Pawan Jury BhilwaraRj
खाद्य पदार्थो में मिलावट रोकने के लिए प्रस्तावित क़ानून -- "राईट टू रिकॉल खाद्य सुरक्षा अधिकारी"
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यदि आपने राईट टू रिकॉल शिक्षा अधिकारी का ड्राफ्ट पढ़ा है तो यह ड्राफ्ट उसी के समान है। किन्तु यदि आपने राईट टू रिकॉल शिक्षा अधिकारी के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट नहीं पढ़ा है एवं आप खाद्य पदार्थो में मिलावट की रोकथाम चाहते है तो यह ड्राफ्ट आपके लिए उपयोगी होगा।
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प्रूफ रीडिंग के बाद हम यह ड्राफ्ट newindia .in पर अपलोड करेंगे। नागरिको से अपील है कि वे @pmoindia पर पीएम को एवं अपने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ट्विट करके इस क़ानून को लागू करने की मांग करे।
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इस कानून में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी = DFSO ( District Food Safety Officer. ) पर राइट टू रिकॉल एवं मिलावट से सम्बन्धित विवादों के निपटान हेतु ज्यूरी द्वारा सुनवाई का प्रावधान किया गया है।
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कृपया इस बात पर भी विशेष रूप से ध्यान दें कि, सोनिया-मोदी-केजरीवाल खुद के राजनितिक / आर्थिक फायदों के लिए हमेशा से ही मिलावट रोकने के लिए प्रभावी कानून का विरोध करते रहे है। और कोंग्रेस-बीजेपी एवं आम आदमी पार्टी के सभी कार्यकर्ता भी इस क़ानून के विरोध में है।
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यदि आप देश के खाद्य पदार्थो में मिलावट रोकना चाहते है तो कृपया सोनिया-मोदी-केजरीवाल का समर्थन करके अपना समय एवं उर्जा नष्ट न करे। इन नेताओं एवं पार्टियों का समर्थन करने की जगह इस क़ानून को लागू करवाने का प्रयास करें।
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खाद्य पदार्थो में मिलावट रोकने के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट
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[ टिप्पणी : मिलावट रोकने का यह कानूनी ड्राफ्ट मुख्यमंत्री द्वारा सीधा राज्य के राजपत्र ( गैजेट ) में छापा जा सकता है, मुख्यमंत्री को विधानसभा या लोकसभा से इस प्रस्ताव को पारित करवाने की आवश्यकता नहीं है। ]
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इस ड्राफ्ट के तीन भाग है -
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भाग - I : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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भाग- II : ड्राफ्ट में दी गयी प्रक्रिया का सारांश
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भाग- III : अधिकारियों के लिए निर्देश एवं इस सम्बन्ध में टिप्पणियाँ
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इस ड्राफ्ट के महत्वपूर्ण खंड है - (1.1) , (2) , (7.1) , (7.2) , (7.5) , (8.1) , (15.1) , (15.2) , (J.4.1)
इस कानून-ड्राफ्ट के लेखको की राय में अन्य खंड अति-महत्वपूर्ण नही है और केवल सामान्य समझ के लिए है। ]
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राईट टू रिकॉल जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी को रिकॉल करने की जो प्रक्रिया यहाँ दी गयी है , उसे विस्तृत रूप से समझने के लिए - <https://newindia> .in/causes/rtr-deo/ पर रखें गए राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी का ड्राफ्ट देखें I
इस ड्राफ्ट में दी गयी ज्यूरी ट्रायल की प्रक्रियाओ को विस्तृत रूप से समझने के लिए कृपया - <https://newindia> .in/causes/jury-sys/ पर रखे गए ड्राफ्ट को देखें I
