> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2019-03-01

Pawan Jury BhilwaraRj

अमेरिका है तो सब कुछ मुमकिन है
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यह मोदी साहेब और इमरान के अख्तियार में नहीं है कि वे युद्ध के होने या टलने का फैसला कर सके। दोनों ही देश जंग लड़ने के लिए अन्य देशो पर टिके हुए है। जंग होगी या नहीं होगी इसका फैसला अमेरिका-चीन करेंगे। भारत-पाक नहीं।
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यदि अमेरिका चाहता है कि भारत पाकिस्तान पर हमला करे तो भारत हमला करेगा। यदि भारत इनकार करता है तो अमेरिका कश्मीर में आतंकियों को हथियार भेजकर हर हफ्ते पुलवामा जैसे हमले करवाना शुरू करेगा, और पेड मीडिया को इस तरह का प्रसारण करने को कहेगा कि भारत के लोगो का खून उबलने लगे। नतीजा यह होगा कि भारत के पीएम पर जनता का दबाव बनेगा और उन्हें पाकिस्तान पर हमला बोलना पड़ेगा। यदि पीएम हमला नहीं बोलेगा तो उसकी कुर्सी जाएगी।
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बड़ी समस्या यह है कि अमेरिका भारत-पाकिस्तान की जंग के बीच में चीन को खींचना चाहता है। अभी ऐसा लगता है कि युद्ध टल गया है,, लेकिन जल्दी ही यह फिर लौट आएगा। इस समय अमेरिका भारत को पाकिस्तान की तरफ धकेल रहा है, और चीन के पीछे हट जाने के कारण पाकिस्तान दबता चला जाएगा। और एक हद तक दबने के बाद चीन और पाकिस्तान को युद्ध में आना पड़ेगा।

यदि युद्ध हुआ और फैलने लगा तो इसका दायरा

पाकिस्तान+चीन+ईरान+उत्तर कोरिया+अफगानिस्तान ( रशिया ) Vs भारत+अमेरिका+फ़्रांस+आस्ट्रेलिया+इस्राएल+साउथ कोरिया+जापान

तक विस्तृत हो सकता है। जंग का मैदान भारत-पाकिस्तान की जमीन होगी। मतलब भारत पाकिस्तान टोटल लोस में रहेंगे। इस युद्ध में अमेरिका को सब तरह से फायदा है और हमें हर लिहाज से नुकसान।
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तो एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान का रुख इतना नरम क्यों है ?
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क्योंकि चीन ने पाकिस्तान को हथियारों की मदद देने से मना कर दिया है। यदि जंग शुरू हो जाती है, और चीन या अमेरिका पाकिस्तान को हथियार नही भेजते तो पाकिस्तान हफ्ते दो हफ्ते से ज्यादा युद्ध नहीं खींच पायेगा। दरअसल CPEC का निर्माण पूर्ण होने तक चीन नहीं चाहता कि भारत-पाकिस्तान के बीच जंग हो। और चीन के पीछे हटने के कारण पाकिस्तान खुद ही चित हो गया। यदि चीन पाकिस्तान को युद्ध में जाने के लिए हाँ कर देता है, तो घंटे भर में ही इमरान खान के तेवर बदल जायेंगे।
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और यदि चीन पाकिस्तान को पूरे पूरे हथियार देना शुरू करता है और अमेरिका हमें हथियार देने से मना कर देता है तो पाकिस्तान वाली दशा भारत की हो जायेगी !! और तब भारत के नेता शांति एवं वार्ता के मोड में आ जायेंगे। यही तथ्य है। हमारे सैनिक साहस एवं बहादुरी का प्रदर्शन कर सकते है किन्तु हथियारों की भरपाई तो हथियार ही करेंगे।
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इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका देखिये -

(1) ट्रम्प ने कहा कि - भारत कुछ बड़ा करने वाला है।

और इसके तीन दिन बाद भारत ने एयर स्ट्राइक की !!

<https://www.ndtv.com/india-news/us-president-donald-trump-says-india-pakistan-standoff-a-very-dangerous-situation-news-agency-afp-1998006>;

(2) पाकिस्तान ने एयर स्ट्राइक की तो ट्रैम्प ने कहा कि - पाकिस्तान उसकी अनुमति* बिना F-16 का प्रयोग न करें !!

<https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/pak-cant-use-us-weapons-in-escalating-role-sans-nod-report/videoshow/68186485.cms>;

(3) ट्रम्प ने दिन में कहा कि - भारत-पाक के बीच तनाव के मामले में कुछ अच्छी खबर आने वाली है। हम दोनों पक्षों में समझौता करवा रहे है।

और शाम को पाकिस्तान ने विंग कमांडर अभिमन्यु को बिना किसी शर्त के छोड़ने की घोषणा की !!

