> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-04-28

Pawan Jury BhilwaraRj

आइ ए एस के पाठ्यक्रम में कुकिंग , डांसिंग, गायन , वादन आदि विषयो को शामिल क्यों नहीं किया जाना चाहिए। क्या ये विषय समाज एवं देश के लिए उपयोगी नहीं है ?
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मेरा बिंदु है कि -- राजनैतिक अंधविश्वास शास्त्र ( इसे राजनीति "विज्ञान" भी कहते है !! ) , समाज शास्त्र , इतिहास , अर्थशास्त्र आदि विषयो को पढ़ना किसी व्यक्ति के लिए काफी मजेदार हो सकता है जबकि अन्य किसी व्यक्ति को ये विषय बोर कर सकते है। लेकिन किसी व्यक्ति की योग्यता का निर्धारण इन विषयों की परीक्षा लेकर करना बिलकुल ही खुराफात है। क्योंकि इन विषयों की किताबों में जो बकवास लिखी गयी है उसे लिखने वाले "बुद्धिजीवी" तब भी धनिकों की कठपुतलियाँ थी एवं आज भी उनकी कठपुतलियाँ है। राजनीति शास्त्र की इन किताबों में जो ऊल जलूल कहानियां एवं सिद्धांत लिखे गए है उन्हें ढंग से घोट लेने वाले छात्र ही ऐसी परीक्षाओं में असाधारण प्रदर्शन कर पाते है। और इस बात में कोई संदेह नहीं है कि इन विषयों की परीक्षा पास करने वाले छात्र उन छात्रों से बदतर अफसर साबित होंगे जिन्होंने डांसिंग, कुकिंग, गायन , मोडलिंग , ड्रामा आदि विषयों में प्रशिक्षण लिया है। सच में।
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चीन में सरकारी अफसरों की नियुक्ति के लिए आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में अनिवार्य रूप से गणित-विज्ञान को शामिल किया गया है। और कई कारणों में एक कारण यह भी है , जिसकी वजह से चीन भारत से मीलो आगे निकल चुका है। तो चीन के बाबूओ की न सिर्फ विश्लेषण क्षमता भारत के बाबुओ से बेहतर है , बल्कि वे व्यवहारिक परिस्थिति को समझने एवं इसे निष्पादित करने की ज्यादा बेहतर काबलियत भी रखते है। जबकि ऐसे अनुत्पादक विषयों की पुस्तको में लिखे गए अन्धविश्वास अपने दिमाग में जमा कर लेने के कारण भारत के प्रशासनिक अधिकारियो का दिमाग भोट हो जाता है।
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समाधान ?
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तो हमारा प्रस्ताव यह नहीं है कि -- भारत की प्रशासनिक सेवाओं की परीक्षा के सिलेबस में कुकिंग, सिंगिंग, डांसिंग, ड्राइंग , ड्रामा, मेकअप , फैशन डिज़ाइनिंग , मूवी मेकिंग, मोडलिंग , रैम्प वाकिंग आदि विषयों को भी शामिल किया जाना चाहिए। बल्कि हमारा कहना है कि , सिविल सेवाओ की परीक्षाओं से इतिहास, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, समाज शास्त्र, दर्शन शास्त्र आदि विषयों को पूरी तरह से निकाल दिया जाना चाहिए। इसकी जगह सरकारी नियुक्तियों की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओ में गणित-विज्ञान एवं इंजीनियरिंग को शामिल किया जाना चाहिए।
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इसके लिए हमें लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओ की जरूरत है। क्योंकि जब तक लोक सेवा आयोग अध्यक्ष को नौकरी से निकालने अक अधिकार जनता के पास नहीं होगा तब तक यह आदमी परीक्षाओ से इन अनुत्पादक एवं मनोरंजक विषयों को हटाकर विज्ञान-गणित जैसे उत्पादक विषयों को सिलेबस में शामिल नहीं करेगा।
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राईट टू रिकॉल लोक सेवा आयोग का ड्राफ्ट राईट टू रिकॉल मंत्री के ड्राफ्ट के समान ही है। हम जल्दी ही इसके लिए अलग से ड्राफ्ट प्रस्तुत करेंगे। राईट टू रिकॉल मंत्री का ड्राफ्ट देखने के लिए मेरे कवर पेज पर क्लिक करके डिस्क्रिप्शन देखें।
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