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भाग - I : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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(1) पदासीन जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी को या नये ज़िला खाद्य सुरक्षा अधिकारी की उम्मीदवारी को अनुमोदित करना :
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(1.1) यदि कोई मतदाता अपने जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारी को बदलना चाहता है, तो वह पटवारी कार्यालय में किसी भी दिन उपस्थित होकर किसी उम्मीदवार को अपना अनुमोदन दे सकता है। अनुमोदन दर्ज करवाने की इस प्रक्रिया के लिए समय , दिनांक , अवधि आदि का कोई निर्बन्धन लागू नहीं होगा। इन अनुमोदनों के आधार पर जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारी को बदला जा सकेगा।
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(1.2) खाद्य सुरक्षा अधिकारी खाद्य पदार्थो में मिलावट की जाँच आदि के लिए लैब आदि की स्थापना करेगा, मिलावटीयों को पकड़ने के लिए मुखबिरों का जाल बिछाएगा एवं मिलावटीयों के संस्थानों पर छापे मारने की कार्यवाही सम्पन्न करेगा। उसे ये कार्यवाही इस तरह से करेगा कि उन कारोबारियों को न्यूनतम असुविधा का सामना करना पड़े जो मिलावटी वस्तुओ के कारोबार में शामिल नहीं है। यदि खाद्य सुरक्षा अधिकारी यह काम सावधानी से नहीं करेगा तो आप यानी जिले के मतदाता ऐसे अधिकारी को नौकरी से निकाल कर दुसरे व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त कर सकेंगे।
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(2) आप को ( आशय मतदाता से है ) किसी मिलावट की शिकायत या किसी विवाद के निपटान हेतु ज्यूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी कारोबारी द्वारा मिलावट करना पाया जाता है या खाद्य सुरक्षा अधिकारी के कर्मचारियों द्वारा कर्तव्य में लापरवाही या अकर्मण्यता दिखायी जाती है तो इन शिकायतों का निपटान करने के लिए ज्यूरी बुलाई जायेगी, एवं यदि ज्यूरी में आपको बुलाया गया है तो आपको नगर परिषद् में उपस्थित होकर विवाद की सुनवाई करनी होगी एवं आरोपियों पर फैसला देना होगा। यदि आप ज्यूरी में उपस्थित होने से इनकार करते है तो ग्रेंड ज्यूरी आप पर दंड लगा सकती है।
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भाग - II : ड्राफ्ट में दी गई प्रक्रिया का सार
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(3) टिप्पणी: सम्पूर्ण ड्राफ्ट का सार
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(3.1) मतदाताओ के पास खाद्य सुरक्षा अधिकारी को बदलने या नौकरी से निकालने की प्रक्रिया होगी एवं उसके स्टाफ के खिलाफ की गयी शिकायतों एवं मिलावट आदि के मामलो का निपटान नागरिको की ज्यूरी द्वारा किया जायेगा।
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(3.2) राईट टू रिकॉल खाद्य सुरक्षा अधिकारी की प्रक्रिया को और भी अच्छे से समझने के लिए कृपया राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी का ड्राफ्ट देखें। यह ड्राफ्ट ‘newindia dot in / causes/RtrDeo3 ’ पर देखा जा सकता है।
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(3.3) किसी राज्य के मतदाता अमुक राज्य में दर्ज कुल मतदाताओं के स्पष्ट बहुमत का प्रदर्शन करके अमुक राज्य में स्थित किसी जिले में लागू राईट टू रिकॉल जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी एवं ज्यूरी प्रक्रियाओ को 4 साल तक के लिये निरस्त कर सकते है। और भारत देश के मतदाता देश में दर्ज कुल मतदाताओं के स्पष्ट बहुमत का प्रदर्शन करके किसी राज्य या जिले में लागू इन प्रक्रियाओ को 4 साल तक के लिये निरस्त कर सकते है।
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भाग III : अधिकारीयों के लिए निर्देश और टिप्पणीयां
