Pawan Jury BhilwaraRj

कैसे हम भारत में देशी गाय की प्रजाति को लुप्त प्राय करने में सहयोग कर सकते है, ताकि आम भारतीय नागरिक हानिकारक दूध देने वाले जानवरो का दूध पीने के लिए बाध्य हो जाए ?
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2014 में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों से घूस खाकर मनमोहन सरकार ने भारत में 80 जर्सी सांड आयात करने का फैसला किया था। किन्तु इससे पहले कि ये आयात हो पाता सरकार चली गयी। जब मोदी साहेब सत्ता में आये तो उन्होंने भी इस फैसले को रद्द करने से इनकार कर दिया। उन्होंने इसे क्रियान्वित करने के आदेश जारी किये। इस तरह ये सांड भारत में लाये गए और अब इन्हें विभिन्न राज्यों और जिलो में भेजा जा रहा है। इन सांडो के वीर्य का इस्तेमाल गायों के गर्भाधान में किया जाएगा।
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http://timesofindia.indiatimes.com/city/kolkata/Bulls-flown-in-from-Frankfurt-to-Kolkata-to-beat-milk-production-blues/articleshow/46292438.cms
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भारत की गायें दिन में 2 से 4 लीटर दूध देती है जबकि इन जर्सी सांडो के निषेचन से उत्पन्न गायें प्रतिदिन 30 लीटर तक दूध देने लगेगी।
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ज्यादा दूध एवं ज्यादा कमाई के लिए सरकार अब पशुपालको को अपनी गायों का निषेचन इन सांडो से करवाने के लिए प्रेरित करेंगे। इससे आने वाली पीढ़ी वर्ण संकर होगी। जो पशुपालक ऐसा नहीं करेंगे, वे पिछड जायेंगे और उन्हें आर्थिक नुकसान होगा।
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बाबा रामदेव ने भी भारतीय गायों की नस्ल "सुधारने" के लिए ब्राजील के सांडो की सेवाएं लेने का प्रोजेक्ट शुरू कर रहे है। वे इस मद में 500 करोड़ रूपये का निवेश करेंगे।

http://www.businesstoday.in/current/economy-politics/baba-ramdev-is-bringing-brazilian-bull-power-to-indain-cows/story/238394.html
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समस्या ?
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देशी गाय कम दूध देती है लेकिन भारत की शुद्ध नस्ल की गाय के दूध में A2 प्रोटीन होने के कारण यह दूध प्राकृतिक रूप से सेहत के लिए लाभदायक होता है। जबकि जर्सी जानवर --- दरअसल ये गाये नहीं है। इनके जींस के साथ अप्राकृतिक ढंग से छेड़छाड़ की गयी है। इनमे सूअर से लेकर भैंस और न जाने कितने जानवरों के जीन प्रत्यारोपित किये गए है। --- के दूध में A1 प्रोटीन होने से यह दूध सेहत के लिए हानिकर है। A1 प्रोटीन होने से हार्ट अटेक, हाई कोलेस्ट्रोल, एवं पाचन सम्बन्धी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए गूगल करे या राजीव भाई के व्याख्यान सुने।
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यदि सरकार जर्सी सांडो का आयात नहीं करेगी तब भी इस प्रक्रिया को धीमा तो किया जा सकता है किन्तु रोका नहीं जा सकता। क्योंकि सरकार के न करने से भी प्राइवेट कम्पनियां इन सांडो का आयात करेगी और पशुपालक मुनाफा कमाने के लिए अपनी गायों का गर्भाधान इन सांडो से करवाएंगे। बड़े पैमाने पर इस दूध का उत्पादन होने के कारण इस दूध की लागत कम होती चली जाएगी जबकि देशी गायों का दूध बहुत महंगा पड़ने लगेगा। इस तरह धीरे धीरे कुछ ही दशको में भारतीय प्रजाती की शुद्ध नस्ल की गाये लुप्त हो जायेगी। यह कुछ उसी तरह से होगा जिस तरह से बाजार से देशी टमाटर, देशी बैंगन, देशी लौकी, देशी आम आदि गायब हो गए है।
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तो भारतीय नस्ल की गायों को लुप्त प्राय करने के लिए हमको कुछ भी नहीं करना है। कुछ भी नहीं करने से धीरे धीरे ये नस्ले कम से कम होती चली जायेगी और बाजार की प्रतिस्पर्धा के कारण लुप्त हो जायेगी। "यदि हमने सरकार पर उन कानूनों को लागू करने का दबाव नहीं बनाया जिनसे भारत की नस्लों को सरंक्षित एवं संवर्धित किया जा सके", तो इस प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता। गाय हमारी माता है के नारे लगाना पर्याप्त नहीं है, हमें इसके लिए "आवश्यक क़ानून" चाहिए। क्योंकि कथित गायवादी पार्टी समेत देश की सभी राजनीतिक पार्टियाँ एवं उनके शीर्ष नेता आदि इन्हें लुप्त करने पर तुले हुए है।

