Pawan Jury BhilwaraRj
मेरे हिसाब से ईश्वर एक नहीं है। किसी भी व्यवस्था में यदि शीर्ष पद धारण करने वाला सिर्फ एक ही हुआ तो वह सर्वशक्तिमान होने के साथ ही निरंकुश भी हो जाएगा। सिर्फ उसी की पूजा होगी और सब उसी पर निर्भर रहेंगे। निरंकुश शक्ति की कामना रखने वाला एक दम्भी ईश्वर ही "सिर्फ एक ईश्वर होगा और वो ईश्वर भी सिर्फ मैं ही रहूँगा" जैसी व्यवस्था की रचना करेगा। यदि ईश्वर सिर्फ एक होगा तो उसके द्वारा अन्याय करने पर भी उसके अनुयायी इसे अन्याय नहीं कहेंगे बल्कि इसे न्याय कहकर ही पुकारेंगे !! इस तरह मेरे विचार में एकेश्वरवाद तुलनात्मक रूप से एक ज्यादा निरंकुश तंत्र है। और निरंकुश होने की वजह से गुंजाइश होने पर ईश्वर भी भ्रष्ट और उद्दंड हो जाएगा। और उसके अनुयायी उसे भ्रष्ट और उद्दंड कहेंगे भी नहीं। क्योंकि वे जानते है कि इसकी कहीं अपील नहीं है। और यदि ईश्वर भ्रष्ट नहीं भी होता है तो यह ईश्वर पर निर्भर है , व्यवस्थागत नहीं है। क्योंकि वह यदि उद्दंड हो जाता है तो उसे रोकने का कोई उपाय नहीं है।
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हिन्दू धर्म में शीर्ष स्तर पर एक ईश्वर नहीं है। ब्रह्मा , विष्णु और महेश में शक्तियों का बंटवारा होने के कारण शक्ति संतुलन है। इस तरह हिन्दू धर्म में कोई एक ईश्वर नहीं होने के कारण व्यवस्था निरंकुश नहीं है।
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लेकिन भारत के सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश भगवान से भी ज्यादा मजबूत स्थिति में है, और इसीलिए यह आदमी अनिवार्य रूप से भ्रष्ट और निरंकुश होता है। भारतीय शासन के सबसे शक्तिशाली पद को धारण करने वाला यह आदमी जब तक सुप्रीम कोर्ट का न्यायधीश रहता है , तब तक वह 120 करोड़ नागरिको का भाग्य विधाता है। जो उसकी मर्जी पड़े वो करते रहता है , और उसके अनुयायी उसकी हरकतों को न्यायोचित ठहराते रहते है। क्योंकि वे जानते है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की कहीं पर अपील नहीं है। जो वह करे वही न्याय है। और जब सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायधीश रिटायर होता है तो अपने किसी चमचे को अपनी कुर्सी पर बिठा जाता है। और चमचा तय करने के लिए उसने एक कमिटी बना कर रखी है जिसका नाम कोलेजियम रख छोड़ा है !!
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कोई चुनाव नहीं। देश की करोडो नागरिको की कोई राय शुमारी नहीं। कोई तय मापदंड नहीं। यदि आप सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश के चमचे है तो व्यवहारिक रूप से आप सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनने के योग्य है। और कुर्सी पर बैठते ही आप सर्वशक्तिमान हो जायेंगे !!
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दुनिया को चलाने के लिए ईश्वर ने जो भी विधान या सेट अप बनाया हुआ है उसमे दखल देने की न तो मेरी रुचि है और न ही यह मेरा क्षेत्राधिकार है। किन्तु सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भारत की जनता के प्रति जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। इसीलिए मेरा प्रस्ताव है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को चुनने और नौकरी से निकालने का अधिकार भारत के मतदाताओ को दिया जाए। ज्ञातव्य है कि अमेरिका में जजों को नौकरी से निकालने का अधिकार वहां के आम नागरिको के पास है। जजों के भ्रष्टाचार को सिर्फ इसी क़ानून द्वारा ठीक किया जा सकता है।
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