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(4) टिप्पणी क्या है : ये टिप्पणीयां इस कानूनी ड्राफ्ट का वास्तविक हिस्सा नहीं है। कार्यकर्ता और नागरिक ड्राफ्ट को समझने हेतु इसका उपयोग कर सकते है। जूरी सदस्य इन टिप्पणीयों का उपयोग किसी मामले के फैसले के लिए सन्दर्भ के रूप में ले सकते है। किन्तु ये टिप्पणीयां किसी पर भी बाध्यकारी नहीं है।
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(5) शब्द "कर सकते है" का आशय है - किसी भी प्रकार का नैतिक-कानूनी बंधन नहीं। इसका स्पष्ट अर्थ है "कर सकते है" या "ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है"।
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(6) खाद्य सुरक्षा अधिकारी के लिए उम्मीदवारी
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(6.1) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति करेंगे। यदि जिला बड़ा है तो मुख्यमंत्री जिले को दो या अधिक संभागो में बाँट सकते है और प्रत्येक संभाग के लिए अलग से खाद्य सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति कर सकते है।
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(6.2) यदि किसी व्यक्ति के पास स्नातक डिग्री है तथा वह लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक पात्रता पूरी करता है, तो वह खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनने के लिए आवेदन कर सकता है। यदि इन पात्रताओ को धारण करने वाला कोई व्यक्ति जिला कलेक्टर के समक्ष आता है और कार्यरत खाद्य सुरक्षा अधिकारी को प्रतिस्थापित करने के लिए स्वयं को पंजीकृत करने हेतु आवेदन करता है तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में ली जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर उसका आवेदन स्वीकार करेगा। आवेदन स्वीकृत होने पर जिला कलेक्टर एक सीरियल नंबर जारी करेगा और उम्मीदवार का नाम और अन्य सम्बंधित सूचना मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा। यदि उम्मीदवार चाहे तो लिखित में आवेदन करके अपनी उम्मीदवारी वापिस ले सकते है।
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(6.3) जिला कलेक्टर कार्यरत खाद्य सुरक्षा अधिकारी को बिना कोई शुल्क लिए उम्मीदवार के रूप में पंजीकृत करेगा। उम्मीदवारों की सूची में कार्यरत खाद्य सुरक्षा अधिकारी का सीरियल नंबर 1 होगा।
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(7) नागरिको द्वारा प्रतिस्थापक उम्मीदवारो या कार्यरत खाद्य सुरक्षा अधिकारी को अनुमोदित करना :
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(7.1) यदि कोई मतदाता पटवारी कार्यालय आकर मुख्यमंत्री द्वारा निर्धारित शुल्क देता है, और अधिकतम पांच उम्मीदवारों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद के लिए अनुमोदित करता है और/ या वह कार्यरत खाद्य सुरक्षा अधिकारी को अनुमोदित करता है तो पटवारी उसकी स्वीकृति को कंप्यूटर में दर्ज करेगा और बदले में उसे रसीद देगा। इस रसीद में नागरिक की मतदाता पहचान पत्र संख्या, दिनांक / समय और उम्मीदवार जिन्हे उसने अनुमोदित किया है दर्ज होंगे।
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(7.2) यदि कोई मतदाता अपना अनुमोदन निरस्त करने आता है तो पटवारी उसके एक या उससे अधिक अनुमोदन बिना कोई शुल्क लिए निरस्त कर देगा। इस निरस्तीकरण को भी मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखा जाएगा।
