Pawan Jury BhilwaraRj
[ टू चाइल्ड पॉलीसी के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट का अपडेटेड संस्करण ]
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यह प्रस्तावित क़ानून दो से अधिक संतान धारण करने वाले अभिभावकों पर कुछ दंडात्मक प्रावधान लगाता है। परन्तु ( और यह परन्तु बेहद महत्त्वपूर्ण है ) जिन अभिभावकों के 1 या 2 या 3 पुत्रियाँ है किन्तु कोई भी पुत्र नहीं है, उन्हें इस क़ानून के अनुसार कुछ अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेंगे, एवं उन्हें किसी भी प्रकार के आर्थिक दंड का सामना नहीं करना होगा। जिनके 4 पुत्रियाँ है उनको प्राप्त होने वाले अतिरिक्त आर्थिक लाभ रोक दिए जायेंगे, किन्तु उन्हें किसी आर्थिक दंड का सामना नहीं करना पड़ेगा। किन्तु यदि किसी व्यक्ति के दो पुत्र या एक पुत्री एक पुत्र है और फिर भी वे एक संतान और पैदा करते है तो उन्हें कुछ आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा। किन्तु यदि किसी व्यक्ति के 4 पुत्र या एक पुत्र और कुछ पुत्रियाँ है तथा वह 2 और पुत्र या दो और पुत्रियों को जन्म देता है तो उसे कारावास की सजा हो सकती है या उसकी नसबंदी की जा सकती है।
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तो इस तरह यह "दो बच्चों का क़ानून" पुत्रियों को कुछ अतिरिक्त छूट प्रदान करते है।
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इसके अलावा आदिवासी ( अनुसूचित जनजाति ) में शिशु मृत्यु दर अधिक है , अत: ये क़ानून उन्हें एक अतिरिक्त संतान की छूट प्रदान करता है। किन्तु जनजाति के अलावा शेष सभी पर समान रूप से क़ानून लागू होगा।
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इस क़ानून की मुख्य धारा (5.2) है।
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टू चाइल्ड पालिसी का कानून ड्राफ्ट
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[ टिप्पणी : इस कानून ड्राफ्ट को लोकसभा में साधारण बहुमत द्वारा पारित करके देश में लागू किया जा सकता है। चूंकि इसे धन विधेयक के रूप में पारित किया जा सकता है, अत: इस क़ानून को राज्यसभा से पास करने की जरूरत नहीं है | यह क़ानून ड्राफ्ट भारतीय संविधान के किसी भी मौजूदा प्रावधान का उलंघन नहीं करता, अत: इसके लिए किसी प्रकार के संवैधानिक संशोधन की ज़रूरत भी नहीं है | यदि किसी सरकार के पास लोकसभा में साधारण बहुमत हो तो इसे लोकसभा से पास करके देश में लागू किया जा सकता है।
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जो नागरिक इस कानून ड्राफ्ट को भारत में लागू करवाना चाहते हैं वे @PmoIndia पर #TwoChildLaw , के साथ mygov .in पर अपलोड किये गए इस ड्राफ्ट के पीडीएफ का लिंक और इस पीडीएफ का sha1 हैश लिखकर पीएम को ट्वीट कर सकते है।
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इस ड्राफ्ट के दो भाग है -
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भाग -1 : नागरिको के लिए सामान्य निर्देश
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भाग - 2 : अधिकारीयों और नागरिकों के लिए निर्देश और टिप्पणियाँ
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इस क़ानून के महत्वपूर्ण खंड है - (5.2.1) से (5.2.10) , (7) ]
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भाग -1 : नागरिको के लिए सामान्य निर्देश
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(1) टिप्पणी : इस खंड में इस क़ानून ड्राफ्ट का सारांश दिया गया है। इस खंड में दिए गए निर्देश किसी भी पक्षकार पर बाध्यकारी नहीं है।
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(1.1) यह कानून लागू होने के एक साल बाद जिन नागरिको के संतानों की संख्या 2 से अधिक है तथा इसमें से 1 संतान का जन्म यह कानून लागू होने के एक साल बाद हुआ है , उन्हें सरकार से प्राप्त होने वाले अनुदानों एवं अन्य आर्थिक सहायताओ में 33% की कटौती कर दी जायेगी। और यदि उनकी संतानो की संख्या 3 से अधिक है तथा एक संतान का जन्म यह कानून लागू होने के एक साल बाद हुआ है तो कटौती 66% होगी।
