> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-04-27

Pawan Jury BhilwaraRj

प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के पास क़ानून बनाने की विशिष्ट शक्ति है। अत: जब वे आपको लूटेंगे तो इसके लिए वे बन्दुक का नहीं बल्कि क़ानून का इस्तेमाल करेंगे।
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नेता को जो कहना होता है वह अपने भाषणों में कहता रहता है। लेकिन जो उसे करना होता है उसके लिए वह क़ानून लागू कर देता है। जो बात नेता बोलेगा वह देश में लागू नहीं होगी, लेकिन जो क़ानून नेता बनाएगा वह देश में लागू हो जाएगा। जैसा क़ानून बनाया जाएगा , देश में उसी तरह का परिवर्तन आएगा। जनता की आखों में धुल झोंकने में हुनरमंद नेता भाषण कुछ और देते है और क़ानून कुछ और लागू करते है। इन भाषणों का निरंतर सेवन करने वाले और नेता द्वारा लागू किये जा रहे कानूनों को न पढने वाले अपरिपक्व नागरिक इस फर्क को नहीं समझ पाते और धोखा खाते रहते है। वर्षो बाद जब उन्हें इस धोखे का पता चलता है तो क्षतिपूर्ति करने के लिए किसी और नेता के भाषण सुनना शुरू करते है और फिर कुछ समय बाद उससे भी धोखा खाते है। कभी कभी वे यह बात ताउम्र नहीं समझ पाते कि देश कानूनों से चलता है , अत: देश उसी दिशा में जाएगा जिस तरह के क़ानून बनाए जायेंगे। जो नेता का आकलन उसके द्वारा लागू किये गए कानूनों के आधार पर करना शुरू कर देते है वे इस बात को समझ पाते है कि कौन नेता समस्याओ के समाधान पर कार्य कर रहा है और कौन सिर्फ समस्याए उठाकर वोट खींच रहा है।
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उदाहरण के लिए कश्मीर में धारा 370 हटाना, कश्मीरी पंडितो को फिर से बसाना, 2 करोड़ बांग्लादेशी घुसपेठियो को बाहर खदेड़ना, दो बच्चों का क़ानून बनाना , मंदिरों को सरकारी नियन्त्रण से मुक्त करना , राम-कृष्ण-विश्वनाथ मंदिर बनवाना आदि संघ=बीजेपी के मुख्य मुद्दे रहे है। मोदी साहेब समेत संघ के सभी नेता सत्ता से बाहर रहते हुए इन मुद्दों पर करोड़ो बयान और भाषण दे चुके है। लेकिन जब मोदी साहेब के नेतृत्व में संघ सत्ता में आया तो उन्होंने इन मुद्दों पर क़ानून बनाने के लिए जो किया उसका विवरण देखिये :
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(A) कश्मीर पर -

मोदी साहेब ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती द्वारा जारी किये गए 3 गेजेट नोटिफिकेशन को लागू करने की अनुमति दी, जो यह कहते है कि -
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(1) यदि कोई मुस्लिम कश्मीर में आतंकियों दी जा रही धमकियों या दमन से पीड़ित होकर जम्मू में आकर निवास करता है तो उसे सरकार की तरफ से पुनर्वास के लिए जमीन दी जायेगी ( इससे पहले यह सुविधा सिर्फ कश्मीर के हिन्दूओ को ही उपलब्ध थी। क्योंकि उन्हें उत्पीडन का सामना करना पड़ रहा था और इसीलिए वे कश्मीर से पलायन करके जम्मू में शरण ले रहे थे। ) !!!
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(2) यदि कोई नोमद या जनजातिय व्यक्ति / समुदाय जम्मू में सरकारी जमीन पर कब्ज़ा कर लेता है तो तब तक उससे जमीन खाली नहीं कराई जायेगी जब तक सरकार उसे अन्य कोई जमीन उपलब्ध न करवा दे !!
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(3) और इसके बाद एक के बाद एक कई गेजेट नोटिफिकेशन जारी करके कई समुदायों को नोमद एवं जनजातियों का दर्जा दिया गया ( इनमे से ज्यादातर के पास फर्जी सर्टिफिकेट्स है ) !!!
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जम्मू में फिलहाल हिन्दुओ का का बहुमत है , लेकिन इन कानूनों का प्रभाव यह होगा कि कश्मीर से बड़े पैमाने पर मुस्लिम और रोहिंग्ये जम्मू में आकर बस सकेंगे और जम्मू में भी हिन्दू अल्पसंख्यक हो जायेंगे। नतीजे में जम्मू के हिन्दुओ पर दमन शुरू होगा और उन्हें जान बचाकर जम्मू छोड़कर भागना पड़ेगा !! तो इस तरह मोदी साहेब और संघ के स्वयंसेवक कश्मीरी पंडितो को बसाने के नारे लगा रहे है लेकिन क़ानून वे ऐसे लागू कर रहे है जिससे जम्मू में मौजूद शेष हिन्दू भी उजड़ जाए। बाद में वे इन्हें फिर से बसाने के लिए भाषण देंगे और फिर से वोट इकट्ठे करेंगे।
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(B) धारा 370 पर -

