> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2019-07-01

Pawan Jury BhilwaraRj

एक जागरूक नागरिक की परिभाषा क्या है ?
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जागरूक शब्द का कोई ठीक ठीक अर्थ नहीं किया जा सकता। यह काफी फैला हुआ शब्द है, और व्यक्ति अपनी मर्जी से इसकी व्याख्या कर सकता है। जागरूक शब्द का कोई सार्वभौमिक और सटीक अर्थ नहीं है। जागरूक शब्द की जगह मैं जिम्मेदार या सूचित शब्द का इस्तेमाल करता हूँ।
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एक जिम्मेदार नागरिक की परिभाषा क्या है ?
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नागरिक दो प्रकार के होते है :
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एक वे होते है जो अपना नागरिक कर्तव्य पूरा करते है।
दुसरे जो अपना कर्तव्य पूरा नहीं करते।
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नागरिक कर्तव्य क्या है ?
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5 वर्ष में एक बार वोट करने से नागरिक की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती है। भारतीय संविधान के अनुसार प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह शासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक निर्देश अपने प्रतिनिधियों यथा प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी को भेजे। जब आप वोट करते है तो यह एक समग्र निर्देश होता है, और सिर्फ यह इंगित करता है कि आप किस पार्टी/ व्यक्ति को सरकार चलाने की सहमती दे रहे है। भारत में ज्यादातर नागरिक यह मानते है कि ( और इसकी वजह फिर से पेड पाठ्यपुस्तके एवं पेड मीडिया है ) वोट करना ही नागरिक कर्तव्य है। जबकि ऐसा बिलकुल भी नहीं है।
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जब आप वोट करते है तो उसमे वे निर्देश शामिल नहीं होते कि चुना जाने वाला व्यक्ति सरकार चलाने के दौरान किस तरह के फैसले लेगा, और कौनसे क़ानून गेजेट में छापेगा। यह उसी प्रकार से है कि आप नौकर की नियुक्ति तो कर देते है किन्तु उसे यह निर्देश नहीं देते कि उसे कौनसे कार्यो को वरीयता से पूरा करना है और कौनसे कार्य नहीं करने है। और यदि आप नौकर को कोई कोई निर्देश नहीं भेजते तो आप नौकर के कृत्यों पर शिकायत करने का हक़ भी खो देते है।
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उदाहरण के लिए एक कर्तव्यनिष्ठ नागरिक यदि देखता है कि सरकारी स्कूलों या सरकारी अस्पतालों की दशा बदतर हो रही है और इन्हें सुधारे जाने की जरूरत है तो सबसे पहले वह ये बात पीएम या सीएम को कहेगा। यदि वह पीएम को इस बारे में सूचित नहीं करता या कोई निर्देश नहीं भेजता तो मेरा मानना है कि वह अपना कर्तव्य पूरा नहीं कर रहा है, और इसीलिए वह एक जिम्मेदार नागरिक नहीं है।
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नागरिकों का वर्गीकरण :

(1) निष्क्रिय नागरिक
(2) जिम्मेदार नागरिक
(3) गैर जिम्मेदार नागरिक
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(1) निष्क्रिय नागरिक : देश में ऐसे भी कई नागरिक होते है जिन्हें या तो कोई विशेष समस्या नहीं होती या फिर वे इसका समाधान राजनैतिक रूप से नही देखते। अत: उनके लिए इस बात की छूट होती है कि वे पीएम या सीएम को कोई निर्देश नहीं भेजे। उदाहरण के लिए यदि नागरिक A यह देखता है कि शिक्षा एवं चिकित्सा महंगी हो रही है और यदि उसका मानना है कि इस समस्या के समाधान के लिए मुझे और भी ज्यादा पैसा बनाने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि मैं इस समस्या के दायरे से बाहर हो जाऊं। तो मैं कहूँगा कि वह राजनैतिक रूप से निष्क्रिय नागरिक है, जो एक देश व्यापी समस्या का समाधान निजी स्तर पर ढूंढ रहा है।
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दिक्कत तब आती है जब वह पुलिस एवं भ्रष्ट जजों की चपेट में आकर भी यह सोचने लगता है कि थानों एवं अदालतों को सुधारने से आसान यह है कि मैं और भी ज्यादा पैसा बनाऊ ताकि पुलिस एवं जजों को खरीद सकू !!
