के लिए अपने जन्मना धर्म का क़ानून चुनने की शक्ति देकर उन्हें सरंक्षण प्रदान करता है, जिन्होंने अंतरधर्मी विवाह किया है। इस क़ानून को प्रधानमंत्री संसद साधारण बहुमत द्वारा पास करके गेजेट में छाप सकते है।
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यदि आप इस कानून का समर्थन करते है तो प्रधानमंत्री जी को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे : प्रधानमंत्री जी, अंतरधर्मी विवाहों में महिला को विवाहोपरांत मेरिज एक्ट चुनने की स्वतंत्रता दें #MarriedWomenProtection
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---क़ानून ड्राफ्ट का प्रारंभ---
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(01) वैवाहिक विवादों की दशा में विवादों का निपटान किस धर्म के वैवाहिक क़ानून के तहत किया जाएगा इसका फैसला लेने का अंतिम अधिकार विवाहित महिला के पास होगा। महिला विवाह के उपरान्त किसी भी समय यह फैसला कर सकेगी कि, उसके विवाह का निस्तारण निचे दिए गए किस क़ानून के तहत किया जाना चाहिए :
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(1.1) उस धर्म के वैवाहिक क़ानून के तहत जिस धर्म में विवाहित महिला ने जन्म लिया था
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(1.2) उस वैवाहिक क़ानून के तहत जिसके तहत दम्पत्ति ने विवाह किया था
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(02) यदि कोई विवाह अदालत में स्पेशल मेरिज एक्ट के तहत हुआ है, तो यह कानून लागू नहीं होगा और सभी वैवाहिक विवादों का निपटान स्पेशल मेरिज एक्ट के तहत ही किया जाएगा।
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(03) यह क़ानून सिर्फ वैवाहिक विवादों जैसे गुजारा भत्ता, भरण पोषण, घरेलू हिंसा, दहेज़, विवाह विच्छेद, संतानों का विभाजन, बहु विवाह आदि पर लागू होगा, किन्तु विरासत या वारिसान के दावे इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे।
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स्पष्टीकरण 1 : मान लीजिये कि A एक जन्मना हिन्दू महिला है, जो B नामक मुस्लिम युवक से विवाहित है। वैवाहिक विवाद होने की स्थिति में A यदि मामले का निपटान हिन्दू मेरिज एक्ट के तहत चाहती है तो मामला हिन्दू मेरिज एक्ट के तहत सुना जाएगा। यदि A विवाह के दौरान या विवाह के पूर्व या विवाह के उपरान्त मुस्लिम धर्म में धर्मान्तरित हो चुकी है, तब भी यदि A चाहती है कि उसके विवाह पर हिन्दू एक्ट लागू किया जाए तो A एवं B के सभी वैवाहिक विवाद हिन्दू मेरिज एक्ट के तहत ही सुने जायेंगे।
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A द्वारा हिन्दू मेरिज एक्ट लागू कर दिए जाने पर मुस्लिम युवक ट्रिपल तलाक के माध्यम से जन्मना हिन्दू महिला को तलाक नहीं दे सकेगा, और तलाक हिन्दू मेरिज एक्ट के तहत अदालत के आदेश के अनुसार ही होगा।
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स्पष्टीकरण 2 : मान लीजिये कि A एक हिन्दू धर्मावलम्बी महिला, B नामक मुस्लिम धर्मावलम्बी युवक से विवाहित है। यदि A विवाह के बाद यह घोषणा करती है कि, उसके विवाह पर हिन्दू मेरिज एक्ट लागू होगा तो A एवं B के विवाह पर हिन्दू मेरिज एक्ट लागू हो जाएगा, और चूंकि हिन्दू मेरिज एक्ट में बहु विवाह की अनुमति नहीं है अत: B यदि A को डिवोर्स दिए बिना दूसरी शादी करता है तो B को हिन्दू मेरिज एक्ट के तहत आपराधिक मुकदमें का सामना करना पड़ सकता है।
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किन्तु यदि A ने यह घोषणा नहीं की है कि उसके विवाह पर हिन्दू मेरिज एक्ट लागू होगा तो B मुस्लिम एक्ट के तहत दूसरी/ तीसरी/ चौथी शादी कर सकता है, और ये विवाह मान्य होंगे। यदि B द्वारा की गयी इन अतिरिक्त शादीयों के बाद A हिन्दू मेरिज एक्ट लागू कर देती है तब भी युवक B द्वारा किये गए ये अतिरिक्त विवाह रद्द नहीं होंगे, और मान्य बने रहेंगे।