धारा 370 हटाने का सबसे आसान एवं निरापद तरीका यह है कि कश्मीर का विलय उत्तराखंड एवं हिमाचल में कर दिया जाए। यह विलय करने के लिए हमें देशव्यापी जनमत संग्रह करवाना होगा। जनमत संग्रह में भारत के नागरिको बहुमत इस मुद्दे पर वोट कर देगा कि जम्मू कश्मीर का विलय इन दो राज्यों में कर के एक राज्य बना दिया जाना चाहिये। जो बात करोड़ो नागरिको के जनमत संग्रह में स्पष्ट हो जाती है, उसे संसद से पास हुआ ही माना जायेगा। क्योंकि संसद किसी भी तरह से देश के करोड़ो नागरिको से ऊपर नहीं है। दरअसल सांसद सिर्फ जनता के प्रतिनिधि है और उनके हवाले से ही संसद में बैठते है। अत: जब जनता स्वयं किसी मुद्दे पर अपना स्पष्ट बहुमत प्रकट कर दे ऐसे प्रस्ताव को संसद से आसानी से पास किया जा सकता है। जनता से स्पष्ट आदेश आने के बाद भी यदि कोई सांसद इस प्रस्ताव के खिलाफ संसद में वोट करता है तो जनता ऐसे सांसदों एवं पार्टियों की चुनावों में अच्छी खबर लेगी। क्योंकि तब यह साबित हो जाएगा कि अमुक सांसद या पार्टी स्वयं को जनमत से ऊपर समझती है और वे कश्मीर का भारत में विलय करने का विरोध कर रही है।
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लेकिन मोदी साहेब ने इस मुद्दे पर देश में जनमत संग्रह करवाने से साफ इनकार कर दिया। एवं देश की जनता ओ यह झूठ पकड़ाया कि धारा 370 ख़त्म करने के लिए हमारे पास पर्याप्त संख्या नहीं है। जाहिर है वे सरासर झूठ बोल रहे है। जनमत संग्रह करवाने के लिए किसी भी प्रकार के संविधान संशोधन की जरूरत नहीं है। यहाँ तक कि इसके लिए राज्यसभा में बहुमत की भी आवश्यकता नहीं है। पीएम कैबिनेट से प्रस्ताव मंजूर करके इसे गेजेट में प्रकाशित करके देश में जनमत संग्रह की प्रक्रियाए लागू कर सकते है।
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तो मोदी साहेब ने धारा 370 ख़त्म करने के लिए भाषण तो तमाम तरीके के दिए लेकिन उस क़ानून को लागू करने से स्पष्ट इनकार कर दिया जिससे धारा 370 को ख़त्म किया जा सकता है।
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(C) बांग्लदेशी घुसपेठियो पर --