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(7.3) टिप्पणी : अनुमोदनों के बारे में स्पष्टीकरण - (i) मतदाता किसी भी दिन अनुमोदन दर्ज कर सकता है और इसके लिए कोई समय सीमा नहीं है। अपनी सुविधानुसार विभिन्न मतदाता अपने अनुमोदन किसी भी दिन दर्ज कर सकते है। (ii) मान लीजिये, एक मतदाता ने उम्मीदवार A, B और C को अनुमोदित किया है। तब A, B और C की अनुमोदन संख्या 1 से बढ़ जाएगी। (iii) अब मतदाता किसी भी दिन अपना कोई भी अनुमोदन निरस्त कर सकता है। मान लीजिये कि अमुक मतदाता ने C के अनुमोदन को निरस्त किया है, तो C की अनुमोदन संख्या 1 से कम हो जाएगी और A और B के अनुमोदनों की संख्या अपरिवर्तित रहेगी। (iv) मतदाता किसी अन्य उम्मीदवार को भी किसी भी दिन अनुमोदित कर सकता है। मान लीजिये कि अमुक मतदाता D को अनुमोदित करता है, तो ऐसी स्तिथि में D की अनुमोदन संख्या 1 से बढ़ जाएगी और A और B की अनुमोदन संख्या अपरिवर्तित रहेगी।
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(7.4) पटवारी प्रत्येक मतदाता द्वारा दर्ज अनुमोदन को मतदाता की मतदाता संख्या, नाम और उसके द्वारा अनुमोदित उम्मीदवारों के नाम के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा।
(7.5) अनुमोदन दर्ज करने की प्रक्रिया खुली और सार्वजानिक होगी। अर्थात प्रत्येक मतदाता द्वारा दर्ज किये गए अनुमोदनों को मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखा जाएगा और यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए खुली एवं दृश्य होगी।
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(8) जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी को बदले जाने के लिए शर्त : यदि
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(8.1) किसी नए उम्मीदवार को प्राप्त अनुमोदनों की संख्या अमुक जिले के मतदाताओ की कुल संख्या के 35% (सभी दर्ज मतदाताओ की कुल संख्या के 35%) से अधिक हो, और
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(8.2) उसे मिले अनुमोदनों की संख्या पदासीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी को मिले अनुमोदनों की संख्या से उतनी अधिक है जो उस जिले में दर्ज अभिभावको की कुल संख्या के 2% के बराबर हो। और
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(8.3) उसके अनुमोदनों की संख्या सबसे अधिक हो।
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तभी और सिर्फ तभी मुख्यमंत्री पदासीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी को पद से हटा सकते है और ऊपर दी गयी शर्ते पूरी करने वाले नए उम्मीदवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है, या उन्हें ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है।
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(9) टिपण्णी :
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(9.1) ऊपर दी गयी धाराओं में इंगित "35%" और "2%" से आशय है "मतदाता सूचि में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या का 35% और 2% "। उदाहरण : यदि किसी जिले में 20 लाख मतदाता है तो 35% और 2% का अर्थ क्रमशः 700,000 और 40,000 होगा। यहाँ यह संख्या अनुमोदन दर्ज कराने वाले मतदाताओ की संख्या से अप्रभावित रहेगी। और खाद्य सुरक्षा अधिकारी के प्रतिस्थापन के लिए ऊपर दी गयी तीनो धाराओं (8.1) ,(8.2) ,(8.3) में दी गयी शर्तो का पूरा होना जरुरी होगा।
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(9.2) उदहारण – 1 : मान लीजिए किसी जिले में 20,00,000 मतदाता है ,तथा मान लीजिए कि पदासीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी को 500,000 मतदाताओ के अनुमोदन मिले है। तब यदि किसी उम्मीदवार को 20,00,000 के 35% = 700,000 मतदाताओ के अनुमोदन मिलते है, सिर्फ तभी मुख्यमंत्री उस नए उम्मीदवार को जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है या उन्हें ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है।
