> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-02-17

Pawan Jury BhilwaraRj

पुराने जमाने में राजा-महाराजा किला क्यों बनवाते थे?
.
एक बड़ी वजह यह है कि वे बेहतर तोपे नहीं बना पा रहे थे !!
.
जिन राजाओं के पास बेहतर हथियार नहीं थे, उनके पास सिर्फ 2 रास्ते थे :
.
(1) ऐसे हथियार बनाओ ताकि दुश्मन आक्रमण न करें, या
(2) ऐसे किले बनाओ जिससे दुश्मन आक्रमण न कर सके
.
हथियारों की इंजीनियरिंग को जज एवं पुलिस सबसे ज्यादा एवं सीधे तौर पर प्रभावित करते है। जज सिस्टम होने के कारण भारत में जटिल इंजीनियरिंग लगातार पिछड़ी रही, अत: भारतीय राजा बेहतर हथियार नहीं बना पाए, और फिर उन्होंने सुरक्षा के लिए किले बनाने शुरू किये।
.
एकत्रीकरण की प्रक्रिया होने के कारण मुगलों के पास बेहतर तोपखाना था। लेकिन यूरोपीय देशो में जूरी सिस्टम आने के कारण गोरो के तकनिकी विकास की स्पीड मुगलों से 10 गुना ज्यादा तेज थी। जूरी सिस्टम के कारण गोरो ने ( पुर्तगाल, स्पेन, फ़्रांस, जर्मन, ब्रिटेन आदि ) न सिर्फ ज्यादा बेहतर तोपे बनायी बल्कि उन्होंने बंदूक बनाना भी सीख लिया था। बन्दुक एवं बेहतर तोपखाना होने के कारण गोरो ने पूरी दुनिया में अपने उपनिवेश स्थापित किये।
.
अलेक्जेंडर के पास तब दुनिया के सबसे बेहतर हथियार थे अत: ग्रीस ने कभी भी सुरक्षा की दृष्टी से किले नहीं बनाए। चंगेज खान, तैमूर, नादिर शाह एवं यूरोपियन देशो ने भी किले वगेरह नहीं बनाए। मुगलों ने भी किले बनाने पर ज्यादा भार नहीं दिया.
.
इतिहास में जितने भी विजित आक्रमणकारी रहे है, उन्होंने कभी किले नहीं बनाए। उन्होंने बेहतर हथियार बना लिए थे, और इस वजह से उन्हें किले बनाने की जरूरत नहीं रह गयी थी। जिन साम्राज्यो के पास बेहतर हथियार नहीं थे, उन्होंने किले बनाने की दिशा में काम करना शुरू किया। किलो के साथ समस्या यह है कि घेरा डालकर आक्रमणकारी रसद रोक देते थे। फिर उन्होंने रसद के लिए किले से सुरंगे निकालना शुरू किया। और जब महत्त्वाकांक्षी या लालची सिपहसालार सुरंग का पता बता देता तो किले के द्वार खोलकर लड़ने के सिवा कोई चारा नहीं रहता था।
.
चीन इससे भी आगे गया। उसने आक्रमणकारियों से बचने के लिए दीवार बनाना शुरू किया। यदि राजा नागरिको को हथियार रखने की अनुमति एवं हथियार चलाने का प्रशिक्षण देने पर शक्ति लगाते तो उन्हें दीवार खड़ी करने जैसे बकवास प्रोजेक्ट पर काम नहीं करना पड़ता !! लेकिन उन्होंने नागरिको को हथियार रखने की अनुमति एवं प्रशिक्षण नहीं दिया
.
क्यों ?
.
क्योंकि राजा को लगता था कि, यदि नागरिको के पास हथियार आ गये तो वे राजा के खिलाफ विद्रोह* कर सकते है, या उनका प्रतिद्वंदी नागरिको को राजा के खिलाफ भड़का सकता है।
.