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(1.2 ) यह कानून लागू होने के एक साल बाद, जिनकी 4 से अधिक संताने है और 1 संतान का जन्म यह कानून लागू होने के एक साल बाद हुआ है तो उन्हें 2 साल तक के कारावास और जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। जिनकी 5 से अधिक संताने है और साथ में 2 संतानो का जन्म यह कानून लागू होने के एक साल बाद पैदा हुआ है तो उन्हें 2 और सालो के कारावास और जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।|
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(1.3) जुर्माने और सजा का निर्णय जूरी सदस्य करेंगे। इस जूरी मंडल का चयन ज़िले / राज्य या भारत की मतदाता सूची में से क्रम रहित तरीके से किया जाएगा। जूरी सदस्यों का आयु वर्ग 25-55 वर्ष के मध्य होगा तथा इस जूरी मंडल में 12-1500 तक नागरिक हो सकेंगे।
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(1.4) हमारे समाज में बहुधा पुत्र प्राप्ति के लिए स्वाभाविक झुकाव एवं पुत्रियों के प्रति उदासीनता देखने में आती है। तो, यदि किसी दंपत्ति के दो बेटियां हैं तो इस कानून में सजा आदि तय करने के उद्देश्य से उन्हें एक संतान ही माना जायेगा। आदिवासियों में संतानो की मृत्यु दर अधिक है। अत: आदिवासियों को एक संतान "अधिक" रखने की अतिरिक्त छूट दी गयी है। यह छूट सिर्फ आदिवासियों को प्राप्त होगी, अनुसूचित जातियों या अन्य पिछड़ा वर्ग या अल्पसंख्यको को यह विशेषाधिकार नहीं मिलेगा।
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(1.5) जुड़वा, विकलांग संतानों और अन्य दुर्लभ जटिल मामलों के बारे में स्पष्टीकरण खंड 6 में दिया गया है।
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(1.6) प्रत्येक व्यक्ति, पुरुष या स्त्री, के लिए संतानों को अलग-अलग गिना जायेगा। तो उन मामलों में जब किसी को पूर्व विवाह से संताने थी या विवाह के अलावा संताने थी , संतान संख्या पति और पत्नी के लिए अलग अलग हो सकती है। किसी विवाद की स्थिति में वास्तविक जैविक पिता या माता को ही पिता या माता माना जाएगा। जूरी सदस्य किसी विवाद का निर्णय करने के लिए डीएनए टेस्ट के आदेश दे सकते है।
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भाग-2 : अधिकारीयों और नागरिकों के लिए निर्देश और टिप्पणियाँ
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(2) टिप्पणियाँ: इस ड्राफ्ट में दी गयी टिप्पणियाँ कार्यकर्ताओं, जूरी सदस्यों और नागरिको के लिए सामान्य निर्देश है और ये किसी पर भी बाध्यकारी नही है।
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(3) प्रधानमंत्री एक "राष्ट्रीय जनसँख्या नियंत्रण अधिकारी" को नियुक्त करेंगे जिसे भारत के नागरिक इसी क़ानून में दी गयी "राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय जनसँख्या नियंत्रण अधिकारी" प्रक्रिया का प्रयोग करके बदल सकेंगे। राष्ट्रीय जनसँख्या नियंत्रण अधिकारी स्टाफ के लिए केंद्र या राज्य सरकार से पदासीन कर्मचारियों को ले सकेगा , सरकारी विभागों में उपलब्ध आंकड़ो / सेवाओ का उपयोग कर सकेगा या वह अस्थायी आधार पर अधिक कर्मचारियों की भर्ती भी कर सकता है।
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(3.1) कर्मचारियों और आंकड़ो / सेवाओ का उपयोग करके राष्ट्रीय जनसँख्या नियंत्रण अधिकारी भारत में सभी नागरिकों और उनके माता-पिता और संतानों की सूची तैयार करेगा।
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(3.2) राष्ट्रीय जनसँख्या नियंत्रण अधिकारी समाचार पत्रों और टीवी / रेडियो द्वारा सभी नागरिकों को इस जनसँख्या नियंत्रण कानून के बारे में सूचना भी जारी करेगा।
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(4) यदि किसी व्यक्ति, पुरुष या स्त्री, के पास बाद में दिए खंडो में बतायी गयी संतानों की संख्या से अधिक संताने है, तो खनिज आमदनी भुगतान में कटौती, आर्थिक सहायता में कटौती, जुर्माना और कारावास लागू हो सकते है। आदिवासियों के लिए संतानों की संख्या अन्य के लिए निर्धारित संतानों की संख्या से एक संतान अधिक हो सकती है। सिर्फ आदिवासियों को ही यह छूट मिलेगी। अनुसूचित जातियों ,या अन्य पिछड़ा वर्ग या अल्पसंख्यको को यह विशेषाधिकार नहीं मिलेगा।
