> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-04-02

Pawan Jury BhilwaraRj

एससी एसटी एक्ट : समस्या का समाधान करने की जगह सभी राजनैतिक पार्टियों एवं नेताओं द्वारा इसका इस्तेमाल विभाजन करके अपना गुट बढाने में किया जा रहा है।
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ध्रुवीकरण / विभाजन करके राजनीति में अच्छे खासे वोट खींचे जा सकते है। यही वजह है कि विभिन्न राजनैतिक पार्टियाँ एवं उनके नेता अपनी भरसक कोशिश समुदाय में अलगाव बढाने में करते है। यदि किसी विषय पर समुदाय में दो वर्ग बन जाते है तो ये दोनो वर्ग अलग अलग पार्टियों को वोट करेंगे। यदि विभाजन समाप्त हो जाता है तो फिर से एक वर्ग बन जायेगा एवं ऐसा होते ही कोई एक पार्टी अपने वोट गंवा देगी , एवं उसका अस्तित्व ख़त्म हो जायेगा।
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संघ , कोंग्रेस , बीजेपी , सपा , आम आदमी पार्टी आदि सभी पार्टियाँ इस धंधे में शामिल है। ये सभी नेता हर धर्म एवं समुदाय में हर हाल में विभाजन करने की फिराक में रहते है। जो संगठन विभाजन करेगा, अलग हुआ गुट उसकी और चला जायेगा एवं उसे वोट करेगा। इस तरह ये अपना वोट निरंतर साधते रहते है। मतलब इनकी रोजी-रोटी समस्या है , एवं समस्या ही रहेगी। समाधान आने से राजनैतिक पार्टी की रोजी ख़त्म हो जाती है।
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एससी एसटी क़ानून का कितना गलत इस्तेमाल किया जा रहा है इस बात पर भी बहस करने की कोई तुक नहीं है। मूल समस्या यह है कि वस्तु स्थिति चाहे जो हो , हर स्थिति में एक पक्ष दुसरे पक्ष पर दमन करने का आरोप लगाते रहेंगे। सबकी अपनी धारणाएं है। किसी सामान्य वर्ग के व्यक्ति से पूछिए तो वह कहेगा कि इस क़ानून के कारण हम पर दमन हो रहा है , ( चाहे दमन नहीं हो रहा हो , पर उसे ऐसा ही लगता है की दमन हो रहा है ) , ठीक इसी तरह यदि इस क़ानून में बदलाव कर दिया जाता है तो फिर दलित कहेंगे कि हम पर दमन बहुत बढ़ गया है , ( चाहे दमन नहीं बढ़ा हो , पर उसे ऐसा ही लगता है कि दमन बढ़ गया है ) !! और नागरिक चाहे कुछ न कहे , पर दोनों समुदायों के नेता अपने अपने वर्ग के नागरिको को यह समझाते रहेंगे कि दूसरा पक्ष तुम पर दमन कर रहा है।
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मूल समस्या --- असल में मूल समस्या दंड देने की प्रक्रिया में मौजूद है। हर मुकदमे की परिस्थितियां अलग होती है। अत: कोई मुकदमा झूठा है या नहीं , इसका फैसला तो मुकदमा देखकर ही किया जा सकता है। लेकिन मुकदमो की सुनवाई का अधिकार जब जज के पास एवं जांच का अधिकार पुलिस अधिकारी के पास हो तो जिस पक्षकार के पास इन्हें चुकाने के लिए मोटा पैसा होगा उसी आधार पर ये फैसला होता है कि मामले की जांच कैसे होगी एवं क्या फैसला आयेगा।
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समाधान --- हमारा प्रस्ताव है कि एससी एसटी एक्ट के तहत दर्ज किये गए मामलो की सुनवाई नागरिको की जूरी द्वारा की जाए। प्रत्येक मुकदमे के लिए अलग से ज्यूरी होगी एवं यह जूरी सुनवाई करके मामले का त्वरित फैसला दे सकेगी। जूरी में 12 नागरिक होंगे , जिनका चयन मतदाता सूची से रेंडमली किया जाएगा। इस तरह हम प्रत्येक मुकदमे में सही तरीके से न्याय कर सकते है। जूरी द्वारा सुनवाई होने से किसी भी पक्ष द्वारा दमन की कोई शिकायत नहीं रह जायेगी।
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समस्या यह है कि संघ , बसपा, सपा , कोंग्रेस, आम आदमी पार्टी , भीम सेना, भीम आर्मी समेत विभाजन की राजनीति पर निर्भर सभी अन्य संगठन जूरी सिस्टम का विरोध कर रहे है। वे जानते है कि, जूरी सिस्टम आने से समस्या का समाधान होकर हाथ से विभाजन का मौका निकल जाएगा।
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यदि आप इस समस्या का स्थायी समाधान चाहते है तो पीएम को ट्विट करके मांग करें कि इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित किया जाए। इसके अतिरिक्त प्रत्येक तरीका विभाजन एवं दमन को सिर्फ बढ़ाएगा , कम नहीं करेगा।
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एससी एसटी एक्ट के मामलो के लिए हमने अलग से जूरी सिस्टम का ड्राफ्ट प्रस्तावित नहीं किया है। किन्तु जूरी सिस्टम के लिए हमारे द्वारा प्रस्तावित सामान्य ड्राफ्ट में कुछ मामूली परिवर्तन करके इस ड्राफ्ट को लागू किया जा सकता है। प्रस्तावित ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/829456537232542>;
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