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बहरहाल, मैं इन्हें गैर जिम्मेदार नागरिक नहीं कहता, बल्कि राजनैतिक रूप से निष्क्रिय नागरिक कहता हूँ। और मेरा मानना है कि इनकी संख्या बढ़ने या घटने से देश को कोई विशेष नुकसान नहीं होता। वजह इसकी यह है कि सभी देशो में लगभग 97 से 98% नागरिक इसी श्रेणी के होते है, और राजनैतिक विमर्श में हिस्सा नहीं लेते।
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वे राजनैतिक रूप से सिर्फ तब सक्रीय होते है जब छुरी उनके गले तक आ चुकी होती है और राजनैतिक हल के अलावा बचने का कोई मार्ग नहीं होता। तो उस दौर में वे अल्पकाल के लिए सक्रीय होते है और समस्या का समाधान होने पर या थोड़ी अवधि के लिए सक्रियता दिखाकर फिर से पुराने खांचे में लौट आते है। तो राजनैतिक रूप से यह एक विशुद्ध मतदाताओ का वर्ग है, जिन्हें पेड मीडिया एवं नेताओं द्वारा चाबी देकर चुनाव के दिन मतदान केन्द्रों की और धकेला जाता है।
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जब वोट करना होता है तो ये देखते है कि किसे वोट करना चाहिए, जिस व्यक्ति / दल के बारे में इनका मानना होता कि अमुक को वोट देने से व्यवस्था में आवश्यक बदलाव आयेंगे उन्हें वोट कर देते है। सभी देशो में इन निष्क्रिय नागरिको की इतनी ही भूमिका होती है। ऐसा नहीं है कि इनमे देश के प्रति निष्ठा नहीं होती। पर बहुधा यह सामयिक या अल्पकालिक होती है।
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यदि आप इन्हें देश हित में कोई कदम उठाने को कहेंगे और यदि इससे उन्हें कोई ज्यादा नुकसान नहीं हो रहा होगा, तो बहुधा ये लोग वह कदम उठाते है। फर्क इतना है कि आपको इन्हें कहना होता है। यदि आप इनसे नहीं कहेंगे तो ये आगे होकर नहीं उठाएंगे। बस इतना ही फर्क है। अमूमन इनके सोशल मीडिया एकाउंट पर आपको राजनैतिक सामग्री नहीं मिलेगी। कोई मुद्दा ज्यादा ही वायरल हो जाए तो ये उसमे अल्पकालिक रुचि दिखाते है, और फिर से अपनी पारिवारिक-सामाजिक-मनोरंजन प्रधान दुनिया में लौट जाते है।
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(2) जिम्मेदार नागरिक : इस श्रेणी में वो लोग है, जो अपने नागरिक कर्तव्य को पूरा करते है। यदि व्यवस्था में कोई सकारात्मक बदलाव लाने के लिए इनके पास कोई सुझाव, मांग आदि होती है तो ये सीधे अपने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को कहते है।
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उदाहरण के लिए, यदि एक जिम्मेदार नागरिक यह मानता है कि WTO एग्रीमेंट रद्द होना चाहिए, या बंगलादेशी घुसपेठिये देश से खदेड़े जाने चाहिए या सरकार को ऐसा अन्य कोई फैसला लेना चाहिए तो वह सबसे पहले यह बात / मांग / सुझाव पीएम या सीएम को भेजेगा। और तब अन्य नागरिको से कहेगा। और यदि अमुक नागरिक ने Pm को कोई मांग या शिकायत भेजी है और मान लीजिये कि फिर भी Pm ने इसके लिए आवश्यक कदम नहीं उठाये है, सिर्फ और सिर्फ तब एक जिम्मेदार नागरिक सार्वजनिक रूप से उस मुद्दे पर Pm की आलोचना करता है।
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एक जिम्मेदार नागरिक सिर्फ आलोचना करने के लिए या अपना टाइम पास करने के लिए किसी मुद्दे पर Pm-Cm को नहीं कोसता। वह चाहता है कि समस्या का समाधान आये। इसीलिए वह Pm को अवश्य कहता है।