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(4.1) यह कानून लागू होने के 5 साल बाद सजा की अवधि बढ़ जायेगी। 5 साल बाद सजाओं की जानकारी बाद के खंडों में दी गयी है।
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(5) भुगतान और आर्थिक सहायता में कटौती, जुर्माना और कारावास नीचे के खंडो में दिए गए है। खंड 7 में इसका सारांश है।
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(5.1) यह कानून लागू होने के 1 साल बाद यदि किसी व्यक्ति के कोई संतान पैदा नहीं हुई है , तो सजा या भुगतान और आर्थिक सहायता में कटौती नहीं होगी। लेकिन भुगतान में वृद्धि हो सकती है।
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(5.2) लागू हो सकने वाले अतिरिक्त भुगतान, जुर्माना और सजा निम्नलिखित है :
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कृपया ध्यान दे : निम्नलिखित खंडों में, D का अर्थ है सिर्फ एक पुत्री और S का अर्थ है सिर्फ एक पुत्र। DD का अर्थ है दो पुत्रियाँ और DS का अर्थ है पहली संतान पुत्री है और दूसरी संतान पुत्र है। DDS का अर्थ है पहली संतान पुत्री है, दूसरी पुत्री है और तीसरी पुत्र है। दूसरे शब्दों में इस खंड में संतानों के पैदा होने का क्रम बताया गया है ना कि सिर्फ कुल संख्या। तो DSD का अर्थ है पहली संतान पुत्री, दूसरी पुत्र और तीसरी पुत्री है। और इस तरह SDD, DSD, DDS अलग अलग क्रम को दर्शाता है।
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(5.2.1) निसंतान - यदि किसी व्यक्ति की आयु 18 से 23 वर्ष के मध्य है तब उसे प्राप्त होने वाली खनिज रोयल्टी व सरकारी जमीनों के किराये से प्राप्त होने वाली राशि में 33% की अधिक वृद्धि हो जायेगी। 23 वर्ष की आयु के बाद निसंतान होने पर कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं मिलेगा।
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(5.2.1.1) टिप्पणी : सिर्फ ऊपर दिए गए खंड के लिए ही आयु सीमा मान्य है, निचे दिए गए सभी खंडो के लिए आयु सीमा मान्य नहीं है।
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(5.2.2) S - कोई सजा नहीं और ना ही रोयल्टी का अतिरिक्त भुगतान।
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(5.2.3) D या DD या DDD - कोई सजा नहीं और खनिज रोयल्टी एवं सरकारी जमीन से आने वाले किराये में 33% की अतिरिक्त वृद्धि।
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(5.2.4) DDDD - कोई सजा नहीं और खनिज आमदनी और सरकारी जमीन से आने वाले किराये में 66% की अतिरिक्त वृद्धि।
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(5.2.5) SS, SD, DS, DDS, DDDS, DDDDS, DDDDD - कोई सजा नहीं और आमदनी का कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं |
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(5.2.6) एक संतान, पुत्र या पुत्री खंड (5.2.5) के बाद - खनिज आमदनी में 33% कटौती 10 साल के लिए , ना कारावास और ना जुर्माना।
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(5.2.7) एक संतान, पुत्र या पुत्री खंड (5.2.6) के बाद - खनिज आमदनी में 66% कटौती 10 साल के लिए , ना कारावास और ना जुर्माना।
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(5.2.8) एक संतान, पुत्र या पुत्री खंड (5.2.7) के बाद - खंड (5.2.7) की सजा और साथ में 10 साल के लिए आय का 10% जुर्माना ( न्यूनतम रु 1000 प्रति महिना और अधिकतम रु 10000 प्रति महिना ), ना कारावास।
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(5.2.9) एक संतान, पुत्र या पुत्री खंड (5.2.8) के बाद - खंड (5.2.8) की सजा और साथ में 2 साल तक के लिए कारावास।