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(9.3) उदहारण – 2 : मान लीजिए किसी जिले में 20,00,000 मतदाता है तथा मान लीजिए कि पदासीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पास 800,000 मतदाताओ का अनुमोदन है। तब किसी उम्मीदवार के अनुमोदनों की संख्या (800,000 + 2% of 20,00,000) = (800,000 + 40,000) = 840,000, होना जरुरी है। सिर्फ तभी मुख्यमंत्री उसे खाद्य सुरक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकेंगे या उन्हें ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है।
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(10) कोई नागरिक किसी राज्य में अधिकतम 5 जिलों का और पुरे भारत में अधिकतम 15 जिलों का खाद्य सुरक्षा अधिकारी बन सकता है। यदि कोई खाद्य सुरक्षा अधिकारी मतदाताओ के अनुमोदन द्वारा खाद्य सुरक्षा अधिकारी बना है अर्थात प्रत्येक जिले में उसे 35% मतदाताओ से ज्यादा मतदाताओ के समर्थन प्राप्त है , तो उसका वेतन एवं भत्ते एक जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी के वेतन एवं भत्तों से उतना गुना होगा जितने जिलो में वह खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत है। उदाहरण के लिए- यदि कोई व्यक्ति भारत के 7 जिलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी है, और सिर्फ 5 जिलों में ही उसको मिले अनुमोदनों की संख्या 35% से ज्यादा है तो उसे पांच गुणा वेतन मिलेगा न कि सात गुणा। किन्तु यदि कोई व्यक्ति 5 जिलो में खाद्य सुरक्षा अधिकारी है एवं 4 या 5 जिलों में प्रत्येक जिले से उसे मिले अनुमोदनों की संख्या 35% से कम है, तब उसका वेतन सिर्फ एक जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी के वेतनमान के बराबर होगा।
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(11) कार्य अवधि: कोई व्यक्ति अपने जीवनकाल में एक जिले में अधिकतम 8 साल तक खाद्य सुरक्षा अधिकारी रह सकता है। इसके बाद वह किसी अन्य जिले में खाद्य सुरक्षा अधिकारी बन सकता है या अमुक जिले में किसी अन्य पद पर सेवा दे सकता है।
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(12) कोई भी सेवानिवृत्ति लाभ नहीं : यदि कोई व्यक्ति मतदाताओ के समर्थन द्वारा खाद्य सुरक्षा अधिकारी बना है और वह किसी भी राजकीय सेवा कैडर से नहीं आता है तो कार्य अवधी समाप्त होने पर या हटा दिये जाने पर उसे किसी भी प्रकार की सेवानिवृत्ति राशी एवं पेंशन लाभ आदि नहीं मिलेंगे। जिला / राज्य / भारत सरकार द्वारा पारित किये गए किसी कानून या प्रस्ताव द्वारा उसे सेवानिवृति लाभ दिए जा सकेंगे परन्तु यह कानून खाद्य सुरक्षा अधिकारी को किसी भी प्रकार के सेवानिवृत्ति लाभ देने के लिए कोई प्रावधान नहीं करता।
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(13) मतदाताओ द्वारा अनुमोदित खाद्य सुरक्षा अधिकारी का वेतनमान एवं भत्ते : मतदाताओ द्वारा अनुमोदित खाद्य सुरक्षा अधिकारी का वेतन एवं भत्ते वरिष्ठता एवं अन्य पात्रताओं की अवहेलना करते हुए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किये जाने वाले जिला कलेक्टर के वेतनमान के समकक्ष होंगे। खाद्य सुरक्षा अधिकारी सरकारी आवास, सरकारी वाहन, ड्राइवर या अपने आवास पर प्राप्त की जाने वाली सेवाओं की पूर्ती के लिए किसी भी प्रकार के अतिरिक्त स्टाफ का पात्र नहीं होगा। किन्तु खाद्य सुरक्षा अधिकारी इन सेवाओं के बराबर निर्धारित राशि भत्ते के रूप में प्राप्त कर करेगा। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री का फैसला अंतिम होगा। किन्तु मतदाताओ के अनुमोदन से नियुक्त सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारी राज्य सरकार द्वारा निर्धारित वेतनमान के समान वेतन प्राप्त करेंगे। यदि जिले के मतदाता चाहे तो वे बहुमत का प्रदर्शन करके खाद्य सुरक्षा अधिकारी के वेतन में अतिरिक्त वृध्दि कर सकेंगे।
