Pawan Jury BhilwaraRj
2018 की पुरानी खबर : पिछले साल फरवरी में RSS ने मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं को 10 साल तक के लिए 500 रुपया महिना पेंशन देना शुरू किया था। मुख्यधारा के कई बड़े समाचार पत्रों ने इसे छापा था। जैसे की अमूमन होता है संघ के अलग अलग स्वयंसेवक इस खबर के बारे में अलग अलग स्पष्टीकरण दे रहे है।
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राजस्थान पत्रिका - <https://goo.gl/1WzmYr>
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कुछ स्वंयसेवको का कहना है कि -- " अभी आपने संघ को ठीक से समझा नहीं है। समझने के लिए आप पहले 2-3 साल तक शाखा में आओ , और तब आपको खुद ही यह मालूम हो जाएगा कि यह खबर झूठी है" !!
और कुछ का कहना है कि -- "संघ का मूल सिद्धांत ही यही है कि मुस्लिम भी हमारे भाई है और इसीलिए जो सच्चा हिन्दू है वह ऐसा ही करेगा। तुमने अभी हिंदुत्व को ठीक से समझा नहीं है , इसीलिए कन्फ्यूज हो रहे हो। और यह समझने के लिए आपको शाखा में आकर तृतीय वर्ष करना पड़ेगा" !!
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संघ के स्वयंसेवको से आग्रह है कि इस खबर की पुष्टि करें। जब तक इसका खंडन नहीं आता तब तक मीडिया द्वारा प्रकाशित तथ्य को सही मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
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चूंकि यह खबर अख़बार में है और सार्वजनिक हो चुकी है , अत: किसी को शाखा में बुलाकर उसके कान में इसका स्पष्टिकरण देने में कोई सार नहीं है। उन्हें इसकी पुष्टि सार्वजनिक रूप से करनी चाहिए।
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मेरे मत में यदि संघ मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं को पेंशन देना चाहता है तो उन्हें इसके लिए क़ानून लाना चाहिये। वो खुद सरकार में है , आसानी से क़ानून ला सकते है। शेष, संघ किनसे चंदा लेता है और किन्हें बांटता है इस बारे में मुझे कोई सरोकार नहीं है। ये उनका निजी मामला है।
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