> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2017-10-21

Pawan Jury BhilwaraRj

2003 में दिल्ली नगर निगम एवं स्वास्थ्य मंत्रालय नागरिको को आतिशबाजी करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा था !!! वजह ? उन्होंने पाया कि घनघोर आतिशबाजी डेंगू के मच्छरों का नाश कर देती है। और इस लिहाज से आतिशबाजी जरुरी है। आतिशबाजी का धुंवा वातावरण की नमी सोख लेता है और धुंवे के कारण मच्छरों की एक बड़ी आबादी नष्ट हो जाती है तथा नए मच्छरों के पनपने के अवसर भी समाप्त हो जाते है।
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इंडियन एक्सप्रेस का यह आर्टिकल पढ़ें - <http://www.thehindu.com/2003/10/16/stories/2003101610250400.htm>;
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2006 में टाइम्स ऑफ़ इण्डिया ने विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों के हवाले से रिपोर्ट किया कि दिवाली की आतिशबाजी मच्छरों से निपटने के लिए सबसे प्रभावी उपाय है।

टाइम्स ऑफ़ इण्डिया का लिंक -- <https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Cracker-cure/articleshow/2181064.cms>;
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इस विषय पर गूगल करने पर आपको और भी जानकारी मिलेगी।
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उल्लेखनीय है कि पटाखों से जो धुंवा और गर्मी पैदा होती है वह मच्छरों के लिए तो हानिकारक है लेकिन इंसान के लिए नहीं। क्योंकि आतिशबाजी का धुंवा वातावरण में सिर्फ 2 घंटे ही टिका रह सकता है। तो 6 बजे से आतिशबाजी शुरू होती है और 11 बजे तक चलती रहती है। इन पांच घंटो में मच्छर मर जाते है और 2 बजे तक प्रदूषण का स्तर फिर से वही हो जाता है जैसा कि आतिशबाजी से पहले था !!!
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पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता लेकिन संकेत कुछ ऐसे मिल रहे है कि दिल्ली में पिछले 15 सालो जो आतिशबाजी के खिलाफ प्रचार चलाया जा रहा है उसकी वजह से डेंगू एवं अन्य मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, और अगर ऐसा है तो इन अतिरिक्त मौतों के लिए जिम्मेदार वे लोग है जो दिवाली की आतिशबाजी के खिलाफ प्रचार अभियान चला रहे है !!!
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हमें किसी विश्वनीय संस्था द्वारा इस बारे तकनिकी अध्ययन करवाए जाने की जरूरत है, ताकि यह बात निकलकर आ सके कि आतिशबाजी लाभदायक है या हानिकारक।
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यदि मच्छरों पर दिवाली की आतिशबाजी का प्रतिकूल प्रभाव स्पष्ट हो जाता है तो सरकार को देश व्यापी प्रचार अभियान चलाना चाहिए जिससे नागरिक दिवाली पर आतिशबाजी करने को प्रोत्साहित हो।
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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