> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-02-17

Pawan Jury BhilwaraRj

सिकंदर महान के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य क्या हैं?
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सिकंदर के जीतने का असली कारण यह था कि उसके पास दुनिया के सबसे बेहतर हथियार थे !!
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(1) भाले : जूरी सिस्टम होने के कारण ग्रीस ने हल्की एवं मजबूत धातु का अविष्कार कर लिया था , जिसकी वजह से वे 18 फुट तक लम्बे भाले बना पाए !! इतने लम्बे होने के बावजूद इनमे नम्यता नहीं थी और ये हल्के भी थे। छह फुटी भालो का 18 फुट के भालो से कोई मुकाबला नहीं था।
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(2) जीन : ग्रीस ने जीन यानी काठी भी बनायी !! तब तक भारत समेत शेष विश्व में घोड़ो पर बिना जीन के ही बैठा जाता था। जीन होने से घुड़सवार का संतुलन, घोड़े पर पकड़ एवं युद्ध करने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। ( श्री चन्द्र प्रकाश द्विवेदी के चाणक्य धारावारिक में आप भारतीय घुड़सवारो को बिना जीन के देख सकते है।)
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(3) किला तोडू मचान : जूरी सिस्टम के कारण ग्रीक बेहतर मचान बनाने में सफल हो गए थे। सिकन्दर की सेना किले की दीवार के साथ मचान जब मचान लगाती थी तो इन मचानो की ऊंचाई किलो की दीवारों से भी ऊँची हो जाती थी। इससे किले की दीवारे सिकन्दर का हमला रोकने में नाकाम साबित हुयी।
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(4) चमड़े के बख्तर : जूरी सिस्टम के कारण ग्रीस ने सस्ते एवं मुलायम चमड़े का उत्पादन बड़े पैमाने पर करना शुरू किया। बड़े पैमाने पर चमड़े का उत्पादन होने के कारण ज्यादातर ग्रीक सैनिक का अधिकाँश चमड़े द्वारा आवृत होता था। यह चमड़ा मुलायम एवं हल्का था अत: सैनिको को लड़ने में परेशानी नहीं होती थी एवं तीर आदि इन्हें भेद नहीं पाते थे। जबकि शेष विश्व ने सैनिक भारी भरकम जिरह बख्तर लाद कर लड़ रहे थे।
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(5) गुलेले : जूरी सिस्टम की वजह से ग्रीस वासी बेहतर गुलेले बना पाए। ये गुलेले 300 किलो तक के पत्थरो को 500 से 600 मीटर दूरी तक फेंक सकती थी। इनका इस्तेमाल किले की दीवारों को तोड़ने एवं दूर से ही सेना पर हमला करने के लिए किया जाता था।
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(6) बड़ी एवं हलकी ढाल : ग्रीक्स की ढाल भी काफी बड़ी एवं हल्की थी। सख्त चमड़े की बने होने के बावजूद यह इतनी हल्की थी कि इसे उठाया जा सकता था। ग्रीक्स के केटापल्ट भी बहुत मारक थे !
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तो सिकन्दर को जब मालूम हुआ कि उसके पास दुनिया के सबसे आधुनिक एवं मारक हथियार है , एवं अन्य किसी सेना के पास ऐसे हथियार नहीं है तो उसमे इस महत्त्वाकांक्षा ने जन्म लिया कि दुनिया जीतने का प्रयास करना चाहिए। और जब आपके पास इतने ताकतवर हथियार हो तो साहस वगेरह खुद ब खुद आ जाता है।
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इतिहास की पाठ्य पुस्तक में सिकन्दर का अध्याय इस पंक्ति से शुरु होना चाहिए कि आखिर ग्रीक शेष विश्व की तुलना में इतने बेहतर हथियार बनाने में कामयाब किस वजह से हो गए थे ?
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जूरी सिस्टम के अलावा इसका कोई अतिरिक्त कारण नहीं था। यदि इतिहास की कोई पुस्तक यह नहीं बताती कि जूरी सिस्टम किस तरह तकनीकी आविष्कार को प्रोत्साहित करके समुदाय को बेहतर हथियारों का निर्माण करने में सक्षम करता है तो मेरे विचार में ऐसी पुस्तक इतिहास नहीं बताती , बल्कि इतिहास पर मिट्टी डालने का काम करती है।
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चूंकि सभी इतिहासकार पेड होते है , और उनके प्रायोजक नहीं चाहते कि नागरिको को हथियारों के महत्त्व की सूचना दी जाए, अत: वे इस बात को भुला देते है कि सारा इतिहास युद्धों का इतिहास है, और युद्ध में निर्णायक तत्व हथियार ही है। जिस सेना के पास ज्यादा बेहतर हथियार होंगे वो सेना जीत जायेगी।
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अब इसमें साहस , महत्वकांक्षा , नैतिक बल क्या कर लेगा !! बन्दुक के सामने कोई लाठी लेकर जायेगा तो उसका साहस क्या काम आएगा !! तो इतिहास कार जब सिकन्दर पर 100 पेज लिखेंगे तो उसके हथियारों की चर्चा सिर्फ 2 पेज में समेट देंगे, और शेष 98 पेज में अजीब किस्म के दार्शनिक एवं अप्रासंगिक कारण लिखेंगे -- महत्त्वाकांक्षा, नैतिक बल, अनुशासन, साहस, कुशल रणनीति, संगठन, एकता !!!
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दरअसल ये छात्रों को भ्रमित करने के लिए इतिहास नहीं कवितायेँ लिखते है।
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हेनरी फोर्ड सही था — History is more or less Bunk !!
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मतलब इतिहास जिस तरह से लिखा जाता है , यह एक बकवास है !! कभी कम तो कभी ज्यादा !!
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इतिहास को किस तरह लिखा जाना चाहिए इसकी प्रक्रिया इस जवाब में देखें -- <https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/1035102530196157/>;
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