भारत में 2 करोड़ मुस्लिम बंगलादेशी घुसपेठिये अवैध रूप से घुसे हुए है। बीजेपी ने 1998 का चुनाव भी इन्हें खदेड़ने के मुद्दे पर लड़ा था। लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्होंने इन्हें खदेड़ने का क़ानून नहीं बनाया। फिर 2014 में मोदी साहेब ने अपने चुनाव प्रचार में दर्जन बार इस तरह का बयान दिया कि सत्ता परिवर्तन के अगले दिन ही बांग्लादेशी घुसपेठियो को देश छोड़कर जाना पड़ेगा। मोदी साहेब ने तब तक इन्हें खदेड़ने का कोई भी ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं किया था। लेकिन श्रोताओं ने भाषण सुने और उन्हें वोट दिए।
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लेकिन मोदी साहेब ने सत्ता में आने के बाद इस दिशा में निम्नलिखित कदम उठाये :
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१) मोदी साहेब ने आधार कार्ड के फार्म में इस घोषणा को जोड़ने से साफ़ इंकार कर दिया कि --"मैं शपथपूर्वक घोषणा करता हूँ कि मैं भारत का नागरिक हूँ"। इस घोषणा के अभाव में सभी अवैध मुस्लिम बांग्लादेशी घुसपेठिये कानूनी रूप से आधार कार्ड बनवाने के पात्र बन गए। मतदाता सूची में उन्होंने अपने नाम पहले ही जुड़वाँ लिए है। और जिन घुसपेठियो के नाम मतदाता सूची में नहीं है वे भी आधार कार्ड के आधार पर अपने नाम अब मतदाता सूचियों में जुड़वाँ रहे है !! इस तरह मोदी साहेब ने भाषण दिया उन्हें खदेड़ने का लेकिन क़ानून बनाया उन्हें बसाने का !!
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२) इतना ही नहीं मोदी साहेब के कार्यकाल में बांग्लादेशी घुसपेठियो को खदेडने की बात तो दूर रही , बल्कि बड़े पैमाने पर रोहिंग्ये भी देश में बसने लगे। और मोदी साहेब ने उन्हें खदेड़ने के लिए भी क़ानून बनाने से इनकार कर दिया। उनके स्वयंसेवकों ने रोहिंग्यो के खिलाफ भाषण दिए लेकिन इन्हें बसाने में शासन की तरफ से पूरी मदद की।

३) मोदी साहेब ने बांग्लदेशी शरणार्थीयो को देश की नागरिकता देने से भी साफ़ इनकार दिया। ज्ञातव्य है कि , शरणार्थी वे हिन्दू नागरिक है जो दमन के कारण बांग्लादेश से पलायन करके भारत में शरण लेने आये है। इसके अलावा मोदी साहेब ने उन 500 हिन्दू शर्णार्थियो को भी भारत से वापिस रवाना कर दिया जो पाकिस्तान में दमन होने के कारण भारत में नागरिकता लेने की आस में पिछले ३ साल से भारत में टिके हुए थे। उन्हें देश से खदेड़ दिए जाने के बाद उन्होंने पाकिस्तान में जाकर इस्लाम ग्रहण कर लिया। तो मोदी साहेब इस तरह का प्रोपेगेंडा खड़ा करते है कि वे हिन्दूओ के हित चिंतक है किन्तु वे ऐसे कानूनों को लागू करने का विरोध करते है जिससे हिन्दू हितो की रक्षा हो।

लेकिन संघ के यही नेता और स्वयंसेवक जब सत्ता में नहीं थे तो यह एलान देते थे कि यदि हम सत्ता में आये तो बांग्लादेश , पाकिस्तान आदि देशो में हो रहे दमन के कारण जिन हिन्दुओ को जान बचाने के लिए भारत में शरण लेनी पड़ रही है उन्हें हम नागरिकता देने का क़ानून लागू करेंगे। लेकिन यह उनकी भाषण नीति का हिस्सा थी। जब क़ानून बनाने की बारी आई तो उन्होंने उलटे क़ानून बनाए।
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(D) टू चाइल्ड पॉलिसी पर -

1951 में हिन्दुओ का प्रतिशत 84% था जो कि 2011 में गिर कर 79.80% रह गया है। जबकि इसी अवधि में मुस्लिम जनसख्याँ 9.8% से बढ़कर 14.23% हो गयी है !! सबसे बड़ी वजह यह है कि मुस्लिम समुदाय में परिवार नियोजन का पालन नहीं किया जाता , अत: उनकी जन्म दर उच्च है। पिछले 30 साल से संघ के नेताओ एवं स्वयंसेवको का यह सबसे प्रिय मुद्दा रहा है। वे पिछले 30 वर्षो से इस मुद्दे पर भाषण दे देकर वोट खींच रहे है। वे 1990 से ही टू चाइल्ड पोलिसी लाने के वादे कर रहे है। लेकिन सत्ता में आने के साथ ही उन्होंने टू चाइल्ड लॉ लाने से साफ़ इनकार कर दिया।