(*) उस समय तक पेड मीडिया नहीं आया था, अत: इस तर्क का आविष्कार नहीं हुआ था कि नागरिको को हथियार देने से वे एक दुसरे को मार देंगे। इस ज्ञान की उत्पत्ति 20 वीं शताब्दी में हुई थी। भारत में आर्म्स एक्ट आने के बाद। आज आप किसी भी बुद्धिजीवी से पूछेंगे तो वह आपको यही बतायेगा कि नागरिको को हथियार देने से वे एक दुसरे को मार देते है !! )
.
यहाँ जिस प्रकार के किले की चर्चा की गयी है उसका आशय सुरक्षा की दृष्टी से बनाए गए किले से है, रिहाईश के लिए बनाए गए कलात्मक किले से नहीं। उदाहरण के लिए लाल किला सुरक्षा की दृष्टी से नहीं बनाया गया था। यह एक महलनुमा किला है। किन्तु मेहरानगढ़, कुम्भलगढ़, चित्तोड़गढ़ आदि किले सुरक्षा की दृष्टी से बनाए गए थे।
.
————
.
ऐसा नहीं है कि भारतीयों के पास तकनिकी आविष्कार करने की क्षमता नहीं थी। लेकिन आविष्कार करना अलग बात है और कम लागत में मॉस प्रोडक्शन करना दूसरी बात है। तो भारत में कारीगर जो भी आविष्कार करते थे जज सिस्टम होने के कारण न तो उनका बड़े पैमाने पर उत्पादन हो पाता था और न ही उसकी गुणवत्ता में सुधरती थी। उदाहरण के लिए 17 वीं शताब्दी में भारत में बंदूके आनी शुरु हुयी और 18 वीं सदी में भारतीय कारीगर जो बंदूके बना रहे थे, उनका डिजाइन एवं गुणवत्ता ब्रिटिश बन्दूको से ज्यादा बेहतर था। गोरो ने इस भारतीय डिजाइन को एडोप्ट किया और बाद में लाखों बंदूके भारतीय डिजाइन से कॉपी करके ही बनायी गयी।
.
लेकिन आगे गोरो ने हथियार बनाने के कारखानों पर लाइसेंस नीति डाल दी थी, अत: भारत में बन्दूको का निर्माण सिर्फ वही कारखाने कर रहे थे, जिन पर गोरो का नियंत्रण था।
.
तोपों एवं बन्दूको का जमाना जा चुका है और आज फाइटर प्लेन, ड्रोन आदि निर्णायक हथियार है। लेकिन हथियारों के निर्माण में भारत आज भी वहीँ पर खड़ा है। मतलब, न तो हमें एक प्रभावी राइफल बनाने आती है और न ही टैंक का इंजन बनाने आता है। ड्रोन और फाइटर प्लेन तो बहुत आगे की बात है। वजह फिर से वही है, जो 1000 साल पहले थी :
.
(i) जज एवं पुलिस का भ्रष्टाचार
(ii) जमीनों के क़ानून
(iii) रेग्रेसिव कर प्रणाली ( जीएसटी )
.
जब तक हम उपरोक्त 4 कानूनों को नहीं सुधारते तब तक हम स्वदेशी तकनीक आधारित हथियार बनाने की क्षमता नहीं जुटा पायेंगे। इन चार व्यवस्थाओ को सुधारने के लिए हमें गेजेट में 2 क़ानून छपवाने की जरूरत है :
.
(A) जूरी कोर्ट : इस क़ानून के आने से भारत में पुलिस एवं जजों के भ्रष्टाचार में 70% तक की गिरावट आ जायेगी
.
(B) रिक्त भूमि कर : यह प्रस्तावित क़ानून जीएसटी की जगह लेगा। रिक्त भूमि कर एक प्रोग्रेसिव कर है, और इस टेक्स के आने के बाद जीएसटी रद्द हो जाएगा।
.