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(5.2.10) प्रत्येक संतान के लिए खंड (5.2.9) के बाद - खंड (5.2.9) की सजा और साथ में प्रति संतान के लिए 2 अधिक साल के लिए कारावास और बाध्यकारी नसबंदी।
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(5.3) कानून लागू होने के 5 साल बाद, अधिक संतान उत्पत्ति पर होने वाली सजा इस प्रकार है -
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(5.3.1) खंड (5.2.1) से (5.2.5) तक के मामलों में संतान संख्या के लिए - कोई सजा नहीं।
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(5.3.2) खंड (5.2.6) में संतान संख्या के लिए, खंड (5.2.7) में दी गयी सजा मिलेगी, और खंड (5.2.7) में संतान संख्या के लिए, खंड (5.2.8) में दी गयी सजा मिलेगी और सभी खंडो के लिए इसी प्रकार से सजा मिलेगी। दूसरे शब्दों में, खंड (5.2.5) के बाद सभी खंडो के लिए सजा "एक स्तर आगे" हो जाएगी।
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(5.4) जुर्माना संग्रहित करने में नियम - जुर्माना प्रत्येक माता-पिता पर 1000 रू प्रति महीना न्यूनतम तथा 10000 रू प्रति महीना अधिकतम होगा। लेकिन संग्रहित जुर्माना मासिक आय के 10% से अधिक नहीं होगा। तो यदि व्यक्ति की आय 10000 रू से कम है तब उसकी आय का 10% जुर्माना ही लिया जायेगा और शेष राशि "लंबित जुर्माना" के रूप में रखी जाएगी। लंबित जुर्माने पर प्रचलित दर के अनुसार ब्याज देय होगा। "लंबित जुर्माना" के मामले में, अवधि 10 साल के बाद भी बढाई जा सकती है, जब तक कि सारा लंबित जुर्माना ब्याज सहित संग्रहित नहीं हो जाता। अमुक व्यक्ति चाहे तो लंबित जुर्माना शीघ्र अति शीघ्र अदा कर सकता है। और राशियाँ 1000 रू और 10,000 रू महंगाई दर के अनुसार प्रति वर्ष बढाई जा सकती है।
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(5.5) अनुसूचित जनजाति के लिए विशेष प्रावधान - धारा (5.4) के प्रावधान लागू करते समय जिस एक संतान ( पुत्र या पुत्री ) की छूट दी जायेगी उसका चयन एवं संतानों की गणना इस तरीके से की जायेगी जिससे जुर्माने की राशि में अधिकतम कटौती हो। लेकिन अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति जिन्होंने सरकारी नौकरी या निजी नौकरी या सरकारी या निजी कॉलेज में दाखिला लेने के लिए आरक्षण का लाभ लिया है, इस विशेषाधिकार से वंचित रहेंगे। और अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति जिनकी संपत्ति रु 1 करोड़ से अधिक या सालाना आय 5 लाख रू है उन्हें भी इसका लाभ नहीं मिलेगा। ये छूटें सिर्फ अनुसूचित जनजाति के लिए है।
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(6) कुछ जटिल और विशेष परिस्थितियां
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(6.1) इस कानून के पारित होने से पूर्व ( या पारित होने के 1 वर्ष के अन्दर) जन्मी संतानों के कारण कोई भी जुर्माना या सजा नहीं होगी।
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(6.2) यदि अंत में जन्मी संताने जुडवा हैं तो उनको एक संतान ही गिना जाएगा। लेकिन यदि जुडवा संतानों के बाद कोई संतान जन्म लेती है तो जुडवा बच्चों को दो अलग संतानों के रूप में गिना जाएगा।
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(6.3) गोद ली गयी संतानों को गिना नहीं जाएगा।
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(6.4) दिव्यांग संतानों को गिना जाएगा। माता-पिता को दिव्यांग संतानों के लिए 66% अधिक खनिज रोयल्टी दी जाएगी।
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(6.5) यदि जन्मित संतान पुत्र या पुत्री नहीं है तो ऊपर लिखे नियमो को लागू करते समय उस संतान को पुत्री के रूप में गिना जाएगा।
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7) यह खंड धारा 5 के समान ही है। लेकिन पाठन में सुविधा के लिए इसे टेबल के रूप में रखा गया है। टेबल देखने के लिए पीडीऍफ़ डाऊनलोड करें।
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(J) जुर्माने एवं सजा निर्धारण के लिए जूरी ट्रायल के प्रावधान ( jury trial )
