> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-06-09

Pawan Jury BhilwaraRj

जूरी कोर्ट एवं वोट वापसी पासबुक में क्या अंतर है ?
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जूरी कोर्ट 44 धाराओं का एक ड्राफ्ट है जिसकी धारा संख्या (2) कहती है कि --
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"इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। तब यदि आप इस पासबुक के दायरे में किये गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है तो उसे निकालने के लिए पटवारी कार्यालय में जाकर अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है।"
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मतलब, जब भी जूरी कोर्ट कानून गेजेट में आएगा तब आपको एक वोट वापसी पासबुक मिल जाएगी। आपको यह पासबुक चाहिए तो आप जूरी कोर्ट को गेजेट में छापने की मांग कर सकते है।
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अब मान लीजिये कि, कल अख़बार में यह छपता है कि "जूरी कोर्ट का क़ानून पास हो गया है"
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किन्तु यदि अगले 30 दिन में आपको वोट वापसी पासबुक नहीं मिलती है तो इसका मतलब है कि उन्होंने जब जूरी कोर्ट गेजेट में छापा तो इसके ड्राफ्ट के साथ छेड़छाड़ करके धारा नम्बर 2 को हटा दिया है !!
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दुसरे शब्दों में, उन्होंने अखबार में तो यह छाप दिया कि -- "राशन कार्ड का कानून लागू हो गया है" , किन्तु उन्होंने आपको राशन कार्ड नहीं दिए है !! और जब आपके पास राशन कार्ड नहीं है तो आपको दूकान से राशन भी नहीं मिलेगा !!
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क्या आपने कभी राशन कार्ड का क़ानून पढ़ा है ? नहीं !! लेकिन आपने राशन कार्ड का इस्तेमाल किया है। तो राशन कार्ड, वोटर कार्ड, पैन कार्ड के क़ानून में कुछ भी लिखा हो उससे कोई मतलब नहीं. कुल मिलाकर यदि आपको सरकार ने यह कार्ड ही नहीं दिया तो क़ानून सिर्फ कागज में ही रहेगा, और आप इसका इस्तेमाल न कर पायेंगे।
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इसी तरह यदि आपके पास वोट वापसी पासबुक नहीं आएगी तो आप किसी अधिकारी को बदलने के लिए अपनी स्वीकृति दर्ज नहीं कर सकेंगे। चाहे वे गेजेट में कुछ भी छापे लेकिन, अंतिम नतीजा यह होना चाहिए कि मतदाता को वोट वापसी पासबुक जारी हो।
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वोट वापसी पासबुक का नमूना देखने के लिए आप अपने शहर या राज्य के कार्यकर्ताओ से संपर्क करें. वे आपको इसका छपा हुआ नमूना उपलब्ध करवा देंगे.
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तो यदि आपको वोट वापसी पासबुक चाहिए तो पीएम / सीएम से यह मांग करें -- मुख्यमंत्री जी, कृपया जूरी कोर्ट गेजेट में छाप कर हमें वोट वापसी पासबुक जारी करें !!
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यदि आपकी मांग इस तरीके से स्पष्ट होगी तो पेड मीडिया "राईट टू रिकॉल" जैसे ड्राफ्ट विहीन सिद्धांतो पर बहस चलाकर आपको न तो इसमें खींच सकेगा और न ही जूरी कोर्ट / वोट वापसी पासबुक की मांग को तोड़ सकेगा।
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और यदि आपको वोट वापसी पासबुक नहीं चाहिए तो आपकी इच्छा !! आप चाहे तो अपना वोटर कार्ड और राशन कार्ड भी सरकार को जमा करवा सकते है। किसमें चाहिए !!
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#JuryCourt , #VoteVapsiPassbook
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