> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2019-01-20

Pawan Jury BhilwaraRj

Reducing Repatriation - विदेशी कम्पनियों को भारत में अर्जित मुनाफे के एवज में भारत सरकार द्वारा डॉलर चुकाने के दायित्व का अंत करने के लिए प्रस्तावित राजपत्र अधिसूचना :
.
भारतीय नागरिको ,

जब कोई विदेशी कंपनी भारत में निवेश करती है तो उसे भारत में व्यवसाय करने के लिए भारतीय मुद्रा रुपये की जरूरत होती है। जब विदेशी कम्पनी भारत में आती है तो उसके पास डॉलर होते है , रुपया नहीं होता। अत: विदेशी कम्पनी रिज़र्व बेंक ऑफ़ इण्डिया में डॉलर जमा करके उसी अनुपात में भारतीय मुद्रा अर्थात रुपया प्राप्त कर लेती है, और भारत में इस प्राथमिक पूँजी से व्यापार शुरू करती है।
.
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया दो शर्तो के साथ डॉलर जमा करके रूपये का भुगतान करता है :

1. डॉलर पुनर्भरण नीति (Repatriation ) : इस व्यवस्था के तहत कम्पनी भारत में जितना भी मुनाफा रूपये में कमाएगी उसे रिजर्व बैन्क ऑफ़ इण्डिया में जमा करके डॉलर ले सकती है। उदाहरण के लिए मान लीजिये कि कम्पनी X 100 करोड़ डॉलर की प्राथमिक पूँजी लेकर आती है और ये डॉलर रिजर्व बैंक में जमा करके 100*70 = 7,000 रुपया प्राप्त करती है। मान लीजिये कि अगले दस वर्ष में कम्पनी X यदि भारत में व्यापार करके 35,000 करोड़ रुपया कमाती है तो कम्पनी 35 हजार करोड़ रूपये आर बी आई में जमा करेगी और आर बी आई इसके एवज में 500 करोड़ डॉलर चुकाएगा !!!
.
2. अपुनर्भरण नीति : इस व्यवस्था में आर बी आई उतना ही डॉलर चुकाने के लिए दायी होता है जितना डॉलर कम्पनी ने आर बी आई में जमा किया है। उदाहरण के लिए यदि कम्पनी X रिजर्व बैंक में 100 करोड़ डॉलर जमा करती है तो आर बी आई X को रूपये के बदले में अधिकतम 100 करोड़ डॉलर ही चुकाएगा, इससे अधिक नहीं।
.
मौजूदा समय में संस्थागत विदेशी निवेश या प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के तहत निवेश करने वाली विदेशी कम्पनियों को उनके द्वारा अर्जित किये गए पूंजीगत तथा अन्य लाभों पर असीमित पुन:भरण का विकल्प दिया गया है। किन्तु ऐसी स्थिति में जबकि हमारे पास डॉलर या विदेशी मुद्रा का पर्याप्त कोष नहीं है, विदेशी मुद्रा की यह कमी हमारे लिए कभी भी गंभीर विदेशी मुद्रा संकट का कारण बन जायेगी तथा हम विदेशी मुद्रा के क़र्ज़ में लगातार डूबते जायेंगे। भारत में विदेशी कम्पनियों की संख्या जितनी अधिक बढ़ेगी और जितना ज्यादा इनका मुनाफा बढेगा हम पर डॉलर चुकाने का बोझ भी उसी अनुपात में बढ़ता जाएगा !!
.
इसीलिए यह आवश्यक है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के जरिये आने वाले निवेश को अपुनर्भरण नीति के अंतर्गत ही स्वीकार किया जाए। अत: रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया या भारत सरकार को विदेशी कम्पनियों द्वारा अर्जित किये गए मुनाफे के बदले में डॉलर के भुगतान का कोई वादा नहीं करना चाहिए, बल्कि यह निर्धारित करना चाहिए कि अमुक कम्पनियां कमाए गए रूपये के एवज में डॉलर खुले बाजार से ख़रीदे।
.
यह क़ानून लागू करने से भारतीय अर्थव्यवस्था किसी भी समय खड़े हो सकने वाले इस गंभीर संकट से बच जायेगी ।
.
इसके अलावा निजी व्यष्टि को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की अनुमति से विदेशी बेंको के खाते में डॉलर या विदेशी मुद्रा रखने की छूट दी जानी चाहिए । निर्यात से अर्जित विदेशी मुद्रा को वे विदेशी बेंको के खाते में रख सकेंगे, तथा उस आय पर उन्हें आयकर की सामान्य दरो के अनुसार कर देना होगा।
.
यदि आप इस क़ानून का समर्थन करतें है, तो निम्नलिखित कदम उठाये :

