Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
Pawan Jury BhilwaraRj:
गोरखपुर के जिस हॉस्पिटल में 70 बच्चे मारे गए है वहाँ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी का सार्वजनिक नार्को टेस्ट लिया जाना चाहिए । ताकि यह मालूम हो सके कि क्या घूस न मिलने की वजह से भुगतान रोक दिया गया था और क्या ऑक्सिजन सिलेंडरों की चोरी की जा रही थी ?
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इस आशय की विश्वसनीय अफ़वाहें है कि ऑक्सिजन की सप्लाई के लिए 10% का कमीशन तय था । लेकिन अचानक से हॉस्पिटल के मुखिया ने इसे बढ़ाकर 15% कर दिया था !! लेकिन सप्लायर ने 10% से ज़्यादा कमीशन देने से मना कर दिया । और इसी वजह से हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने भुगतान रोक दिए थे ।
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सप्लायर ने जून में ही हॉस्पिटल को लिखित में यह सूचना दे दी थी कि यदि मई तक का पेमेंट क्लीयर नही किया गया तो वह 1 अगस्त को ऑक्सिजन की सप्लाई रोक देगा । किंतु फिर भी मुख्य अधिकारी ने एक पैसा रिलीज़ नही किया !!
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सप्लायर ने 3 अगस्त को ऑक्सिजन की आपूर्ति घटा दी और 7 अगस्त तक इसे पूरी तरह से रोक दिया । और फिर हॉस्पिटल के पास सिलेंडर भी ख़त्म हो गए, क्योंकि सिलेंडर सप्लायर भी 15% घूस देने से इंकार कर रहा था !!
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आख़िर घूस की तय राशि में अचानक बढ़ोतरी क्यों की गयी ? क्या योगी जी अखिलेश द्वारा तय की गयी राशि से संतुष्ट नही थे ? क्या वे हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी से ज़्यादा पैसा माँग रहे थे ? क्या घूस की दर बढ़ाने के निर्देश योगी जी ने दिए थे ? ( कोंग्रेस / सपा / बसपा के शासन में घूस की दर मुख्यमंत्री ही तय करते थे । मुझे नही पता योगी के सत्ता में आने के बाद क्या व्यवस्था है )
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इस क़यासों में कितनी सच्चाई है ?
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पता लगाने का सिर्फ़ एक तरीक़ा है -- मुख्य आरोपियों का सार्वजनिक नार्को टेस्ट लिया जाए । वो भी तुरंत । समय गुज़रने से चीज़ें बदल जाएगी ।
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यहाँ 70 लाशें पड़ी है । और ऐसे हालात में नार्को टेस्ट लेने से किसी को ऐतराज़ नही होना चाहिए । इसीलिए मैं कोंग्रेस / भाजपा / आम पार्टी के कार्यकर्ताओं से आग्रह करूँगा कि इस समय वे कथित मानवाधिकार के गीत गाना बंद करे और सार्वजनिक नार्को टेस्ट का समर्थन करें । और नार्को टेस्ट के लिए डॉक्टर का चयन ज्यूरी द्वारा किया जाना चाहिए । क्योंकि हमारे जज चिकित्सा अधिकारियों से भी ज़्यादा भ्रष्ट है ।
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संघ के कार्यकर्ताओं से बात हो गयी है । उन्होंने इस हादसे के आरोपियों का नार्को टेस्ट लेने का विरोध करना शुरू कर दिया है । यदि आप नार्को टेस्ट के क़ानून का समर्थन करते है तो सोनिया-मोदी-केजरीवाल का समर्थन करना छोड़ दें । क्योंकि ये लोग हमेशा से ही नार्को टेस्ट के विरोधी रहे है । इनके सभी अन्ध्भगत नार्को टेस्ट के विरोध में जो दलीलें देते है वे आतंकवादियों की उन दलीलों से भी बदतर है जो वे निर्दोषों की हत्याओं को जायज़ ठहराने के लिए देते है । सुप्रीम कोर्ट में बैठे जज भी हमेशा से सार्वजनिक नार्को टेस्ट के विरोधी रहे है ।
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तो यदि आप चाहते है कि गोरखपुर में हुए हादसे और इसी तरह के अन्य गम्भीर हादसो एवं हत्या, संगठित भ्रष्टाचार, जघन्य बलात्कार आदि अपराधों के आरोपियों का सार्वजनिक नार्को टेस्ट लिया जाए तो नार्को टेस्ट के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ़्ट का समर्थन करें ।
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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