Pawan Jury BhilwaraRj
सर्जिकल स्ट्राइक 2
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भारत सरकार का दावा है कि : हमारे विमानों ने बोर्डर क्रोस की और बम गिराए
पाकिस्तान सरकार का कहना है : भारतीय विमानों ने बोर्डर क्रोस की और बम गिराए
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भारत सरकार का दावा है : हमने जेश ए मोहम्मद के कैम्प पर एयर स्ट्राइक की जिसमें बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए
पाकिस्तान सरकार का कहना है : वहां कोई कैम्प नहीं था, और किसी भी व्यक्ति की जान नहीं गयी है !!
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यदि मोदी साहेब सेटेलाईट तस्वीरे जारी कर दे तो यह साबित हो जाएगा कि बम आतंकी कैम्प पर गिराए गए थे खाली जमीन पर नहीं। और इस तरह पाकिस्तान को एक्सपोज किया जा सकता है !!
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तो मोदी साहेब इन्हें जारी क्यों नहीं कर रहे है !!
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भारत के मीडिया का वर्जन : भारत के पेड मीडिया को पेमेंट मिलने के बाद उन्होंने इसमें आतंकियों की संख्या अपने मन से जोड़ दी। भारत के पेड मीडिया का वर्जन है कि 350 आतंकी मारे गए। मीडिया की मर्जी है, चाहे जितने जोड़ सकते है। मैं मीडिया के वर्जन में नहीं मानता हूँ, सिर्फ भारत सरकार के वर्जन में ही मानता हूँ।
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निचे मैंने कुछ नामचीन पेड अंतर्राष्ट्रीय मीडिया समूहों की इस हमले पर प्रतिक्रियाओ के हिन्दी अनुवाद दिए है। साथ ही इनके अंग्रेजी वक्तव्यों का लिंक भी दिया गया है। इन एजेंसियों ने सिर्फ उतना लिखा जितना भारत सरकार ने कहा। वजह साफ़ है , इन्हें आतंकियों की संख्या जोड़ने के लि पेमेंट नही की गयी थी। बहरहाल ये मीडिया समूह चवन्नी अठन्नी में पेमेंट लेते भी नहीं है, और सिर्फ अमेरिका एवं ब्रिटेन के धनिक ही इन्हें मेनुपिलेट कर सकते है।
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पेड न्यूयार्क टाइम्स - भारतीय एयर स्ट्राइक की प्रभावशीलता एवं लक्ष्य भेदने पर पश्चिमी रक्षा अनुसंधान कर्ताओ ने संदेह व्यक्त किया है !!
आगे वे लिखते है - पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों ने एक बड़े पैमाने के प्रशिक्षण शिविर के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए कहा है कि, पाकिस्तान अब इस तरह के शिविर नहीं चलाता है, और आतंकवादी समूह देश भर में छोटे समूहों में फैले हुए है। भारतीय हवाई हमले के लक्ष्य स्पष्ट नहीं थे, क्योंकि हाल ही में हुए पुलवामा हमले के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बदला लेने की कसम खाई थी, और इस वजह से सीमा पर स्थित आतंकवादी समूहो ने अपनी जगह छोड़ दी थी"
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पेड गार्जियन - यह अस्पष्ट है, यदि ऑपरेशन को इस तरह की सावधानी से अंजाम दिया गया हो कि भारतीयों के क्रोध को शांत किया जा सके !!
आगे उन्होंने लिखा - यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि क्या भारतीय विमानों द्वारा कुछ महत्वपूर्ण नुकसान पहुँचाया गया था। इस ओपरेशन के लक्ष्य अस्पष्ट थे कि, क्या 14 फरवरी के आत्मघाती विस्फोट से जनित देशव्यापी गुस्से को कम करने के लिए ऑपरेशन को सावधानीपूर्वक संचालित किया गया था।
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पेड वाशिंगटन पोस्ट - पुलवामा में हमला आम चुनावों से पहले हुआ था, और बताया गया था कि अमेरिका भारत की आत्मरक्षा के अधिकार के संतुलित समर्थन में है !!
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पेड अल जज़ीरा - इस हमले की उम्मीद की गई थी। लेकिन हर किसी को उम्मीद थी कि यह किसी भी तरह जल्द ही होगा, खासकर अप्रैल में होने वाले आम चुनावों से पहले !!
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पेड रायटर्स - मारे गए आतंकियों की संख्या के दावों का समर्थन करने के लिए भारत द्वारा फिलहाल कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है !!
