> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-04-22

Pawan Jury BhilwaraRj

भारत के जज भ्रष्ट एवं निकम्मे ही नहीं है , बल्कि वे अनिवार्य रूप से बहुधा "नाकाबिल" भी होते है।
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भारत में जजों के नियुक्ति की प्रक्रिया को जान बूझकर ऐसा बनाया गया है कि मेधावी व्यक्ति कभी भी जज नहीं बन पाता , लेकिन भ्रष्ट , भाई भतीजावादी एवं नाकाबिल लोग ही जज बन पाते है।
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जज की नियुक्ति के लिए दो तरह की प्रक्रियाओ का इस्तेमाल किया जाता है -- १) प्रतिस्पर्धी परीक्षा , २) सीधा मनोनयन या नियुक्ति।
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१) प्रतिस्पर्धी परीक्षा :
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न्यायिक सेवाओं की प्रतिस्पर्धी परीक्षा में भाग लेने के लिए अर्हता है कि , उम्मीदवार ने एलएलबी की हो , तथा उसे 5 वर्ष की वकालत का अनुभव हो। कक्षा 10 तक जिन छात्रों की मेधा अध्ययन में प्रदर्शित होती है वे विज्ञान-गणित में अच्छा प्रदर्शन कर पाते है। अत: मेधावी छात्रों की पहली किश्त यहाँ से गणित-विज्ञान विषय की और मुड़ जाती है और आगे चलकर मेडिकल / इंजीनियरिंग के पेशे की और रुख कर लेती है। इन शेष छात्रों में से मेधावी छात्रों की दूसरी खेप कक्षा 12 के बाद सीए फाउन्डेशन पास करके सीए का पेशा अपना लेती है।
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लॉजिक एवं विश्लेषण में अच्छा प्रदर्शन न करने वाले छात्र कला यानी आर्ट्स की शरण लेकर बीए करते है। मृत प्रकृति के इन अनुत्पादक विषयों को ढंग से आत्मसात कर लेने में सफल कुछ छात्र स्नातक के बाद प्रशासनिक सेवाओं में चयनित हो जाते है एवं बचे हुओ में से कुछ कम काबिल लोक सेवा / राज्य सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाएं पास कर लेते है। बचे हुए इन "शेष" छात्रों में से कुछ एलएलबी करते है व अगले कुछ वर्षो तक वकालत करते रहते है। और वकालत के 5 वर्ष बाद ये "बचे" हुए छात्र न्यायिक सेवाओं की परीक्षा देने की अर्हता हासिल कर लेते है !!! इनमे से भी जिन लोगो की वकालत चल निकलती है वे न्यायिक सेवाओं की और रुख नहीं करते , और न ही उन्हें इसके लिए समय रहता है।
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परीक्षा पास करने के बाद सभी छात्रों को अनिवार्य रूप से साक्षत्कार से गुजरना पड़ता है। साक्षत्कार जज लेते है और चयन करने के लिए वे अच्छी खासी घूस वसूलते है, या फिर अपने भाई भतीजो को पास कर देते है। तो इस तरह लगातार असफलताओं से गुजरते हुए एक छात्र जज बनने के लिए तैयार हो पाता है। और इनमे से ज्यादातर जज सिर्फ तब ही नियुक्त होते है जब वे साक्षत्कार में अच्छे अंक पाने के एवज में मोटा भुगतान करते है।
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२) सीधा मनोनयन या नियुक्ति
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इस प्रक्रिया में कोई प्रक्रिया नहीं है। जज प्रेक्टिस करने वाले वकीलों से मोटी घूस खाकर उन्हें सीधे लोअर कोर्ट , हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति दे देते है। जिस वकील के पास जितनी अच्छी सेटिंग और पैसा होगा उसके जज बनने के अवसर उतने ही बढ़ जायेंगे।
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ज्ञातव्य है कि चीन में जज के लिए आयोजित प्रतिस्पर्धी परीक्षा कक्षा 12 के बाद आयोजित की जाती है , एवं इस परीक्षा में गणित विषय का पर्चा भी होता है। इस तरह गणित का पेपर पास करने के कारण चीन के जजो में लॉजिक एवं विश्लेषण की ज्यादा काबलियत होती है। यदि छात्र परीक्षा पास कर लेता है , तो उसे बाद में क़ानून का पाठ्यक्रम पास करना होता है यानि एलएलबी की डिग्री लेनी होती है। इस तरह चीन फर्स्ट राउंड में ही उपलब्ध बेहतरीन मानव संसाधन में से जजो का चयन कर लेता है। दूसरा बड़ा अंतर है यह की चीन में साक्षत्कार नहीं लिए जाते। नियुक्ति सिर्फ लिखित परीक्षा द्वारा ही की जाती है। साक्षात्कार के अभाव में चीन के जजों की नियुती में भाई भतीजा वाद एवं भ्रष्टाचार मौजूद नहीं है। और इसी वजह से चीन की न्यायपालिका ज्यादा कार्यकुशलता से कार्य करती है। इसके अलावा चीन में भारत के 18,000 जजों के मुकाबले 2 लाख जज है।
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अमेरिका में जजों को नौकरी से निकालने का अधिकार आम नागरिको के पास है। राईट टू रिकॉल जज होने कारण जज तमीज से पेश आते है और भ्रष्ट आचरण करने से परहेज करते है। यदि फिर भी वे भ्रष्टाचार करने से बाज नहीं आते तो जनता लात मार कर उन्हें पद से हटा देती है। और सबसे बड़ी बात यह कि, अमेरिका में जूरी सिस्टम होने के कारण मुकदमो की सुनवाई करने और दंड देने की शक्ति नागरिको के पास है। इस वजह से मुकदमो का फैसला महीने दो महीने में आ जाता है। दंड देने की प्रणाली सुचारू होने से देश एवं समाज के हर वर्ग में अपराध कम होता है एवं उत्पादकता में वृद्धि होती है।
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समाधान - हमने जजों के भ्रष्टाचार को काबू करने एवं न्यायपालिका को दुरुस्त करने के लिए हमने राईट टू रिकॉल जज एवं ज्यूरी सिस्टम कानूनों का प्रस्ताव किया है। राईट टू रिकॉल जज कानून लागू होने से भारत के नागरिको को भ्रष्ट जजों को नौकरी से निकालने का अधिकार मिल जाएगा एवं ज्यूरी सिस्टम आने से दंड देने की शक्ति नागरिको के हाथो में आ जायेगी। निचे प्रस्तावित कानूनों के ड्राफ्ट दिए गए है। यदि आप इन कानूनों का समर्थन करते है तो प्रधानमंत्री को ट्विट करें कि इन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित किया जाए।
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१) जिला न्यायलय में ज्यूरी प्रक्रिया के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/829456537232542>;
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२) उच्च न्यायलय और उच्चतम न्यायलय में ज्यूरी प्रक्रिया के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट:
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/865700823608113>;
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३) राईट टू रिकॉल उच्चतम न्यायालय मुख्य न्यायाधीश के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859860420858820>;
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४) राईट टू रिकॉल उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट:
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859860140858848>;
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