<https://www.dnaindia.com/india/report-have-reasonably-decent-news-trump-hopes-india-pak-tension-coming-to-an-end-2724942>;
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(*) लॉकहीड मार्टिन ने F-16 में भर भर के कील स्विच इंस्टॉल किये हुए है, और पाकिस्तान अमेरिका की अनुमति बिना F-16 स्टार्ट भी नहीं कर सकता, इतनी लम्बी उड़ान की बात तो भूल ही जाइए। तो अमेरिका ने पहले पाकिस्तान को F-16 उड़ाने की अनुमति दी और बाद में कहा कि हमसे बिना पूछे आप F-16 का इस्तेमाल न करें !!!
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तो फिलहाल पिछले 10 दिनों से हम पेड मीडिया द्वारा रचा गया एक हाई वोल्टेज ड्रामा देख रहे है, जो 130+20=150 करोड़ लोगो से यह बात छुपा रहा है कि भारत-पाक के बीच चल रहे इस तनाव का स्टेयरिंग चीन एवं अमेरिका के पास है !! अमेरिका के इशारे पर पेड मीडिया 24*7 घंटे जनता को चाबी दे रहा है ताकि भारत को युद्ध में जाने के लिए तैयार किया जा सके। तो टीवी स्क्रीन पर आप जिन नेताओ को आक्रामक मूड में देख रहे है उनकी आक्रामकता की वजह यह है कि उन्हें अमेरिका की तरफ से हरी झंडी मिल गयी है।
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और यह खुली हुयी बात है कि इस पूरे मामले में एक बड़ा फेक्टर आगामी लोकसभा चुनाव है। मोदी साहेब का इस पूरे मामले में इतना ही इन्ट्रेस्ट है कि जंग का यह प्रोपेगेंडा उनके लिए वोट बढ़ा रहा है !!! वे जनता में इस तरह का बर्ताव कर रहे है कि ये सब उनका कमाल है !!
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हमे यह बात समझनी चाहिए कि आयातित हथियार शो पीस होते है, और इनका इस्तेमाल सिर्फ निर्यातक देश की अनुमति से ही किया जा सकता है। और जब युद्ध आता है तो इन हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए कीमत चुकानी होती है। यदि आप कीमत नहीं चुकायेंगे तो युद्ध हार जायेंगे।
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किन्तु नेता और पेड रक्षा विशेषग्य देश के नागरिको को आयातित हथियार दिखाकर यह दिलासा देते रहते है कि हम मुकाबला करने के लिए तैयार है !! पर जब जंग शुरू होती है तो सरकारे अन्दर खाने निर्यातक देशो एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों से समझौते करके इसकी कीमत चुकाती है।
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2003 से पहले तक इराकियों को भी लगता था कि जिस तरह आयातित मोबाईल द्वारा फोन किया जा सकता है, उसी तरह आयातित हथियारो से हम युद्ध का सामना कर सकते है !! और जब उन्हें ये बात समझ आयी तब तक काफी देर हो चुकी थी। कागजी यानी कि संवैधानिक स्वतंत्रता सिर्फ तब तक महसूस होती है जब तक हम जंग में नहीं जाते। और एक बार जैसे ही जंग शुरू हुई कागजो का काम ख़त्म हो जाता है। फिर स्वतंत्रता और संप्रभुता का फैसला हथियार करते है।
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1965 के हमले के बाद इंदिरा जी ने कई ऐसे प्रोजेक्ट शुरू किये जिससे भारत अपने हथियार स्वयं बनाने में आत्मनिर्भर हो जाए। दुःख का विषय है कि इंदिरा जी द्वारा जूरी सिस्टम गेजेट में न छापने के कारण भारत यह क्षमता जुटाने में नाकाम रहा और सारे प्रोजेक्टों ने वर्षो घिसटने के बावजूद आंशिक सफलता प्राप्त की।
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और 1991 के बाद से सभी नेता हथियारों के क्षेत्र में हमें अन्य देशो पर निर्भर बनाते चले गए। आज भारत बन्दूको से लेकर, टैंक और लड़ाकू विमान तक लगभग सभी आधुनिक हथियार आयात करता है !! और पाकिस्तान हथियारों के उत्पादन में हमसे भी बदतर हालत में है। सामरिक परमाणु बम और रायफल्स को छोड़ दें तो पाकिस्तान की लगभग पूरी सेना आयातित हथियारों पर चलती है !!
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समाधान :
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हमें प्रधानमन्त्री जी से ऐसे कानूनों को गेजेट में छापने की विनती करनी चाहिए जिससे हम भारत में "मेड इन इण्डिया मेड बाय इंडियन्स" नीति के तहत बड़े पैमाने पर आधुनिक हथियारों का उत्पादन कर सके। जूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स आदि कानूनों को लागू करके हम अपनी सेना को आत्मनिर्भर बना सकते है। यदि हम हथियारों के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जाते है तो हम यह तय कर सकते है कि हमें जंग में जाना है या नहीं। वर्ना चीन को ख़त्म करने के लिए अमेरिका हमें जंग में झोंक देगा !!
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कुल मिलाकर यदि हमें अपनी स्वतंत्रता बनाये रखनी है तो हथियारों में आत्मनिर्भरता हासिल करनी चाहिए। यदि हम हथियारों का उत्पादन नहीं करते तो युद्ध में झोंक दिए जायेंगे और यदि हम युद्ध टालते है तो इससे भी बड़ी कीमत चुकायेंगे। क्योंकि अमेरिका की गाड़ी रुकने वाली नहीं है।
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