लिंक - <https://www.thequint.com/news/india/international-media-on-iaf-air-strikes>
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तो हमारे मोदी साहेब ने इस पूरे मामले को इस तरह से संचालित किया है कि, पाकिस्तान समेत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की किरकिरी हुयी है। मतलब हम यह साबित नहीं कर पाए कि हमने आतंकवादी कैम्प पर हमला किया है। और यदि यह सन्देश जाता है कि हमने किसी कैम्प को नहीं बल्कि किसी खाली जमीन को निशाना बनाया तो आतंकियों की संख्या की स्टोरी अपने आप ही उड़ जाती है। लेकिन यदि हम यह साबित कर दें कि वहां पर कैम्प था तो फिर हम कह सकते है कि जो भी आतंकी थे वे मारे गए। लेकिन फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह नजर आ रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री ने एक ड्रामा रचा है।
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अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को हमें संतुष्ट करने की भले ही जरूरत न हो लेकिन यह बेहद जरुरी है कि हम पाकिस्तान के नागरिको के सामने इमरान खान एवं उनकी सरकार की नीति को एक्सपोज करें। इसके लिए भारत सरकार निम्न कदम उठा सकती है :
(1) भारत ने हमला 26 फरवरी को किया था। तो भारत इस हमले से 2-3 दिन पहले की और उसी जगह की हमले के बाद की सेटेलाईट तस्वीरें प्रकाशित कर सकता है। सेटेलाईट तस्वीरे विश्वसनीय होती है और इन्हें अन्य देशो द्वारा जांचा जा सकता है। इनमे अक्षांश, देशांतर एवं लोकेशन वगेरह सभी होती है। चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, रूस आदि देश इन्हें जांच कर सत्यता की पुष्टि कर सकते है।
ये कुछ प्राइवेट सेटेलाईट द्वारा खिंची गयी तस्वीरे है। इन्हें देखकर आप जान सकते है कि ये कितनी स्पष्ट होती है।
<https://fas.org/category/china/>
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चित्र 1: चीन के एक मिलिट्री ट्रेनिंग बेस की सेटेलाईट तस्वीर
चित्र 2 : चीन की SSBN पनडुब्बीयों की ख़ुफ़िया सेटेलाईट तस्वीर
चित्र 3 : रशिया के मिलिट्री बेस की ख़ुफ़िया सेटेलाइट तस्वीर
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भारत के पास अपने खुद के सेटेलाईट है और यह लोकेशन बोर्डर पर स्थित है। और भारत इनकी रेकी भी कर रहा था और हमला भी करने वाला था। तो जाहिर है सबूत के तौर पर भारत के सेटेलाईट ने कैम्प के चित्र अवश्य निकाले होंगे।
तो भारत सरकार को उस लोकेशन की तस्वीरे सार्वजनिक करनी चाहिए जहाँ के लिए हम दावा कर रहे है कि वहां कैम्प था और हमारे विमानों ने इसे ध्वस्त कर दिया है। और यदि हमने अपने सेटेलाईट से ये तस्वीरें नहीं निकाली है तो हमें अपने सेटेलाईट फिर से अपनी धरती पर बुला लेने चाहिए।
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क्योंकि यदि ये इतने संवेदनशील क्षेत्र पर नजर नहीं रख रहे है तो ये ऊपर जाया चक्कर लगा रहे है !! यदि भारत के सेटेलाईट ने ये तस्वीरें पहले नहीं निकाली तो इस समय की ताजा तस्वीरें तो भारत दिखा ही सकता है। आखिर हम यहाँ एक ऐसे परिसर की बात कर रहे है जिसमे 350 आतंकी रह नहीं रहे थे, बल्कि ट्रेनिंग ले रहे थे !! मतलब यह परिसर कम से कम 50,000 वर्ग मीटर में फैला हुआ होगा !!
