Pawan Jury BhilwaraRj
चंगेज खान कैसे इतने बड़े सामाज्य का मालिक बना ,उसके चरित्र में क्या विशेषता थी?
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दो वजहें मुख्य थी :
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(i) छोटे और ज्यादा मारक धनुषो का निर्माण ,
(ii) हथियार बनाने वाले इंजीनियर्स को संरक्षण !!
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चारित्रिक विशेषताओं से इतने बड़े साम्राज्य खड़े नहीं किये जाते। साम्राज्य खड़ा करने के लिए जंग जीतनी होती है। जंग जीतने के लिए बेहतर हथियार चाहिये। जिसकी सेना के पास बेहतर हथियार होंगे वह राजा जंग जीतता जाएगा और उसका साम्राज्य फैलता जाएगा।
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(1) तब तक दूर तक तीर फेंकने वाले धनुष लगभग 6 फुट लम्बे होते थे , और इन्हें जमीन पर टेक कर चलाया जाता था। यदि कोई घुड़सवार इसे चलाना चाहेगा तो इनकी लम्बाई के कारण उसे असुविधा होगी और वह लम्बे धनुष से एक ही तरफ तीर चला सकेगा, अपनी दिशा नहीं बदल सकेगा। लेकिन मंगोलों ने सिर्फ 3-4 फुट के धनुषों का बड़े पैमाने पर निर्माण किया। ये धनुष ज्यादा दूरी तक भी मार करते थे और इनकी गति में बेहद तीव्र थी।
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धनुषों को दस अलग-अलग सामग्रियों से बनाया जाता था। धनुष के बाहरी हिस्से को लचीला बनाने के लिए हिरण की आंतो, गोंद और अन्य ऊतक इस्तेमाल होते थे। इससे धनुष को ज्यादा ताना जा सकता था और तीर ज्यादा दूरी तक मार करता था। धनुष की भीतरी परत कठोर बनाने के लिए सींगो के बुरादे में गोंद मिलाकर लगाई जाती थी। कठोरता बढ़ने से तीर की गति बढ़ती है।
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छोटे और हल्के धनुष होने के कारण चंगेज खान के घुड़सवार घोड़े पर बैठकर भी लम्बी दूरी तक सभी दिशाओ में निशाना लगाने में सक्षम थे , और इस वजह से चंगेज खान की फ़ौज बेहद मारक बन गयी थी। उसके प्रतिद्वंदियों के पास इस तरह के हथियार नहीं थे।
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(2) चंगेज खान ने जिन भी राज्यों को फ़तेह किया उनके कारीगरों एवं इंजीनियरों का कभी क़त्ल नहीं किया। वह हथियार निर्माण में काम आ सकने वाले कारीगरों को अपनी तरफ मिला लेता था , ताकि हथियार निर्माण की तकनीको में इजाफा हो। इस तरह उसने आर्मी को मजबूत करने वाले और उत्पादकता बढ़ाने वाले मानव संसाधनों में इजाफा किया और उसकी सेना मजबूत होती रही।
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चंगेज खान के धनुषो के बारे में अधिक विवरण यहाँ देख सकते है - Mongolian Archery
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