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(14) मतदाताओ द्वारा अनुमोदित व्यक्ति को मुख्यमंत्री द्वारा खाद्य सुरक्षा अधिकारी नियुक्त करना : इस सम्बन्ध में फैसला मुख्यमंत्री करेंगे। मुख्यमंत्री मतदाताओ द्वारा अनुमोदित व्यक्ति को ओएसडी (OSD = Officer on Special Duty) के रूप में या खाद्य सुरक्षा अधिकारी के रूप में नियुक्ति दे सकते है। मुख्यमंत्री का फैसला अंतिम होगा।
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(15) टेस्टिंग लेब्स लगाना , खोजी कुत्ते जुटाना , मुखबिरों का जाल बिछाना , गुमनाम एवं नामजद शिकायतों को दर्ज करने के लिए वेबसाईट / एप्लीकेशन बनाना।
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(15.1) खाद्य सुरक्षा अधिकारी आवश्यकतानुसार टेस्टिंग लेब लगा सकेगा, खोजी कुत्ते खरीद सकेगा या उन्हें किराए पर ले सकेगा , ईमानदार प्रतिस्पर्धियो एवं मुखबिरों से ख़बरें जुटा सकेगा। खाद्य सुरक्षा अधिकारी एक मोबाईल एप्किकेशन / वेबसाईट भी उपलब्ध करवाएगा, जहाँ पर नागरिक गुमनाम या नामजद शिकायते दर्ज करवा सके।
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(15.2) विश्वसनीय सूत्रों एवं सूचनाओं का इस्तेमाल करके किसी इकाई पर छापे मार सकेगा और घटना स्थल पर ही वस्तु की जाँच कर सकेगा या फिर लेब में जाँच करने के लिए सेम्पल ले सकेगा। और यदि इस दौरान कोई व्यक्ति / कारोबारी हिंसा करता है या उसके कार्य में बाधा डालता है तो खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमुक आरोपियों की शिकायत ज्यूरी के समक्ष कर सकेगा।
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(15.3) मिलावट तब मानी जायेगी, जब आरोपी ने तय मापदंडो से अधिक मात्रा में मिलावट की हो।
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(15.4) जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी खाद्य पदार्थो में मिलावट की सीमा से सम्बंधित मापदंड के बारे में मुख्यमंत्री एवं नागरिको को सुझाव दे सकेगा। इसी क़ानून में दी गयी "जनता की आवाज" की धाराओं का प्रयोग करते हुए खाद्य सुरक्षा अधिकारी स्वयं द्वारा सुझाए गए मिलावट से संबधित मापदंडो को प्रकाशित कर सकेगा एवं इन्हें लागू कर सकेगा।
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(J) मिलावट सम्बंधित मामलो एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी के स्टाफ से सम्बंधित शिकायतों के निपटान के लिए जूरी प्रक्रिया
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(J.1) टिपण्णी : प्रस्तावित जूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए ‘ newindia dot in /causes/DJSM ‘ देखें
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(J.2) जब कभी खाद्य सुरक्षा अधिकारी / उसके स्टाफ एवं कारोबारी के बीच कोई विवाद होगा या कोई मामला , आर्थिक दंड आदि तय किया जाएगा तो खाद्य सुरक्षा अधिकारी मामले के निपटान के लिए नागरिको की ज्यूरी का इस्तेमाल करेगा। यह भाग ज्यूरी के गठन से सम्बंधित प्रक्रिया देता है।
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(J.3) खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रत्येक जिले में एक जूरी प्रशासक नियुक्त करेंगे, जिसे जिला जूरी प्रशासक कहा जाएगा। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी जूरी प्रशासक को किसी भी दिन बदल सकते है।
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(J.4) विवादों का निपटारा