भारत ने अपनी प्रेस रिलीज में कहा है कि यह कैम्प घने जंगलो के बीच एक पहाड़ी पर स्थित था। तो यह स्पष्ट है कि पहाड़ी पर होने के कारण तस्वीरें लेने में भी कोई बाधा नहीं है।
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(2) हम जासूसों द्वारा ली गयी कैम्प की लोकेशन, तस्वीरें, मृतको के जनाजो की चित्र आदि प्रकाशित कर सकते है।
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भारत ने अपनी प्रेस रिलीज में यह भी कहा कि हमें बेहद विश्वसनीय सूत्रों से पता चला कि वहां पर आतंकी कैम्प संचालित हो रहे है। और इन सबूतों के आधार पर कार्यवाही की।
तो यदि हमारे पास कैम्प की सेटेलाईट तस्वीरें नहीं थी तो जरुर जासूसों द्वारा इन कैम्पों के चित्र खींचे गए होंगे, या अमुक परिसर में रह रहे लोगो के आतंकी होने को सुनिश्चित किया गया होगा। उनकी तस्वीरे, कैम्प की भौगोलिक स्थिति और इस तरह के कई औडियो, वीडियो, चित्रों आदि के ब्यौरे उन्होंने भारत सरकार को भेजें होंगे।
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और इन सबूतों के आधार पर कार्यवाही की गयी होगी। अब ऐसा तो नहीं होता है कि किसी ने कहा हो कि यहाँ पर एक आतंकी कैम्प चल रहा है, आकर यहाँ बम गिरा दो। पहले सरकार यह सुनिश्चित करती है कि अमुक परिसर आतंकी कैम्प है, और यह यहाँ स्थित है। क्योंकि जब प्लेन जायेंगे तो उन्हें एक्जेक्ट लोकेशन देनी होती है। प्लेन निचे देखकर बमबारी नहीं करते, बल्कि लोकेशन पर गाइडेड बम गिराते है। गाइडेड बम लेसर डॉट का पीछा करता है और टार्गेट को ध्वस्त कर देता है।
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सरकार ने यह नहीं कहा कि बालाकोट पर बम गिराए गए है। बल्कि सरकार ने यह कहा है कि हमने एक पहाड़ी पर स्थित कैम्प पर बम गिराए है। और जब हमारी सरकार और विमानों को इस स्पॉट की एक्जेक्ट लोकेशन पता है तो हम इसे सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहे है !! अब तो यह इन्फोर्मेशन क्लासिफाईड नहीं है। अत: इसे छिपाने का कोई लाभ नहीं है। बल्कि नुकसान ही है।
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जब हम कह रहे है कि हमने पाकिस्तान को सबूत दे दिए है, तो अब हम उन सभी सबूतों को सार्वजनिक कर देना चाहिए जो हमने इस कैम्प के बारे में पाकिस्तान को दिए है। जब यह सार्वजनिक हो जायेंगे तो पाकिस्तान की जनता के सामने, पाकिस्तान के विपक्ष के सामने और अंतराष्ट्रीय समुदाय के सामने इमरान खान का सफ़ेद झूठ पकड़ा जाएगा और वे सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा होंगे। फिलहाल यह शर्मिंदगी हमें उठानी पड़ रही है।
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तो मुद्दा यहाँ यह नहीं है कि भारत के नागरिक भारत सरकार से सबूत मांग रहे है। बल्कि मुद्दा यह है कि पाकिस्तान के 20 करोड़ नागरिक और पूरा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भारत के प्रधानमंत्री जी को झूठा एवं ड्रामेबाज समझ रहा है !! भारत का कोई नागरिक यदि सबूत मांगे तो उसे गद्दार कह कह कर निपटाया जा सकता है, किन्तु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हम यह नहीं कह सकते कि हम कोई सबूत नहीं दिखाएंगे, और जो हमने कहा वो ही फायनल है !! इससे हम अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में और भी शर्मिंदा एवं और भी कमजोर नजर आते है !!
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जब उड़ी में या पुलवामा में हमारे जवान मारे जाते है तो हमले के सबूतों की जरूरत नहीं होती। क्योंकि हमारे जवानो के शव चीख चीख कर कह रहे होते है, कि हम पर हमला हुआ है। पूरे देश में शव यात्राएं निकाली जाती है, उनकी तस्वीरों पर हार चढ़ाए जाते है, सोशल मीडिया पर उनके क्षत विक्षत शव वायरल हो जाते है, और पूरा अन्तराष्ट्रीय समुदाय इन्हें देखता है !!!
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लेकिन जब हम सर्जिकल एवं एयर स्ट्राइक के रूप में इसका बदला लेते है तो हमारे पास मीडिया के ग्राफिक्स होते है जिन्हें स्टूडियो में बैठकर बनाया जाता है, और होती है एक 6 पंक्तियों की प्रेस रिलीज !!
