Pawan Jury BhilwaraRj
क्या होगा अगर फेसबुक यूजर से फेसबुक को उपयोग करने के लिए फीस लेना शुरू कर देगा ?
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फेसबुक और इसी तरह की विशालकाय सोशल मिडिया कंपनियां जो कि पेड मिडिया का ही आधुनिक संस्करण है, घाटे में व्यवसाय करती है। इन कम्पनियो का घाटा बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के प्रायोजक पूरा करते है। सोशल मीडिया होने के कारण इसका राजनैतिक महत्त्व है, और इसीलिए सूचनाओं पर अपना पूर्ण नियंत्रण रखने के लिए उपभोक्ता को मुफ्त सर्विस दी जाती है। यदि यूजर से भुगतान लिया जाएगा तो यूजर के कानूनी अधिकार खड़े हो जाएंगे।
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राइट्स खड़े होने के बाद फेसबुक उन यूजर्स को ऐसे विवरण अपने प्लेटफॉर्म पर लिखने से रोक नहीं पायेगा, जो फेसबुक के प्रायोजकों के एजेंडे के खिलाफ है। कंटेंट पर नियंत्रण खोने के कारण फेसबुक के प्रायोजक फेसबुक का घाटा पूरा करना बंद कर देंगे, और फेसबुक बंद हो जाएगा !!
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कैसे ?
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फेसबुक किसी भी यूजर को असीमित डेटा अपलोड करने की सुविधा देता है, और इसके लिए कोई भुगतान नहीं लेता। मुफ्त सर्विस होने के कारण फेसबुक एवं यूजर्स के बीच में कोई करार या अनुबंध नहीं है। राइट्स सिर्फ तब पैदा होते है जब दो पक्षकारो के बीच किसी प्रतिफल का आदान प्रदान हुआ हो।
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उदाहरण के लिए : एक उम्मीदवार चुनाव में आकर कोई वादा करता है, और वादे पूरे करने के लिए स्टाम्प पर एक शपथ पत्र भी प्रस्तुत करता है। किन्तु यदि चुनाव जीतने के बाद वह अपने वादे से मुकर जाता है, तो क्या मतदाता द्वारा उम्मीदवार को कोर्ट में घसीटा जा सकता है ? नहीं घसीटा जा सकता !! क्योंकि उम्मीदवार ने जो वादे किये थे उसके एवज में मतदाता ने किसी भी प्रकार का कोई भुगतान नहीं किया है, और न ही किसी प्रतिभूति का त्याग किया है। इस वजह से कानूनी रूप से यह एक शून्य करार है।
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फेसबुक भी यूजर्स को मुफ्त में सेवाएँ देता है किन्तु एवज में कोई मूल्य नहीं लेता। और इस वजह से यूजर्स न तो कोई शर्त रख सकता है, और न ही फेसबुक से किसी प्रकार के कोई नीति गत सवाल कर सकता है।
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अब मान लीजिये कि एक यूजर A से फेसबुक 100 रूपये मासिक लेना शुरू करता है।
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किन्तु तब A फेसबुक से यह प्रश्न कर सकता है कि आपकी संचालन नीति को जाहिर कीजिये !! और जब फेसबुक A से शुल्क लेगा तो उसे पहले अपनी नीति भी बतानी होगी !! A फेसबुक को कोर्ट में लाकर यह सवाल पूछ सकता है कि मेरा अमुक पोस्ट या मेरे अमुक ग्रुप को बेन क्यों किया गया है !! और फेसबुक को इसकी वजह बतानी होगी !! इस वजह से फेसबुक में सेवाएं देने के एवज में वैकल्पिक भुगतान की व्यवस्था नहीं रखी जाती है !!
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और यदि ऐसा हो जाता है तो ज्यादा गंभीर और मौलिक लेखक फेसबुक पर आने लगेंगे और वे ऐसी गंभीर एवं वाजिब सूचनाएं फैलाने में फेसबुक का इस्तेमाल करेंगे जिससे फेसबुक के छिपे हुए हितो को क्षति पहुँचती है !! तो ऐसी 0.1% सामग्री को सेंसर करने के लिए सभी को मुफ्त सर्विस दी जाती है !!