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(J.4.1) प्रत्येक मामले के लिए जिला जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से रेंडमली 30 से 55 वर्ष की आयु के कुछ उन नागरिक चुनेगा जो कि पिछले 10 वर्षों में कभी जूरी मंडल में ज्यूरर बन कर नहीं आये है एवं अतीत में उनको किसी भी मामले में दोषी नही पाया गया है।
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(J.4.2) जूरी सदस्यों की संख्या : जूरी सदस्यों की न्यूनतम संख्या 12 और अधिकतम 100 हो सकती है। यदि जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा लगाए हुए जुर्माने की राशि 1 लाख से कम है तो जूरी सदस्यो की संख्या 12 होगी और उसके बाद प्रत्येक 1 लाख ज्यादा जुर्माने की रकम के लिए एक जूरी सदस्य और बढ़ाया जाएगा। जूरी सदस्यों की संख्या अधिकतम 100 हो सकती है। यदि मामला जुर्माने का नही है , बल्कि किसी अधिकारी के खिलाफ दुर्व्यवहार या भ्रष्टाचार का आरोप है तो जूरी सदस्यों की संख्या 50 होगी ।
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(J.4.3) जूरी सदस्य दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने विवेक एवं कानूनी सीमा के अनुसार जुर्माने की राशि निर्धारित करेंगे । जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी 67% जुरी सदस्यो द्वारा अनुमोदित जुर्माने की राशि को तय किया गया जुर्माना मानेंगे।
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(J.4.4) यदि 67% से अधिक जुरी सदस्य ये घोषित करते है कि, अभियुक्त कर्मचारी को पद से निलंबित किया जाना चाहिए तो जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी अभियुक्त कर्मचारी को निलंबित करेंगे ।
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(S) देश अथवा राज्य के नागरिको द्वारा राईट टू रिकॉल खाद्य सुरक्षा अधिकारी के क़ानून को निलंबित करने की प्रक्रिया :
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(S.1) राज्य के मतदाता ( सभी मतदाता, न कि सिर्फ वे मतदाता जिन्होंने वोट किया है ) मुख्यमंत्री द्वारा स्थापित की गयी प्रक्रिया का उपयोग करते हुए इस कानून को किसी जिले / राज्य में 4 वर्ष तक के लिए निलंबित कर सकते है। इस प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित होना चाहिए कि अमुक राज्य के कुल मतदाताओं ( न कि सिर्फ उन मतदाताओं ने जिन्होंने अनुमोदन की प्रक्रिया में भाग लिया है ) का बहुमत स्पष्ट रूप से इस निलंबन का समर्थन करता है। साथ ही राज्य के मतदाता अपने बहुमत का प्रयोग करते हुए इस निलंबन को 4 वर्षो की अवधि में असीमित आवृतियों तक बढ़ा सकेंगे।
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(S.2) देश के मतदाता ( सभी मतदाता, न कि सिर्फ वे मतदाता जिन्होंने वोट किया है ) प्रधानमंत्री द्वारा स्थापित की गयी प्रक्रिया का उपयोग करते हुए इस कानून को किसी जिले / राज्य में 4 वर्ष तक के लिए निलंबित कर सकते है। इस प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित होना चाहिए कि देश के कुल मतदाताओं ( न कि सिर्फ उन मतदाताओं ने जिन्होंने अनुमोदन की प्रक्रिया में भाग लिया है ) का बहुमत स्पष्ट रूप से इस निलंबन का समर्थन करता है। साथ ही देश के मतदाता अपने बहुमत का प्रयोग करते हुए इस निलंबन को 4 वर्षो की अवधि के लिए असीमित आवृतियों तक बढ़ा सकेंगे।
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(S.3) टिपण्णी : यहाँ "S" सम्प्रभुता ( Sovereignty ) का द्योतक है। आशय यह है कि, किसी भी जिले में लागू प्रक्रिया को राज्य / देश के मतदाता बहुमत का प्रदर्शन करके निलंबित कर सकते है, तथा किसी जिले / राज्य में लागू प्रक्रिया को देश के मतदाताओं का बहुमत निलंबित कर सकता है।
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(RV) [ सीमांकित मतदान या रेंज वोटिंग के लिए टिप्पणी ]