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जब अमेरिका अपने टावर गिराने का बदला लेता है, तो ईराक एवं अफगानिस्तान के लाखों लोग टीवी पर आकर चीख रहे होते है कि देखो अमेरिकी फौजे हमारी चमड़ी उधेड़ रही है !!! तब पूरी दुनिया सद्दाम को फांसी पर झूलते देखती है !! और इसीलिए अमेरिका से उलझने से पहले कोई देश हज़ार बार सोचता है। वे जानते है कि बदला किस तरह लिया जाता है।
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कुल मिलाकर मोदी साहेब को इस हमले के वे सबूत सामने रखने चाहिए, जो उन्होंने पाकिस्तान को भेजे है, एवं वे सेटेलाईट तस्वीरें भी जारी करनी चाहिए जो पूरी अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी के सामने यह साबित करे कि, हाँ हमने उनका एक आतंकी कैम्प नष्ट किया है। और तब हमारा कहा जाएगा कि बदला पूरा हुआ। वर्ना मोदी साहेब इलेक्शन तो जीत जायेंगे लेकिन यह हमें अंतराष्ट्रीय समुदाय में आगे भी शर्मिंदा करता रहेगा।
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सर्जिकल स्ट्राइक 2 पर भारत सरकार द्वारा जारी की गयी प्रेस रिलीज सिर्फ अंग्रेजी में जारी की गयी है। हिन्दी में इसे जारी नहीं किया गया !! ( यदि किसी के पास सरकार द्वारा जारी किया गया हिन्दी वर्जन हो तो कृपया कमेन्ट बॉक्स में रखें )
मैंने इस प्रेस रिलीज का हिन्दी अनुवाद किया है जिसे मैं यहाँ रख रहा हूँ , साथ ही निचे मैंने अधिकृत अंग्रेजी वर्जन एवं इसके फुल टेक्स्ट का लिंक भी दिया है।
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“आज के शुरुआती घंटों में एक खुफिया अभियान के तहत, भारत ने बालाकोट में JeM के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर पर हमला किया। इस ऑपरेशन में, बहुत बड़ी संख्या में आतंकवादियों, प्रशिक्षकों, वरिष्ठ कमांडरों और जिहादियों के समूहों को, जिन्हें फिदायीन कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा था, समाप्त कर दिया गया। बालाकोट में यह शिविर जेएमएम के प्रमुख मसूद अजहर के बहनोई मौलाना यूसुफ अजहर (उर्फ उस्ताद घोरी) के नेतृत्व में संचालित थी।
इसलिए इस गैर-सैन्य पूर्वव्यापी कार्रवाई को विशेष रूप से JeM शिविर में लक्षित किया गया था। हमने लक्ष्य का चयन एवं हमला इस तरह से किया कि किसी सिविलियन को इससे नुकसान न पहुंचे। यह शिविर किसी भी नागरिक उपस्थिति से दूर एक पहाड़ी पर घने जंगल में स्थित है। चूंकि कुछ समय पहले ही कार्यवाही हुई है, इसलिए हमें और विवरणों की प्रतीक्षा है।”
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in an intelligence led operation in the early hours of today, India struck the biggest training camp of JeM in Balakot. In this operation, a very large number of JeM terrorists, trainers, senior commanders and groups of jihadis who were being trained for fidayeen action were eliminated. This facility at Balakot was headed by Maulana Yousuf Azhar (alias Ustad Ghouri), the brother-in-law of Masood Azhar, chief of JeM.
The Government of India is firmly and resolutely committed to taking all necessary measures to fight the menace of terrorism. Hence this non-military preemptive action was specifically targeted at the JeM camp. The selection of the target was also conditioned by our desire to avoid civilian casualties. The facility is located in thick forest on a hilltop far away from any civilian presence. As the strike has taken place only a short while ago, we are awaiting further details.
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बस यह इतना ही है। सरकार के अधिकृत बयान में पहाड़ी की लोकेशन, अक्षांश, देशांतर आदि नही है !! कैम्प परिसर का आकार भी नहीं है !! मारे गए आतंकियों की संख्या भी नहीं है !! सिर्फ यह कहा गया कि बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए। बड़ी संख्या का मतलब कुछ भी लगाया जा सकता है। 10 से लेकर 1000 जितना चाहे बोल सकते है। पहाड़ी बालाकोट के किस और स्थित है, पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण कुछ नहीं !! कोई चित्र नहीं !! कोई सेटेलाईट इमेज नहीं !!
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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की सूचनाओं को अस्पष्ट एवं अधूरी माना जाता है। न तो इनकी पुष्टि की जा सकती है, और न ही गलत साबित किया जा सकता है। शेष सभी डिटेल जो आप पेड मीडिया में देख रहे है, वह सरकार का वर्जन नहीं है। वह पेड मीडिया का वर्जन है, और पेड मीडिया द्वारा पेमेंट लेकर इस पर पेचवर्क किया गया है। आज सप्ताह भर बाद भी सरकार ने और कोई अतिरिक्त ब्यौरे सामने नहीं रखे है !!
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पाकिस्तान ने अपनी तरफ से उन जगहों की तस्वीरें जारी की जहाँ पर बम गिरने से गड्ढे हुए है। भारत ने उन तस्वीरों पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी कि पाकिस्तान द्वारा जिस जगह की तस्वीरे जारी की गयी है भारत ने वहीँ पर बम गिराए थे या कहीं और गिराए थे !!
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