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और इस बात से कभी कोई फर्क नहीं आता कि कोई जिम्मेदार नागरिक किस पार्टी का कार्यकर्ता या मतदाता है। क्योंकि एक बार चुनाव ख़त्म होने के बाद जो भी व्यक्ति Pm होता है वह पूरे देश का प्रधानमंत्री एवं प्रतिनिधि होता है। अत: यहाँ पार्टी बाजी का कोई लेना देना नहीं होता।
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उदाहरण के लिए मान लीजिये कि मैं Wto रद्द करना चाहता हूँ और पार्टी A का कार्यकर्ता हूँ। अब यदि पार्टी A का व्यक्ति Pm बन जाता है, तब भी और यदि पार्टी B का व्यक्ति Pm बन जाता है तब भी मेरा यह नागरिक कर्तव्य है कि मैं Pm को सूचित करूँ कि वे Wto एग्रीमेंट रद्द करें। और सिर्फ तब ही मैं इस विषय पर Pm की आलोचना कर सकता हूँ, अन्यथा नहीं। क्योंकि यदि मेरे वोट से पार्टी A का Pm बन जाता है तब भी मेरे द्वारा दिए गए वोट में यह नहीं लिखा हुआ था कि मैं यह वोट Wto एग्रीमेंट रद्द करने को दे रहा हूँ और यदि पार्टी B का व्यक्ति Pm बन जाता है तब भी मुझे यह संवैधानिक अधिकार है कि मैं अपने सेवक को आवश्यक निर्देश भेजूं।
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(3) गैर जिम्मेदार नागरिक : इस श्रेणी में वे नागरिक है जो अपने आस पास के लोगो में व्यवस्था के खिलाफ शिकायत करते है , सुझाव देते है, मांग करते है, किन्तु अपनी शिकायत- सुझाव- मांगे Pm-Cm को कभी नहीं भेजते। मैं इन्हें टाइम वेस्टर यानी नागरिको का समय बर्बाद करने वाले कार्यकर्ता कह कर संबोधित करता हूँ। अमेरिका एवं ब्रिटिश भारत की तुलना में आगे निकल गए उसकी एक सबसे बड़ी वजह यह रही कि पेड मीडिया के प्रायोजक भारत के कार्यकर्ताओ को टाइम बर्बाद करने वाली गतिविधियों में उलझाए रखने में सफल रहे !!
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आपको अपने आस पास राजनैतिक रूप से सक्रीय ऐसे कई नागरिक / कार्यकर्ता मिलेंगे जो विभिन्न राजनैतिक-आर्थिक-धार्मिक मसलो पर वे सोशल मीडिया पर दिन में 10 पोस्ट करते है, धरने-प्रदर्शन आदि करते है किन्तु उनमे से बहुधा Pm-Cm को इस बारे में कभी भी सूचित नहीं करते।
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वे कहते है कि भारत को WTO समझौता रद्द कर देना चाहिए, और वे लोग दिन में 4 बार यह बात कहते है। किन्तु जब मैं उनसे कहता हूँ कि क्या आपने यह बात कहने के लिए Pm को चिट्ठी भेजी है ? तो बहुधा उनके पास कोई जवाब नहीं है। मतलब वे सिर्फ 0 ( zero) के पीछे और 0 और 0 के पीछे फिर 0, 0, ....0 लगाते रहते है किन्तु इसके पहले अंक लगाना भूल जाते है !!
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यही स्थिति उन लोगो की है जो दिन में 56 बार कहते है कि जनसँख्या नियन्त्रण के लिए क़ानून बनना चाहिए, गौ हत्या बंद होनी चाहिए आदि आदि। किन्तु जब मैं उनसे कहता हूँ कि ये क़ानून तो सिर्फ Pm ही बना सकते है, मैं नहीं बना सकता, तो क्या आपने Pm को चिट्ठी लिखकर "टू चाइल्ड पालिसी" क़ानून को गेजेट में छापने के लिए कहा है, तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता।
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दरअसल इनकी स्थिति उस वकील की है जो पान के गल्ले पर मुकदमे से जुड़े सभी सबूत दिखाता है, तर्क करता है, और अपनी बात को सही साबित करने की पूरी कोशिश करता है, किन्तु अदालत में जज के सामने जाते ही खामोश हो जाता है !!!