जूरी कोर्ट एवं रिक्त भूमि कर आने से कैसे हम फाइटर प्लेन एवं ड्रोन बनाने की तकनीक जुटा लेंगे, इस बारे में मैंने अपने कई जवाबो में विस्तार से बताया है। इसके कुछ विवरण इन जवाबो में पढ़े :
.
क्या जापानियों के आने से हमें बुलेट ट्रेन की तकनीक नहीं मिलेगी, जैसे ऑटोमोबाइल में विदेशियों के आने से मिली ?
<https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/947179485655129/>;
.
विश्व स्तरीय अंतरिक्ष और मिसाइल प्रोग्राम होने के बावजूद भी भारत तेजस के लिए जेट इंजन क्यों नहीं बना पाया?
<https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/916131638759914/>;
.
----------------
.
[ सम्पादन : टिप्पणी में पूछे गए प्रश्न पर स्पष्टीकरण :
.
(1) हथियारों की गुणवत्ता और किले बनाने की वजह का जज एवं जूरी सिस्टम से क्या सम्बन्ध है ?
.
जज सिस्टम तकनिकी विकास का सबसे बड़ा दुश्मन है। पिछले 2000 साल की हिस्ट्री का सार यही है कि जिस राज्य की अदालतें बेहतर तरीके से काम कर रही थी, उन्होंने बेहतर हथियार बनाए और अन्य साम्राज्यों को गुलाम बना लिया। भारत की अदालतें भ्रष्ट थी इसीलिए हम बेहतर हथियार नहीं बना पा रहे है।
.
एलेक्जेंडर एवं ब्रिटिश के पास बेहतर अदालतें थी अत: उन्होंने बेहतर हथियार बनाए। बेहतर हथियार होने की वजह से उन्होंने पूरी दुनिया में विजय अभियान चलाने शुरू किये और उन्हें अपनी "सुरक्षा" के लिए किले बनाने की जरूरत नहीं रह गए थी। तो इस तरह कोई राजा किले बनाएगा या सेना खड़ी करके साम्राज्य विस्तार का अभियान चलाएगा, इसे मुख्य रूप से अमुक राज्य की अदालतों का स्ट्रक्चर एवं जजों भ्रष्टाचार प्रभावित करता है।
.
(2) ब्रिटिशर्स ने फोर्ट विलियम, सेंट जॉर्ज फोर्ट एवं माहिम फोर्ट क्यों बनाए ?
.
ब्रिटिश ने भारत में जो किले बनाए थे उनका इस्तेमाल सामान एवं हथियारों को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता था। गोरो का माल बन्दरगाहो पर आता था। अत: माल एवं हथियारों को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने बन्दरगाहो के करीब किले बनाये। इन किलो में गोरो का शस्त्रागार वगेरह का भण्डारण किया जाता था। ये किले 16 वीं से 17 वीं सदी में बनाए गए थे, और जब गोरे भारत को पूरी तरह से टेक ओवर कर चुके थे तब भी इन किलो का इस्तेमाल असलहा आदि रखने में किया जाता था।
.
2a. सेंट जॉर्ज फोर्ट : कोलकाता में हुबली नदी के किनारे बनाया गया था। इसमें कोलकाता बन्दर पर आने वाले माल एवं असलहा स्टोर किया जाता था।
.
2b. फोर्ट विलियम : इसे मद्रास बन्दर के करीब बनाया गया।
.
2c. फोर्ट माहिम : इसे ब्रिटिश ने नहीं बनाया था। यह किला गोरो को पुर्तगाल से मिला। इस किले में वे बॉम्बे बन्दर पर आने वाले माल एवं असलहे को स्टोर करते थे।
.
दुसरे शब्दों में ये किले उनकी तिजौरी की तरह थे, जिनका इस्तेमाल गोरे अपनी जिंसो एवं हथियारों को रखने के लिए करते थे। भारत के राजाओं ने जो किले बनाये वे दुर्गम थे, पहाड़ो पर स्थित थे, उन्हें बनाने में दशको लगते थे, और इनका इस्तेमाल युद्ध से बचने के लिए किया जाता था।
.
