Pawan Jury BhilwaraRj
बहिष्कार ब्रिगेड के लिए ; (भाग -1)
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समस्या के वास्तविक समाधान से नागरिको का ध्यान बंटाने के लिए उन्हें उल्टे-पुल्टे समाधान की दिशा में धकेल देना राजनीती की सबसे बारीक चाल है। "बहिष्कार नीति" भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है।
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क्या मीडिया का बहिष्कार किया जा सकता है ?
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नहीं। ऐसा करना मुमकिन नहीं है !!
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(1) खबरिया चेनल एवं समाचार पत्र : ये नागरिको तक कई तरह की ऐसी महत्त्वपूर्ण सूचनाएं पहुंचाते है,जिनके बिना नागरिको का काम नहीं चल सकता। यदि आप इनसे एकदम किनारा कर लेते है तो आप कई आवश्यक घटनाओं / तथ्यों से वंचित हो जायेंगे !!
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(2) मनोरंजन चेनल : व्यक्ति को मनोरंजन चाहिए। और जब भी वह मनोरंजन के किसी भी माध्यम (फ़िल्में, धारावारिक आदि) के संपर्क में आएगा पेड मीडिया बड़ी सफाई से उनके दिमाग में गलत धारणाएं उतार देगा।
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(3) साहित्य : गल्प एवं विज्ञान फंतासी को छोड़कर "ज्ञान देने वाला" मुख्यधारा का सभी साहित्य पेड होता है। ये किताबें 'सन्देश देने वाले' साहित्य के नाम पर आपके दिमाग में इतना महीन कचरा भरती है कि, इसे साफ़ करने में एक उम्र लग जाती है।
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(4) पाठ्यपुस्तकें : छात्रों को इन्हें पढ़ना होता है, फिर याद करना होता है, और परीक्षा में पास होकर यह सिद्ध करना होता है कि उन्हें अमुक पाठ याद हो गया है। क्योंकि प्रश्न पत्र में उन प्रश्नों को अवश्य पूछा जाता है जो पाठ्य वे छात्रों के दिमाग में डालना चाहते है।
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कुल मिलाकर, पेड मीडिया का बहिष्कार करना मुमकिन नहीं है। यदि आपको समाज में रहना है तो पेड मीडिया से आप छुटकारा नहीं पा सकते। अत: पेड मीडिया का "बहिष्कार" इसका कभी भी समाधान नहीं है। और इसीलिए पेड मीडिया के प्रायोजक अपरिपक्व कार्यकर्ताओ को "मीडिया का बहिष्कार" करने के धंधे पर लगाए रखते है।
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समाधान : एक निष्पक्ष पेड मीडिया खड़ा करके ही निजी कम्पनियों द्वारा संचालित पेड मीडिया की ताकत कम की जा सकती है। चूंकि मीडिया घाटे का धंधा है अत: निजी कम्पनियों को टक्कर देने वाला मीडिया खड़ा करने के लिए विशाल संसाधनों की जरूरत होगी। इतने संसाधन सिर्फ सरकार द्वारा ही जुटाए जा सकते है, और सिर्फ सरकार ही इतने बड़े मीडिया का निरंतर घाटा उठा सकती है।
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किन्तु यहाँ समस्या यह है कि - जब सरकार के नियंत्रण में मीडिया रहेगा तो प्राइवेट मीडिया+सरकार+सरकारी मीडिया आपस में गठजोड़ बना लेंगे और ये तीनो मिलकर नागरिको से सही सूचनाएं छिपाने लगेंगे। जैसा कि आज हम भारत में देख रहे है !!
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इस समस्या का समाधान जूरी कोर्ट से किया जा सकता है। वोट वापसी पासबुक के दायरे में आने के बाद दूरदर्शन पर नागरिको का नियंत्रण आ जाएगा, और पीएम दूरदर्शन अध्यक्ष पर नियंत्रण खो देगा।
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जैसे जैसे दूरदर्शन ताकतवर होगा वैसे वैसे दूरदर्शन निजी मीडिया को एक्सपोज करना शुरू करेगा, और निजी मीडिया की ताकत घटने लगेगी।
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अधिक जानकारी के लिए जूरी कोर्ट की धारा (37.5) , (38) , (39) , (40.6) एवं धारा (43) देखें।
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जूरी कोर्ट का ड्राफ्ट यहाँ देखें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2297657633685793>
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