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(J.1) जब भी कभी राष्ट्रीय जनसख्या नियंत्रण अधिकारी ( या उनके कर्मचारी ) किसी नागरिक को खनिज रोयल्टी एवं सब्सिडी के रूप में मिलने वाली धन राशि को कम करने का निर्णय करेंगे या किसी तरह की सजा देना या जुर्माना लगाना चाहेंगे तो मामले के विचार के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी 25 से 55 तक की उम्र के नागरिकों को रैंडमली चुनेंगे और एक जूरी मंडल का गठन करेंगे। और जब भी कोई नागरिक किसी राष्ट्रिय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी के कर्मचारिओं के विरुद्ध कोई शिकायत दर्ज कराना चाहेंगे तब भी राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी वेसे ही एक जूरी मंडल का गठन करेंगे। ये खंड जूरी मंडल के गठन से सम्बंधित व्यवस्थाएं देता है।
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(J.2) राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी प्रत्येक जिले के लिए एक जूरी प्रशासक को नियुक्त करेंगे जिन्हें जिला जूरी प्रशासक कहा जाएगा। प्रत्येक राज्य के लिए भी एक जूरी प्रशासक को नियुक्त करेंगे जिन्हें राज्य जूरी प्रशासक कहा जाएगा और पुरे देश के लिए एक जूरी प्रशासक को नियुक्त करेंगे जिसे राष्ट्रिय जूरी प्रशासक कहा जाएगा।
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(J.3) अधिक संतानों के मामले या जनसंख्या नियंत्रण अधिकारियों के प्रति शिकायत के विषय में मामलों के लिए जूरी ट्रायल :
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(J.3.1) अधिक संतान धारण करने वाले आरोपी नागरिक और राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी के बीच मामला उस जिला न्यायालय में दर्ज किया जाएगा जिस जिले का आरोपी निवासी है। यदि जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी के विरुद्ध कोई शिकायत है तो उस जिले के न्यायालय में मामले को दर्ज किया जाएगा जिस जिले में अधिकारी नियुक्त हैं। यदि कोई नागरिक या राष्ट्रिय जनसँख्या नियंत्रण अधिकारी मामले को उसी राज्य के किसी दुसरे जिले में स्थानांतरण करना चाहते हैं तो वे राज्य जूरी प्रशासक या राज्य उच्च न्यायालय की अनुमति से ऐसा कर सकते हैं। और इनमे से कोई भी पक्ष यदि मामले को राज्य से बाहर अन्य किसी राज्य के किसी जिले में स्थानान्तरित करना चाहते हैं तो वे राष्ट्रिय जूरी प्रशासक या सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति से ऐसा कर सकते हैं। .
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(J.3.2) जिले में दर्ज हुए किसी भी मामले के लिए जिला जूरी प्रशासक जिले के विज्ञान ,इन्जिनीयरिंग ,गणित ,चिकित्सा शास्त्र के स्नातकों की सूचि में से 3 से 10 स्नातक चुनेगें जो की इस मामले में सहायता करने के इच्छुक हो। चुने हुए स्नातकों की उम्र 25 में से 55 के मध्य होनी चाहिए ,और उन्हें 5 वर्ष का कार्य अनुभव होना चाहिए।
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(J.3.3) जिला जूरी प्रशासक भारत की मतदाता सूची में से रैंडमली 25 से 55 वर्ष के नागरिकों को चुनेंगे। जूरी मंडल के लिए वे नागरिक पात्र होंगे जो पिछले 10 वर्षों के दौरान किसी जूरी मंडल में ज्यूरी सदस्य न बने हो तथा उनके ऊपर कोई आरोप सिद्ध न हुआ हो।
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(J.3.4) जूरी सदस्यों की संख्या का निर्धारण
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(a) किसी अधिकारी के विरुद्ध हुई शिकायत के मामले में जूरी सदस्यों की संख्या न्यूनतम 12 और अधिकतम 1500 होगी। आरोपी अधिकारी के पद की वरिष्ठता के अनुसार श्रेणी-4 ,श्रेणी-3 ,श्रेणी-2 और श्रेणी-1 के लिए जूरी सदस्य संख्या 12 ,50 ,200 या 500 हो सकती है। यदि अधिकारी बहुत ही वरिष्ठ हैं तो सदस्यों की संख्या 500 से अधिक हो कर अधिकतम 1500 तक हो सकेगी।