(1) प्रधानमंत्री कार्यालय , दिल्ली को एक पोस्टकार्ड भेजें। पोस्टकार्ड पर यह लिखें --- " प्रधानमंत्री महोदय , कृपया इस क़ानून को गैजेट में छापें - <https://newindia.in/Repatriation>; "
.
(2) प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखें गए इस क़ानून को यहाँ वोट करें -- <https://newindia.in/Repatriation>;
.
(3) प्रधानमंत्री को यह ट्वीट करे - " @pmoindia , please print : <https://newindia.in/Repatriation>; , #Repatriation "
.
====== ड्राफ्ट का प्रारम्भ=====
.
1. [ परिभाषाएं ]

इस अधिनियम में "कंपनी" शब्द किसी भी भारतीय कंपनी या कोई भारतीय गैर सरकारी संस्था जैसे ट्रस्ट आदि या कोई विदेशी कंपनी या विदेशी सरकार या विदेशी गैर सरकारी संस्था जैसे कि कोई विदेशी ट्रस्ट आदि के लिए प्रयुक्त किया गया है।

इस अधिनियम में "भारतीय कंपनी" शब्द किसी भी भारतीय कंपनी या भारतीय गैर सरकारी संस्था जैसे ट्रस्ट आदि के लिए प्रयुक्त किया गया है। इस अधिनियम में "विदेशी कंपनी" शब्द किसी भी विदेशी कंपनी या विदेशी सरकार या विदेशी गैर सरकारी संस्था जैसे कोई ट्रस्ट आदि के लिए प्रयुक्त किया गया है ।
.
2. [ सभी के लिए निर्देश ]

भारतीय कम्पनियाँ व भारतीय नागरिक अपने निर्यात व हस्तान्तरण से अर्जित डॉलर असीमित दिनों के लिए भारतीय बैंकों में जमा कर सकेंगे। विदेशी कंपनी एवं विदेशी नागरिक अपने निर्यात व हस्तान्तरण से अर्जित डॉलर भारतीय या विदेशी बैंक में असीमित दिनों तक रख सकेगी। भारतीय नागरिक रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया की अनुमति के बिना विदेशी बैंकों में डॉलर नहीं रख सकेंगे। हालाँकि लौटे हुए अप्रवासी भारतीय विदेशी बैंको में दस वर्ष तक अपने खाते संचालित कर सकेंगे।
.
3. [ भारतीय नागरिकों के लिए निर्देश ]

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया व भारतीय बैंक रूपए के बदले डॉलर नहीं देंगे हालाँकि भारत सरकार के आयात की स्थिति में ऐसा किया जा सकेगा।
यदि निजी व्यक्ति कोई आयात करना चाहता है तो उसे उन भारतीय या विदेशी कम्पनियों / नागरिको से, जिनके पास भारतीय या विदेशी बैंकों में डॉलर है, से डॉलर प्राप्त करना होगा।
.
4. [ भारतीय नागरिकों के लिए निर्देश ]

कोई भारतीय ( या विदेशी नागरिक ? ) नागरिक अथवा कंपनी जिसने निर्यात अथवा हस्तान्तरण द्वारा डॉलर अर्जित किया है उन्हें रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया में जमा किये गए / बेचे गए डॉलर की मात्रा के अनुपात में 100 % तक की आयकर छूट मिलेगी। मतलब डॉलर देकर जितना रुपया आर बी आई से प्राप्त किया जाएगा वह कर मुक्त होगा।
.
5. आयकर की गणना में आयात को कटौती योग्य खर्चो में शामिल नहीं किया जाएगा ।
.
6. [ भारतीय नागरिकों के लिए निर्देश ]

कोई भी भारतीय नागरिक या कंपनी जो सोना या चाँदी आयात करती है वह आयातित सोने या चांदी की मात्रा के अनुपात में सोना आयातित अंक अथवा चाँदी आयातित अंक अर्जित करेगी। ये अंक हस्तांतरणीय होंगे। अंकों के खातों की रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा नामित बैंकों द्वारा देखरेख / निगरानी रखी जाएगी ।
.
7. [ भारतीय नागरिको के लिए निर्देश ]

