Pawan Jury BhilwaraRj
कुंजी : #RtrScCj
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उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश पर राईट टू रिकॉल प्रक्रिया का सारांश :
यह क़ानून गेजेट में आने के बाद भारत के नागरिको को ऐसी प्रक्रिया मिल जायेगी जिससे वे बहुमत का प्रदर्शन करके प्रधानमंत्री को यह बता सके कि क्या भारत के मुख्य न्यायधीश की नौकरी चालू रखनी चाहिये या उसे नौकरी से निकाल दिया जाना चाहिये। भारतीय नागरिक पीएम को यह भी बता सकेंगे नागरिको का बहुमत किस व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश के पद पर नियुक्त करने की मांग कर रहा है।
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[ टिप्पणी : इस क़ानून को देश में लागू करने के लिए किसी तरह के संविधान संशोधन की जरूरत नहीं है । यह कानूनी ड्राफ्ट प्रधानमंत्री द्वारा राजपत्र अधिसूचना के रूप में छापा जा सकता है। इसे लोकसभा या राज्यसभा से अनुमति की आवश्यकता भी नहीं है । ]
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(1) यदि 30 वर्ष से ऊपर की आयु का कोई भारतीय नागरिक राष्ट्रीय स्वीकृत जूरिस्ट (NRJ) बनना चाहता है, तो वह जिला कलेक्टर के सामने प्रस्तुत होकर शपथपत्र दे सकेगा। सांसद के चुनाव में जमा होने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर कलेक्टर उसे एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा और उसका शपथपत्र NRJ पद के लिए प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा।
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(2) मतदाता अपने पटवारी कार्यालय में किसी भी दिन जाकर अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को NRJ के रूप में अनुमोदित कर सकेंगे। अनुमोदन SMS एवं ATM द्वारा भी दर्ज किये जा सकेंगे। नागरिक किसी भी दिन अपना अनुमोदन रद्द भी कर सकेंगे। कलेक्टर प्रत्येक महीने विभिन्न NRJ को प्राप्त अनुमोदनो की गिनती प्रकाशित करेंगे।
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(3) यदि किसी प्रत्याशी को 15 करोड़ से अधिक अनुमोदन प्राप्त हो जाते है तो प्रधानमंत्री उसे NRJ के रूप में नियुक्त कर सकते है।
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(4) यदि किसी NRJ को 45 करोड़ से अधिक अनुमोदन प्राप्त होते हैं और उसके अनुमोदन पदासीन मुख्य न्यायधीश के अनुमोदनों से 1 करोड़ अधिक भी है तो प्रधानमंत्री सबसे अधिक अनुमोदन पाने वाले NRJ का नाम भारत के उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और उच्चतम न्यायालय के प्रत्येक न्यायाधीश के पास भेजकर पूछेंगे कि क्या उस नए व्यक्ति को भारत के उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करना संवैधानिक रूप से उचित होगा।
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(5) यदि उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश और उच्चतम न्यायालय के प्रत्येक न्यायधीश 7 दिनों के अन्दर ये सिफारिश करते है कि अधिकतम अनुमोदित NRJ को ही मुख्य न्यायधीश नियुक्त किया जाना चाहिए और पदासीन मुख्य न्यायधीश को अपना पद त्याग देना चाहिए, केवल तब ही प्रधानमंत्री उस NRJ को नए ScCj के रूप में नियुक्त कर सकते है।
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(6) हालाँकि यदि उच्चतम न्यायालय का कोई न्यायाधीश इसका विरोध करता है या 7 दिनों के अन्दर कोई उत्तर नहीं देता है, तब प्रधानमंत्री अपनी सिफारिश रद्द कर सकते है, या अपना पद त्याग सकते है और नया लोकसभा चुनाव घोषित कर सकते है, या प्रधानमंत्री और लोकसभा सांसद आपातकाल घोषित कर सकते है। क्योंकि भारत के महान संविधान के अनुसार, आपातकाल के दौरान उच्चतम न्यायालय न्यायाधीशों को शामिल करते हुए सभी भारतीय नागरिकों के मूल अधिकार अस्थायी रूप से निरस्त हो जाते है। इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री और लोकसभा सांसदों का निर्णय अंतिम माना जायेगा।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो कृपया प्रधानमंत्री कार्यालय को पोस्टकार्ड भेजें : प्रधानमंत्री जी , कृपया इस क़ानून को गेजेट में छापे - <https://newindia.in/causes/RtrScCj>
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