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(b) अधिक संतानों के कारण नागरिक पर दर्ज मामले के लिए नागरिक की वार्षिक आय और संपत्ति के पांचवे हिस्से में से जो अधिक है , वो राशि यदि 5 लाख से अधिक है तो जूरी सदस्यों की संख्या 12 होगी और इस राशि में प्रत्येक 5 लाख की वृद्धि के साथ जूरी मंडल में 1 सदस्य बढाया जाएगा। वार्षिक आय की गणना के लिए नागरिक की पिछले 3 वर्षों की वार्षिक आय के औसत को वार्षिक आय माना जाएगा।
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(c) जूरी सदस्यों की अधिकतम संख्या 1500 होगी।
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(J.3.5) जूरी सदस्यो को चुनने का क्षेत्र - जूरी सदस्य उन जिलों से चुने जाएंगे जहां के न्यायालय वीडियो कांफ्रेंस द्वारा उस जिला न्यायालय से जुड़े हों जहां मुकदमे की सुनवाई चलेगी। यदि कोई भी जिला न्यायालय उस जिले के न्यायालय से वीडियो कांफ्रेंस द्वारा नही जुडा हुआ है जहां सुनवाई चल रही है, तो सारे जूरी सदस्य उस जिले से ही चुने जाएंगे। सुनवाई उस भाषा में होगी जिस भाषा को ज्यूरी सदस्य भली भाँती समझते है।
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(J.3.6) जूरी सदस्य दोनों पक्षों को एक एक घंटे तक सुनेंगे। जब 65% से ज्यादा जूरी सदस्य कहेंगे कि वे काफी सुन चुके हैं, तब सुनवाई समाप्त होगी।
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(J.3.7) जुर्माने और निर्दोषता का निर्णयन
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(J.3.7.1) किसी अधिकारी के विरुद्ध दर्ज शिकायत के मामले के लिए - यदि 75% से अधिक जूरी सदस्य ये घोषणा करते हैं कि आरोपी अधिकारी को निलंबित कर देना चाहिए तो राष्ट्रिय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी उनको निलंबित कर सकते हैं या ऐसा नहीं भी कर सकते हैं। यदि 75% से अधिक जूरी सदस्य किसी जुर्माने की राशि पर सहमत हो जाते हैं तो राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी आरोपी अधिकारी से जुर्माना ले सकते हैं या नहीं भी ले सकते हैं। यदि शिकायत कर्ता को ये लगता है कि राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी ने जूरी सदस्यों के निर्णय को लागू नही किया है तो वो भारत के नागरिकों से ये आग्रह कर सकते हैं कि राष्ट्रिय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी को राइट टू रिकॉल राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी की धाराओं का प्रयोग कर नौकरी से निकाल दिया जाए।
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(J.3.7.2) अधिक संतान होने के कारण हुए मामले के लिए - आरोपी नागरिक को देय सरकारी अनुदानों में कटौती , जुर्माने और कारावास आदि पर 75% जूरी सदस्यों द्वारा लिए गये निर्णय को अंतिम निर्णय माना जाएगा।
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(J.3.8) जिला जूरी मंडल के निर्णय के विरुद्ध राज्य उच्च न्यायालय के जज या जूरी मंडल के समक्ष और उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय के जज या जूरी मंडल के समक्ष अपील की जा सकेगी।
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(RTR) राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी के लिए प्रावधान
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(RTR.1) यदि भारत का कोई मतदाता राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी बनना चाहता है, तो वह व्यक्तिगत रूप से अपने जिला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित हो सकता है। जिला कलेक्टर उससे सांसद के चुनाव में जमा होने वाली राशि के बराबर का आवेदन शुल्क लेकर राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी पद के लिए उसकी उम्मीदवारी स्वीकार करेगा और उसे एक विशिष्ट एक सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(RTR.2) कोई भी मतदाता पटवारी कार्यालय में 3 रू शुल्क देकर अधिकतम 5 उम्मीदवारों को राष्ट्रीय रजिस्ट्रार पद के लिए अनुमोदित कर सकता है | पटवारी उसके अनुमोदनो को कंप्यूटर में डालेगा और उस व्यक्ति का मतदाता पहचान पत्र संख्या, समय / दिनांक और उसके द्वारा अनुमोदित व्यक्तियों के नामो को दर्ज करके एक रसीद देगा। पटवारी नागरिक द्वारा अनुमोदित व्यक्तियों के नाम प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर नागरिक के मतदाता पहचान पत्र संख्या के साथ रखेगा।