कोई भारतीय नागरिक या भारतीय कम्पनी जो कि स्वर्ण या चांदी या मिश्रित गहनों का निर्यात करती है, को उस सीमा तक स्वर्ण या चांदी के निर्यात की अनुमति होगी, जिस सीमा तक उसने स्वर्ण या चांदी के आयात अंक अर्जित किये है या आयात अंको का हस्तांतरण किया है।
.
8. [ सभी के लिए निर्देश ]

कोई भी भारतीय नागरिक या कम्पनी एवं विदेशी नागरिक या कंपनी / नागरिक स्वर्ण या चांदी या धातु या धात्विक अयस्क का निर्यात प्रधानमन्त्री कार्यालय या उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी की अनुमति बिना नहीं कर सकेगी ।
.
9. [ कस्टम बोर्ड चेयरमेन के लिए निर्देश ]

यदि किसी मिश्रित सामग्री का निर्यात किया जाता है, जिसमे कि स्वर्ण या चांदी सम्मिलित है, तो ऐसे स्वर्ण या चांदी की कुल कीमत निर्यातित सामग्री के 1% मूल्य से अधिक की नही हो सकेगी। अन्य सभी धातुओ के लिए निर्यात शुल्क निर्यातित सामग्री के 30% के बराबर होगा ।
.
10. [ सभी के लिए निर्देश ]

यदि निर्यातक द्वारा रिज़र्व बेंक ऑफ़ इंडिया को डॉलर बेचे गए है, तब बेचे गए डॉलर की कीमत के 100% की सीमा तक उन्हें आय कर में छूट प्राप्त होगी, अन्य सभी परिस्थितियों में निर्यात द्वारा अर्जित आय पूरी तरह से कर योग्य होगी ।
.
11. [ भारतीय नागरिको के लिए निर्देश ]

ऐसी भारतीय कंपनी या नागरिक जो कि विदेशी मुद्रा रखते है, उन्हें महीने की आखिरी तारीख को भारत के बैंको में रखी गयी विदेशी मुद्रा पर 0.5% तथा भारत से बाहर बैंक में रखी गयी विदेशी मुद्रा पर 0.25% की दर से संपत्ति कर का भुगतान करना होगा।
.
12. [ भारतीय नागरिको के लिए निर्देश ]

प्राकृतिक संसाधनों पर आयात शुल्क शून्य होगा। जब आयातक प्राकृतिक संसाधन का आयात करेगा तब वह आयात सामग्री का मूल्य , श्रम आदि की घोषणा करेगा।प्राकृतिक संसाधनों के अलावा अन्य सामग्रियों पर आयात शुल्क 30% से 300% तक हो सकेगा। आयात एवं निर्यात शुल्क से प्राप्त कुल राशि का 33% हिस्सा भारत के सभी नागरिको में बराबर विभाजित करके नागरिको के खाते में सीधे जमा किया जाएगा।
.

13. [ सभी के लिए निर्देश ]

कोई भी भारतीय नागरिक या कम्पनी जो कि विदेशी मुद्रा रखती है, को रखी गयी विदेशी मुद्रा पर अर्जित किये गए लाभ पर महीने की आखिरी तारीख को 30% पूंजीगत कर का भुगतान करना होगा, जबकि पूंजीगत हानि को आगामी 36 माह तक अग्रेषित किया जा सकेगा ।
.
14. [ जिलाधीश के लिए निर्देश ]

यदि कोई नागरिक मतदाता इस क़ानून में संशोधन चाहता है, तो वह वांछित संशोधन के लिए एक शपथपत्र जिलाधीश कार्यालय में दे सकेगा । इस शपथपत्र को जिलाधीश या उसका सहायक प्रति पृष्ठ 20 रू की दर से शुल्क लेकर प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन कर के डाल देगा ।
.
15. [ पटवारी के लिए निर्देश ]

यदि कोई नागरिक मतदाता ऐसे शपथपत्र पर या उसमें वर्णित किसी धारा में बदलाव के लिए हां / ना दर्ज कराता है, तो पटवारी ऐसी राय को 3 रू लेकर दर्ज करेगा तथा इसे प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर डाल देगा। हाँ या ना की संख्या के आधार पर प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री फैसला लेने के लिए बाध्य नही होंगे।
.
======ड्राफ्ट का अंत=====