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स्पष्टीकरण 3 : मान लीजिये कि A एक जन्मना मुस्लिम महिला, B नामक हिन्दू युवक से विधि पूर्वक विवाहित है। यदि A एवं B में कोई वैवाहिक विवाद होता है और A इसका निपटान मुस्लिम मेरिज एक्ट के तहत चाहती है तो वह ऐसा कर सकती है।
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(04) अंतरधर्मी विवाह करने वाली महिला विवाह के दौरान या विवाह के बाद किसी भी समय अदालत में यह अर्जी दे सकती है कि उसके विवाह पर कौनसा मेरिज एक्ट लागू होगा। यदि महिला ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है तो जब भी कोई वैवाहिक मामला दायर होगा तो महिला यह प्रतिवेदन प्रस्तुत कर सकेगी कि वह धारा (01) में दिए गए प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए किस मेरिज एक्ट के तहत मामले का निस्तारण चाहती है।
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(05) यदि विवाहित महिला ने ऐसे अधिनियम के तहत मामला सुने जाने की याचिका दी है, जो उसका जन्मना धर्मं नहीं है, तो महिला भविष्य में किसी भी समय फिर से अपने जन्मना धर्म के क़ानून को चुन सकती है। किन्तु यदि एक बार महिला ने किसी विवाद के निस्तारण के लिए अपने जन्मना धर्मं के क़ानून को चुन लिया है तो फिर भविष्य में महिला के सभी वैवाहिक विवादों का निस्तारण उसके जन्मना धर्म के कानून के तहत ही किया जाएगा।
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(06) इस क़ानून के लागू होने की दिनांक से पहले संपन्न हुए सभी विवाह इस क़ानून के दायरे में आयेंगे, और सभी अंतरधर्मी विवाहों पर यह क़ानून लागू होगा।
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(07) यदि पहले से मौजूद किसी अन्य प्रवृत्त क़ानून की कोई धारा इस क़ानून में दिए गए किसी प्रावधान का उलंघन करती है, तो इस कानून के गेजेट में प्रकाशित होने के साथ ही अन्य प्रवृत क़ानून की ऐसी समस्त विपरीत आशय दर्शाने वाली धाराएं विधि शून्य मानकर निस्स्त की जाती है।
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(08) महिला एवं बाल विकास मंत्री भारत के समस्त विवाहित व्यक्तियों के निम्लिखित आंकड़े इस तरह सार्वजनिक करेगा कि कोई भी व्यक्ति इन्हें बिना Log in के देख सके :
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1. नागरिक का पूरा नाम
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2. नागरिक की पहचान संख्या जैसे - मतदाता संख्या / ड्राइविंग लाइसेंस / पेन कार्ड / पासपोर्ट नं (किन्तु आधार कार्ड का विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाएगा)
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3. माता / पिता का नाम एवं उनकी पहचान संख्या
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4. वैवाहिक स्थिति – अविवाहित / विवाहित / यदि विवाह विच्छेद हो चुका है
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5. विवाह / विवाह विच्छेद की दिनांक
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6. जीवन साथी / समस्त पूर्व जीवन साथीयों के नाम एवं उनकी पहचान पत्र संख्या
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7. क्या महिला जीवन साथी ने अपने जन्मना धर्म को मेरिज एक्ट के रूप में चुना है – हाँ / ना
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8. महिला जीवन साथी द्वारा चुना गया मेरिज एक्ट
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--------कानून ड्राफ्ट का समापन------