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इसी श्रेणी में वे लोग भी शामिल है जो राजनैतिक रूप से काफी सक्रीय रहते है और छोटे मोटे संघठन चलाते है। दरअसल उनकी रुचि समस्या के समाधान में नहीं होती, बल्कि समस्या को उभाड़ने में होती है, ताकि नागरिको का ध्यान अपनी और खींच कर अपने संगठन एवं खुद का नाम चमकाया जा सके।
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इसीलिए उनका मानना होता है कि Pm को कुछ भी कहने से पहले लोगो को उनके संगठन से जुड़ जाना चाहिए। फिर वे लोगो को इकट्ठा करके सड़क पर एक मजमा बनाते है, और यह मजमा दिखाकर अन्य नागरिको को भी अपनी और खींचते है। इस तरह वे अपने संगठन को बड़ा करते जाते है। उनका हमेशा कहना होता है कि आप Pm को सीधे चिट्ठी मत भेजो, पहले हमारे संगठन से जुड़ जाओ। मेरा उनसे कहना होता है कि आप संगठन चलाओ, मजमा बनाओ, सोशल मीडिया पर अपने मुद्दे के बारे में लिखो और जो चाहे करो, किन्तु सबसे पहले आपको अपने मुद्दे के बारे में pm को कहना चाहिए। यदि आप यह मांग Pm को नहीं भेज रहे है तो अपना और अन्य लोगो का समय जाया कर रहे है।
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मेरा मानना है कि जिस देश में श्रेणी 2 के नागरिको की संख्या बढती है, उस देश की व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आते है। श्रेणी 2 के नागरिक देश की संपत्ति है, जबकि श्रेणी 3 के नागरिक देश का दायित्व !! श्रेणी 1 के नागरिको को मैं उदासीन मानकर चलता हूँ ,और उन पर कोई भार नहीं रखता।
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Pm या Cm को कहने के लिए नागरिको को किस माध्यम का इस्तेमाल करना चाहिए ?
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इस बारे में भिन्न भिन्न व्यक्तियों की भिन्न भिन्न राय हो सकती है। किन्तु इस बारे में मेरा मानना है कि नागरिको को Pm को निर्देश भेजने के लिए चिट्ठी या पोस्टकार्ड का ही इस्तेमाल करना चाहिए। आप ट्विट भी कर सकते है, या मेल वगेरह भी कर सकते है। मैं इन तरीको का विरोध नहीं करता। किन्तु मेरा मानना है कि ये सभी तरीके अनाधिकृत है। आप Pm को सूचित करने के लिए किसी भी तरीके का इस्तेमाल करें, किन्तु जब तक आप चिट्ठी नही भेजते तब तक मेरा मानना है कि आपने Pm को कहने के लिए प्रोपर रूट का इस्तेमाल नहीं किया है।
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क्यों नागरिको के लिए Pm को कहने के लिए चिट्ठी भेजना सबसे सही, सटीक एवं व्यवहारिक तरीका है ?
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(a) तरीका ऐसा होना चाहिए जिसे देश के सभी 90 करोड़ नागरिक इस्तेमाल कर सके। पोस्टकार्ड या चिट्ठी भेजना उन व्यक्तियों के लिए भी संभव है जो सुदूर गाँवों में रहते है।
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(b) भारत में आज भी करोड़ो लोग है जो दिन का 50 रुपया कमाने के लिए संघर्ष करते है। इसीलिए यह बेहद सस्ता होना चाहिए। पोस्टकार्ड 50 पैसे में आता है। और देश के प्रत्येक नागरिक बजट में है।
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(c) माध्यम ऐसा होना चाहिए कि यदि Pm इसे सत्यापित करना चाहे तो वे ऐसा कर सके। यदि आप सिर्फ अपना नाम एवं वोटर नंबर लिखकर पोस्टकार्ड भेजते है तब भी Pm इसे सत्यापित कर सकते है। और आप भी साक्ष्य के लिए पोस्टकार्ड भेजने से पहले इसकी फोटो कॉपी करवाकर अपने पास रख सकते है।
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(d) चिट्ठी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नागरिक को किसी संगठन की जरूरत नहीं है। किसी मीडिया की जरूरत नहीं है। और वह अकेले ही जब समय मिले तब किसी विषय को लेकर Pm को चिट्ठी भेज सकता है।
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क्या Pm को भेजी गयी सभी चिट्ठियां पढ़ी जाती है ?
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Pm को भेजी गयी सभी चिट्ठियां पढ़ी जाती है और इसका रिकॉर्ड भी रखा जाता है। और ज्यादा नागरिको द्वारा मांग किये जाने पर Pm इस पर कार्यवाही भी करते है। एक साक्ष्य निचे दिया गया है। अमुक व्यक्ति ने Pm को चिट्ठी भेजकर आत्महत्या की धमकी दी थी। इसे तुरंत गिरफ्तार किया गया।
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<https://bit.ly/2JnGuue>;
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क्या नागरिक को चिट्ठी भेजने का रिकॉर्ड भी रखना चाहिए ?