परिणामस्वरूप इन भाषणों से उन्हें वोट तो मिले लेकिन समस्या का समाधान नही हुआ। समस्या जस की तस है, तथा और भी भयावह होती जा रही है। इस मुद्दे पर भाषण देकर संघ के नेताओं ने कार्यकर्ताओ और देश के 30 साल बर्बाद कर दिए। अब वे अगले 10 साल तक सत्ता में बने रहेंगे लेकिन दो बच्चो का क़ानून नहीं बनायेंगे। और जब वे सत्ता से बाहर हो जायेंगे तो फिर से इस मुद्दे पर भाषण देकर वोट खींचने लगेंगे !!
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(E) राम मंदिर पर -

राम मंदिर का मुकदमा अदालत में है। मुकदमा जमीन को लेकर है। इस मुकदमे में न तो संघ पक्षकार है , न ही बीजेपी। संघ=बीजेपी के नेताओं ने भाषण दिए कि वे राम मंदिर का निर्माण करेंगे। जाहिर है भारत में सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश के लिए चुनाव नहीं होते। और न ही संघ के नेता और मोदी साहेब भारत के प्रधान न्यायाधीश के पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे। फिर भी उन्होंने कहा कि हम मंदिर बनायेंगे। और जब वे सत्ता में आये तो उन्होंने इस मुद्दे पर कोमेडी करनी शुरू कर दी। कुछ बानगी देखिये :
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१) केन्द्रीय मंत्री राज्यवर्धन ने कहा कि -- "अयोध्या में राम मंदिर बन चुका है, मैं दर्शन करके आया हूँ !!

२) मोहन भागवत ने कहा कि -- हिन्दू कार्यकर्ताओ को 2050 तक मंदिर बनाने की जगह विज्ञान के अनुसन्धान पर ध्यान देना चाहिए !!

३) अमित शाह ने कहा कि -- राम मंदिर बनाने के लिए हमें 370 सीटे चाहिए !! ( सच्चाई यह है कि सिर्फ गेजेट नोटिफिकेशन द्वारा राम मंदिर निर्माण का क़ानून लागू किया जा सकता है। )

४) मोदी साहेब ने कहा - हमें देवालय से पहले शौचालय बनाने पर ध्यान देना चाहिए !! ( और उन्होंने शौचालय बनाये लेकिन मंदिर नहीं )

५) संघ के एक मंत्री ने कहा कि - राम मंदिर अब कोई मुद्दा नहीं है !!

६) और संघ के ही दुसरे मंत्री ने कहा -- 2018 तक राम मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा !!

इस बीच संघ के नेताओं एवं स्वयंसेवको ने काशी विश्वनाथ एवं मथुरा में कृष्ण मंदिर निर्माण का मुद्दा बिलकुल ही गायब कर दिया और राम मंदिर निर्माण का तो खैर उन्होंने अच्छा खासा तमाशा ही बना दिया।
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राम मंदिर ही नहीं , उन्होंने देश के अन्य हिन्दू मंदिरों को भी सरकारी नियन्त्रण से मुक्त नहीं किया , और इन मंदिरों का सोना सरकारी नियन्त्रण में ले लिया। संघ के सरकार ने जयपुर में दर्जनों मंदिर गिराए और अब काशी में सैकड़ो वर्ष पुराने 100 से अधिक मंदिर निशाने पर है !!
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समाधान ?
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समाधान बेहद सरल है। नेताओं के भाषण सुनना बंद कीजिये। भाषण शासन का अंग नहीं है। शासन कानूनों द्वारा संचालित होता है। यदि आप नेता के भाषण सुनना बंद कर देंगे तो उसके कार्यो का मूल्यांकन करने के लिए आपके पास सिर्फ एक रास्ता बचेगा -- आप इस बात पर ध्यान देना शुरू करेंगे कि हमारा नेता क़ानून कौन से लागू कर रहा है। और जब आप उसके द्वारा लागू कानूनों को देखना शुरू करेंगे तो नेता आपको झूठे वादे करके बेवकूफ बनाने की अपनी क्षमता खो देगा।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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