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अबाध्यकारी निर्देश - इस विधेयक के लागू होने के बाद चुनाव आयोग मतदाताओ को यह अनुमति दे सकेगा कि वे किसी उम्मीदवार को 0 से 100 के बीच अंक दे सके या फिर सामान्य रूप से हाँ / नहीं का अनुमोदन कर सके। यदि मतदाता द्वारा सामान्य अनुमोदन किया जाता है तो इस अनुमोदन को 100 अंको के समकक्ष माना जाएगा। किन्तु यदि मतदाता उम्मीदवार को अंक देता है तो मतदाता द्वारा दिए गए अंक ही मान्य होंगे। उम्मीदवार द्वारा प्राप्त किये गए सभी अंक ही उम्मीदवार के कुल अंको की संख्या मानी जायेगी। पदासीन अधिकारी के कुल अंको की मान्य संख्या दी गयी दोनों परिस्थितियों में से उच्च अंक को निर्दिष्ट करने वाली संख्या को माना जाएगा -- (अ) पदासीन अधिकारी को प्राप्त कुल मत * 67, (ब) चुनाव के बाद पदासीन अधिकारी द्वारा प्राप्त अंक।
प्रतिस्थापक चुनाव तब आयोजित किया जाएगा जब किसी उम्मीदवार के कुल अंको की संख्या ( पदासीन अधिकारी के कुल अंको की संख्या + अमुक निर्वाचन क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या * 100 / 10 ) के बराबर हो। तथा पदासीन अधिकारी का प्रतिस्थापन तब होगा जब उम्मीदवार को पदासीन अधिकारी से अधिक वोट मिलते है , और नए उम्मीदवार को पदासीन अधिकारी को पिछले चुनावों में मिले वोटो से 10% अधिक वोट मिलते है, या फिर नए उम्मीदवार को निर्वाचन क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ के 51% मतों से ज्यादा मिलते है। इस विधेयक की धारा ( CV.1 ) का उपयोग करते हुए यदि देश के कुल मतदाताओं के 51% नागरिक इस व्यवस्था को लागू करने के "हाँ" दर्ज कर देते है तो चुनाव आयोग इस प्रणाली को लागू कर सकता है या नही भी कर सकता है। यह कथित सीमांकित मतदान प्रणाली या रेंज वोटिंग सिस्टम ऐरो की कथित असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।
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(CV) जनता की आवाज (Citizens’ Voice):
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(CV.1 ) [ जिला कलेक्टर या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी के लिए निर्देश ]
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यदि देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता इस विधेयक की किसी धारा में बदलाव चाहता हो अथवा वह इस विधेयक से सम्बन्धित कोई शिकायत दर्ज करना चाहता हो तो ऐसा नागरिक मतदाता जिला कलेक्टर के कार्यालय में उपस्थित होकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस शपथपत्र को 30 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर दर्ज करेगा तथा एक सीरियल नंबर जारी करके इस शपथपत्र को स्कैन करके अमुक मतदाता के छाया चित्र (फोटो) एवं अन्य विवरण के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(CV.2 ) [ तलाटी अथवा पटवारी के लिए निर्देश ]
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किसी पटवारी कार्यालय के कार्यक्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता यदि इस विधेयक अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा ऊपर दी गयी धारा (CV.1 ) के तहत प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर अपनी हां / नहीं दर्ज कराना चाहता हो, तो वह मतदाता अपना पहचान पत्र लेकर तलाटी के कार्यालय में उपस्थित होगा और उपलब्ध आवेदन पर शपथपत्र का सीरियल नंबर दर्ज करके अपनी हाँ / नही दर्ज करेगा। पटवारी 3 रूपए का शुल्क लेकर इस हाँ / नहीं को दर्ज करके एक रसीद जारी करेगा । मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / नहीं को मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर मतदाता के नाम, मतदाता पहचान संख्या, दिनांक एवं अन्य विवरणों के साथ रखा जाएगा।
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