Pawan Jury BhilwaraRj

आक्सीजन के बिलो का भुगतान न करने से गोरखपुर के अस्पताल में 60 बच्चो की मौत -- प्रस्तावित समाधान ; राईट टू रिकॉल स्वास्थ्य मंत्री तथा हॉस्पिटल स्टाफ पर ज्यूरी प्रक्रियाएं। साथ है इस तरह के बड़े भ्रष्टाचार में नागरिको की ज्यूरी द्वारा सार्वजनिक नार्को टेस्ट।
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हॉस्पिटल का मुखिया कई बार भुगतान के बिल इसीलिए लंबित करके रखता है ताकि सप्लायर से घूस खायी जा सके। और कभी कभी घूस की यह मांग काफी बढ़ जाती है और सप्लायर घूस में मोटी राशि देने से इंकार कर देता है। इससे भुगतान और भी लंबित हो जाते है। नतीजा जीवनदायी आपूर्ति में कमी और मौतें।
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इस घूस में से एक बड़ी राशि मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री तक जाती है। कांग्रेस से लेकर बीजेपी और आम आदमी पार्टी के सभी मंत्री एवं मुख्यमंत्री घूस में से अपना हिस्सा नियमित रूप से लेते है। कोई भी नहीं छोड़ता। यदि किसी भी पार्टी का कोई भी मुख्यमंत्री किसी भी राज्य में यह हिस्सा लेना बंद कर देता तो वहां के सरकारी अस्पतालों के चिकित्सीय हालात तेजी से सुधरने लगते।
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किन्तु स्वास्थ्य मंत्री को न तो हम चुनते है और न ही उसे हटा सकते है। इसीलिए वह जनता के प्रति जवाबदेह नहीं रहता। वह दोनों हाथो से घूस इकट्ठी करता है और अपने मालिक ( मुख्यमंत्री ) को भेजता है। यदि स्वास्थ्य मंत्री को नौकरी से निकालने का अधिकार जनता को दे दिया जाता है तो मंत्री जी रातों रात कर्मठता और ईमानदारी से कार्य करने लगेंगे और मुख्यमंत्री को हफ्ता जाना बंद हो जाएगा। इसीलिए कोई भी मुख्यमंत्री यह कतई नहीं चाहता कि स्वास्थ्य मंत्री उसकी पकड़ से निकलकर जनता के हाथ में जाये। तो इस हादसे और इस प्रकार के सभी अकर्मण्यता से उपजे हादसों की मूल में कारण यह है कि मुख्यमंत्री भ्रष्ट है। और सिर्फ इसी वजह से वह राईट टू रिकॉल स्वास्थ्य मंत्री के क़ानून का विरोध करते है।
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राईट टू रिकॉल स्वास्थ्य अधिकारी एवं राईट टू रिकॉल मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कानून को लागू करने के लिए सिर्फ एक गैजेट नोटिफिकेशन निकालना होता है। और सिर्फ एक दिन में ही इसे लागू किया जा सकता है। अखिलेश यादव 5 साल तक मुख्यमंत्री रहे, किन्तु चूँकि उनसे घूस में अपना हिस्सा छोड़ा नहीं जा रहा था अत: उन्होंने इस क़ानून को लागू नहीं किया। जहाँ पर कांग्रेस एवं आम आदमी पार्टी की सरकार है वहां भी यही हाल है। किसी भी पार्टी के किसी भी नेता में अपने हिस्से की घूस छोड़ने की इच्छा नहीं है।
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अब हादसा होने के बाद जनता के हिस्से में जो आएगा वह जाँच करवाने एवं जिम्मेदारी लेने का प्रहसन होगा। और समाधान को दरकिनार कर जांच और जिम्मेदारी का यह नाटक अगले हादसे की तैयारी है।
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और यह स्थिति सिर्फ अस्पतालों की नहीं है। सभी सरकारी संस्थानों की यही हालत है। सभी विभागों के नोडल अधिकारी से लेकर शीर्ष अधिकारी तक पैसा इकट्ठा करते है और अपने विभागीय अधिकारियों के माध्यम से मंत्री और मंत्री से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक पहुंचाते है।
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तो यदि आप व्यवस्था में सुधार लाना चाहते है तो इन नेताओ और पार्टियों के भरोसे से बाहर आइये और उन कानूनों को लागू करने की मांग कीजिये जिनसे व्यवस्था में वास्तविक बदलाव आये। टीवी एवं अखबारों में जो बदलाव देखने को मिलता है वह आभासी है। इसे टीवी स्टूडियो में बैठ कर रचा जाता है। जमीनी हादसे और बदतर व्यवस्था सच्चाई है। वास्तविक बदलाव के लिए हमें अच्छे क़ानून चाहिए। राईट टू रिकॉल / ज्यूरी सिस्टम ऐसे क़ानून है जिनसे वांछित बदलाव लाया जा सकता है। तो यदि आप चाहते है कि ऐसे हादसों की पुनरावृति न हो तो राईट टू रिकॉल मंत्री एवं ज्यूरी सिस्टम कानूनों की मांग करें।
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राईट टू रिकॉल / ज्यूरी सिस्टम के क़ानून ड्राफ्ट देखने के लिए इस लिंक पर जाएँ -- https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"

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