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(RTR.3) यदि कोई मतदाता अपना अनुमोदन निरस्त करने आता है तो पटवारी उसके एक या अधिक अनुमोदन बिना कोई शुल्क लिए निरस्त कर देगा।
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(RTR.4) यदि किसी उम्मीदवार को 43 करोड़ से अधिक मतदाताओं का अनुमोदन प्राप्त है और यह अनुमोदन यदि पदासीन राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी के अनुमोदनों से 1 करोड़ अधिक भी है, तो प्रधानमंत्री सबसे अधिक अनुमोदन पाने वाले व्यक्ति को नए राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकते हैं, या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है। इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम होगा।
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(RTR.5) यदि पदासीन राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी के पास 35 करोड़ से कम अनुमोदन है तो प्रधानमंत्री उसे बदल सकते है।
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(RTR.6) प्रधानमन्त्री एक ऐसा सिस्टम बना सकते है जिससे नागरिक अपने अनुमोदन एस.एम.एस या एटीएम या मोबाइल फ़ोन एप्प के माध्यम से दर्ज / रद्द करवा सके।
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(RTR.7) टिप्पणी : भविष्य में प्रधानमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है, जहाँ मतदाता किसी उम्मीदवार को (-100 से 100) तक के अंक दे सके। इस तरह मतदाता के पास विकल्प होगा कि वह स्वीकृती या अस्वीकृती के साथ अंक भी दे सके। यदि मतदाता ने अंक नहीं दिए है और सिर्फ स्वीकृति / अस्वीकृति दी है तो अस्वीकृति का अर्थ शून्य अंक तथा स्वीकृति का अर्थ 100 अंक होगा। यदि किसी उम्मीदवार को मिले सकारात्मक अंक सभी दर्ज मतदाताओं के 33% से अधिक है तो उसके नकारात्मक अंको को ख़ारिज कर दिया जाएगा। जिस उम्मीदवार के पास अधिकतम अंक होंगे और जिसके पास संभावित अधिकतम अंको के 51% से अधिक भी अंक होंगे उसे राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया जा सकेगा।
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(CV) जनता की आवाज (Citizens’ Voice)
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(CV.1 ) यदि देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता इस कानून की किसी धारा में बदलाव चाहता हो अथवा वह इस कानून से सम्बन्धित कोई शिकायत दर्ज करना चाहता हो तो ऐसा नागरिक मतदाता जिला कलेक्टर के कार्यालय में उपस्थित होकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस शपथपत्र को 30 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर दर्ज करेगा तथा एक सीरियल नंबर जारी करके इस शपथपत्र को स्कैन करके अमुक मतदाता के छाया चित्र (फोटो) एवं अन्य विवरण के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(CV.2 ) किसी पटवारी कार्यालय के कार्यक्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता यदि इस विधेयक अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा ऊपर दिए खण्ड (CV.1 ) के तहत प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर अपनी हां / नहीं दर्ज कराना चाहता हो, तो वह अपना मतदाता पहचान पत्र लेकर तलाटी के कार्यालय जाएगा और उपलब्ध आवेदन पर शपथपत्र का सीरियल नंबर दर्ज करके अपनी हाँ / नही दर्ज करेगा। पटवारी 3 रूपए का शुल्क लेकर इस हाँ / नहीं को दर्ज करके एक रसीद जारी करेगा। मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर मतदाता के नाम, मतदाता पहचान संख्या, दिनांक एवं अन्य विवरणों के साथ रखा जाएगा। हाँ / नही की गिनती प्रधानमंत्री या किसी अधिकारी या अन्य पर बाध्यकारी नहीं होगी।
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===== टू चाइल्ड पालिसी के प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट का समापन ====