(3) फ़्रांस में नेपोलियन ने तटीय इलाकों में किले क्यों बनवाए थे ?
.
नेपोलियन ने सीमा रक्षा के लिए किले बनाए थे, रिहाईश या युद्ध से बचने के लिए नहीं। जिन हिस्सों को उसने टेकओवर किया था वहां पर अंग्रेज हमला करने वाले थे। तो उसने समुद्र तटो पर सेना की जमावट करने के लिए मोर्चे बनाये। ये किले इस मोर्चे का हिस्सा थे। असल में इन्हें किले भी नहीं कहा जा सकता। ये बंकरनुमा किले थे जिनमे सिर्फ सैनिक दस्ता एवं शस्त्रागार होता था।
.
दूसरी बात, नेपोलियन के पास इंग्लिश सेना के मुकाबले में निर्णायक हथियार नहीं थे। जब आपके पास हथियारों में निर्णायक बढ़त नहीं हो तो सैन्य रणनीति परिणाम को प्रभावित करती है। नेपोलियन का एज हथियारों की गुणवत्ता नहीं थी। अत: वह रणनीतिक बढ़त पाने के लिए अपनी सेना की जमावट बेहतर तरीके से कर रहा था। बंकरनुमा किले उसी का हिस्सा थे।
.
(4) ब्रिटेन में भी कई किले है।
.
ब्रिटेन के सभी किले 600 ईस्वी से पहले बनाए गए थे, और 14 सदीं आते आते इनमे से ज्यादातर का इस्तेमाल होना बंद हो गया था। वजह - 12 वीं सदी में ब्रिटेन में जूरी सिस्टम आ चुका था और उन्होंने बेहतर हथियार बनाना शुरू कर दिए थे। बंदूक और तोपे आने के कारण उन्होंने साम्राज्य विस्तार के अभियान चलाने शुरू कर दिए थे, अत: किलो की जरूरत नहीं रह गयी थी।
.
बॉटम लाइन यह है कि — जिस काल में जो राजा निर्णायक हथियार बना लेता था वह अपना पैसा आर्मी खड़ी करने पर लगाना शुरू करता था। किले बनाने से राज्य की इकॉनोमी पर बहुत वजन आता था। लेकिन जब कोई राजा देखता था कि उसके आस पास ऐसे राज्य मौजूद है जिनसे उसे खतरा है, और उसके पास निर्णायक हथियार नहीं है तो वह डिफेंसिव मोड में आकर किले बनाने में पैसा फूंकना शुरू कर देता था।
.
(5) पेड़ मीडिया तब नहीं था तो फिर भाट चारन वगैरह कौन थे ?
.
यह खुली हुयी बात थी कि कि भाट-चारण आदि को राजा पेमेंट करता है। अत: यह पेड मीडिया नहीं था। पेड मीडिया उसे कहते है जो यह बात छिपाता है कि उसे अमुक खबर देने के लिए पेमेंट कौन कर रहा है। जब आप डाबर का विज्ञापन देखते है तो यह बात जानते है कि यह क्लिप दिखाने के लिए पेमेंट डाबर कर रहा है, अत: यह पेड न्यूज नहीं है। यह विज्ञापन है।
.
किन्तु जब आप पेड सुधीर चौधरी का एनालिसिस या पेड रविश कुमार का प्राइम टाइम देखते है तो यह बात नहीं जानते कि उनके 45 मिनिट के प्रोग्राम की पेमेंट किसने की है। अत: या पेड न्यूज है। दुसरे शब्दों में, भाट एवं चारण के कथ्य विज्ञापनों की तरह थे और नागरिक जानते थे कि इसकी पेमेंट राजा करता है। तो उनके द्वारा दी गयी सूचनाएं / कथ्य आदि को जनता राजा के विज्ञापनो की तरह सुनती थी, न्यूज की तरह नही।
.
सम्पादन समाप्त ]
.
=========