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उदाहरण के लिए : जब चुनाव आते है तो फेसबुक के प्रायोजक किसी पार्टी X से करार करते है, और उन्हें फेसबुक की सहायता से चुनाव जीतने में मदद करते है। ऐसे करार हमेशा कानूनों के रूप में किये जाते है। मतलब प्रायोजक कहेंगे कि यदि आप सत्ता में आने के बाद अमुक अमुक क़ानून छापने को सहमत हो तो हम फेसबुक का इस्तेमाल करके आपको चुनाव जीता देंगे। समझौता होने के बाद प्रायोजक अपने पपेट ( जुकेरबर्ग ) से पार्टी X को फेवर करने को कहेगा।
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तब फेसबुक निम्नलिखित कदम उठाएगा :
(1) फेसबुक उन खातो, पेजों, ग्रुप्स को चिन्हित करेगा जो ऐसी सूचनाएं फैला रहे है जिससे पार्टी X को नुकसान होता है।
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(2) और चुनाव से एन पहले फेसबुक इनमे से कुछ प्रोफाइल्स को डिलीट कर देगा और कुछ पर फिल्टर लगायेगा।
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(3) साथ ही पार्टी X को फेवर करने वाले ग्रुप्स, पेजेज आदि को बूस्ट करेगा और अधिकतम यूजर्स के न्यूज फीड पर ये पोस्ट भेजने लगेगा।
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अब यदि कोई समूह चाहता है कि चुनाव के दौरान उसे सेंसर नहीं किया जाए या उसकी आई डी पर फिल्टर नहीं लगाया जाए तो वह फेसबुक को भुगतान करने को तैयार हो जाएगा और फेसबुक उसे सेंसर करने की क्षमता खो देगा। सिर्फ 0.1% यूजर ही फेसबुक की राजनैतिक ताकत ख़त्म करने के लिए काफी है।
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तो यदि फेसबुक भुगतान लेने की व्यवस्था शुरू करता है तो सिर्फ 0.1% यूजर ही फेसबुक को भुगतान करेंगे। किन्तु इन 0.01% यूजर्स का राजनैतिक महत्त्व इतना ज्यादा है और वक्त के साथ यह इतना बढ़ता जाएगा कि फेसबुक राजनैतिक नतीजो को नियंत्रण करने की क्षमता खो देगा। यदि फेसबुक राजनैतिक नियंत्रण खो देता है तो उसके प्रायोजक घाटा उठाना बंद कर देंगे।
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तो इन 0.01% यूजर्स को कंट्रोल में रखने के लिए फेसबुक शेष सभी 99.99% को मुफ्त सेवाएं देता है। ये 99.99% लोग मनोरंजन प्रधान नागरिक होते है और फेसबुक के प्रायोजक इन्हें फेसबुक पर चाहते है। क्योंकि ये वे मतदाता है जिन्हें प्रभावित करके राजनैतिक नतीजे प्रभावित किये जाते है। मुफ्त सर्विस के एवज में फेसबुक पहले सभी को अपने प्लेटफोर्म पर लाता है। फिर उनमे से मनोरंजन प्रधान नागरिको को डिस्टर्ब किये बिना चुनावों के दौरान राजनैतिक रूप से महत्त्व रखने वाली प्रोफाइल्स को छांट देता देता है, ताकि सूचनाओं को नियंत्रित किया जा सके।
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जैसे जैसे फेसबुक की ताकत बढ़ेगी, इसके प्रयोजको की ताकत बढ़ेगी और भारत के नेताओं से नेगोशिएशन करने की उनकी ताकत में भी इजाफा होगा !! मतलब फेसबुक के प्रायोजक हमारे नेताओं को और भी अच्छे से धमका पायेंगे !! तो यह ऐसा प्लेटफोर्म है जहाँ विदेशियों द्वारा भारत के मतदाताओ को मुफ्त सर्विस देकर लाया जा रहा है, ताकि नेताओं को काबू में रखा जा सके।
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कृपया पाठक इस बिंदु को नोट करें कि यदि फेसबुक वैकल्पिक भुगतान लेने की व्यवस्था भी शुरू कर देता है तो फेसबुक बंद हो जाएगा !! मतलब यह एक गलत धारणा है कि, यदि फेसबुक पैसा लेना शुरू करेगा तो लोग फेसबुक प्लेटफोर्म छोड़ देंगे। यदि ऐसा है तो फेसबुक वैकल्पिक भुगतान की व्यवस्था रख सकता है।
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मतलब जो पैसा देना चाहता है वह पैसा दे सकता है, और फेसबुक उस प्रोफाइल को कोई ग्रीन मार्क या वेरीफाईड प्रोफाइल का सिम्बल दे सकता है। यदि ऐसा होता है तो फेसबुक को एक भी यूजर नहीं गंवाना होगा। किन्तु फेसबुक ऐसा कभी नहीं करेगा। क्योंकि जो लोग फेसबुक को पैसा चुकायेंगे फेसबुक उनके प्रति कानूनी रूप से जवाबदार हो जाएगा।
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