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हाँ। सही तरीका तो यही है कि जब भी आप Pm-Cm को चिट्ठी भेजे तब इसकी एक फोटोकॉपी सहेज कर रखे। फोटोकॉपी सहेजने का तरीका यह है कि आप My Letters to Pm-Cm नाम से एक रजिस्टर बना सकते है, और जो चिट्ठी आप भेजे उसकी फोटोकॉपी इस रजिस्टर के पेज पर चिपका ले। मैं इस रजिस्टर को "My Citizen Duty Register कहता हूँ। मेरा मानना है कि यदि आप चिट्ठी भेज रहे है किन्तु इसका रिकॉर्ड नहीं रख रहे है तो यह लेटर बॉक्स में चिट्ठी फेंक कर आने के समान है। यदि आप खुद ही अपनी चिट्ठी को गंभीरता से नहीं लेंगे तो अन्य से कैसे उम्मीद कर सकते है कि वे इसे गंभीरता से लेवें !!
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क्या Pm को चिट्ठी भेजने से कुछ होगा ? क्या वे कार्यवाही करेंगे ?
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यह एक गलत सवाल है। Pm को जो उचित लगे वे फैसला कर सकते है। यह उनका विवेकाधिकार है। पर पहले से उनकी तरफ से सोचकर अपने नागरिक कर्तव्य की अवहेलना करना ठीक नहीं है। आपको अपनी सीमाओं एवं संसाधनों में रहकर ही अपनी बात Pm तक पहुंचानी होती है। यदि ज्यादा से ज्यादा नागरिक उन्हें चिट्ठी लिखकर निर्देश भेजने लगेंगे तो वे स्वयं ही इस तरह की किसी प्रक्रिया को लागू करेंगे जिससे नागरिक ज्यादा आसानी से अपनी बात pm तक पहुंचा सके. फिलहाल भारत में ऐसी कोई व्यवस्था नही है. अत: नागरिको को उपलब्ध व्यवस्थाओ का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
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बहरहाल, Pm किसी मांग पर कार्यवाही करें यह इस बात पर निर्भर करता है कि अमुक मांग कितने लोगो के संज्ञान में आई है। उदाहरण के लिए यदि किसी मांग के लिए 10 हजार लोग चिट्ठी भेजते है तो यह Pm पर असर नहीं करता। किन्तु यदि नागरिक भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड मेंटेन करते है और इस रिकॉर्ड को सोशल मीडिया पर भी रखते है तो यह जानकारी कि चिट्ठियां भेजी गयी है, 10 लाख लोगो को हो जाती है। और अब Pm पर यह बात असर करने लगती है।
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तो सिर्फ चिट्ठी भेजना ही जरुरी नहीं है बल्कि इसका रिकॉर्ड भी रखा जाना चाहिए। क्योंकि राजनीती में कॉमन नोलेज का मूल्य होता है, नॉलेज का नहीं। चिट्ठी भेजना Pm की नॉलेज में डालना है, किन्तु यदि यह बात अन्य नागरिको तक भी जाती है कि चिट्ठी भेजी गयी है, तो यह कॉमन नोलेज बनाने लगता है।
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मेरा नागरिक कर्तव्य :
मैं यदि व्यवस्था में कोई बदलाव चाहता हूँ या जब कोई समस्या देखता हूँ तो इसके समाधान के लिए Pm-Cm को चिट्ठी भेजता हूँ, और उनकी फोटोकॉपी एक रजिस्टर में चिपका कर रख लेता हूँ। मेरा मानना है व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए यह एक न्यूनतम एवं अधिकतम योगदान है जो भारत का प्रत्येक नागरिक कर सकता है। निचे मेरे नागरिक कर्तव्य के रजिस्टर का एक चित्र नमूने के तौर पर दिया गया है।
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मैं Wto एग्रीमेंट के खिलाफ हूँ, और इसीलिए मैंने Pm को इस बारे में चिट्ठी भेजी थी। यह चिट्ठी 22 जनवरी को 2019 को भेजी गयी थी। मैं भारत के नागरिको से विनती करता हूँ कि, यदि वे व्यवस्था में कोई बदलाव चाहते है तो नागरिको में इसकी शिकायत करने से पहले कृपया Pm-Cm को इस बारे में निर्देश भेजे।
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