हालात को और भी बदतर करने के लिए अदालते बहुराष्ट्रीय कम्पनियों से घूस खाकर जल्लिकट्टू जैसे खेलो पर रोक लगाती है, ताकि भारतीय नस्ल में सुधार लाने एवं उनका चयन करने की पद्धतियाँ गुम हो जाये। हालांकि हमारी ये प्रजातियां पूरी तरह से लुप्त भी नहीं होगी। क्योंकि संख्या घटने से देशी गाय का दूध बेहद महंगा हो जाएगा अत: इसका कारोबारी मूल्य बढ़ जाएगा। लेकिन सिर्फ अमीर एवं सम्पन्न लोग ही इसके दाम चुका सकेंगे। शेष आम जन देशी गाय के दूध आदि से वंचित हो जाएगा। असल में देशी गाय का दूध एवं मूत्र तब औषधि के रूप में बिकेगा और सेवन किया जाएगा।
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समाधान ?
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इस सम्बन्ध में वेल्थ टेक्स ग्रुप द्वारा सुझाए गए प्रस्ताव निम्नलिखित है :
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१) कृषि मंत्रालय को तीन हिस्सों में विभाजित किया जाए -- a) कृषि मंत्रालय , b) पशुपालन मंत्रालय , c) गाय मंत्रालय।

फिलहाल डेयरी उद्योग, पशुपालन, गाय आदि सभी मवेशी कृषि मंत्री के अधीन आते है। जो कि काफी बड़ा मंत्रालय है। अब से तीन मंत्री होंगे। कृषि मंत्री अलग होगा। पशुपालन मंत्री अलग से होगा। तथा गाय मंत्री अलग से होगा। जर्सी एवं अन्य सभी प्रकार के विदेशी नस्ल के गाय के सदृश नजर आने वाले जानवर मवेशी की श्रेणी में रखे जायेंगे। जबकि गाय मंत्रालय सिर्फ देशी गायों या भारतीय नस्ल की गायों का ही नियमन करेगा।
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२) डेयरी उद्योगों एवं दूध विक्रेताओ को अपने दूध के डिब्बे या बोतल पर स्पष्ट रूप से यह अंकित करना होगा कि इसमें जो दूध है वह देशी गाय का है या वर्ण संकर प्रजाति का। दूध विक्रेता अपनी गायों की नस्ल की शुद्धता के लिए विभाग से सर्टिफिकेट ले सकेंगे एवं छोटे पशुपालक अपनी गायों की नस्ल की शुद्धता का सेल्फ सर्टिफिकेट जारी कर सकेंगे। गाय मंत्री इन स्व घोषित सर्टिफिकेट को अनुमोदित करेगा।
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३) यदि कोई विक्रेता अपने दूध पर देशी गाय के दूध का चिन्ह अंकित करता है और उसमे 5% से अधिक मिलावट पायी जाती है तो उस पर आर्थिक दंड या लाइसेंस का रद्दीकरण किया जाएगा। सभी मामलो की सुनवाई नागरिको की ज्यूरी करेगी। दूध के अन्य उत्पादों जैसे पनीर, घी आदि पर भी यही नियम लागू होंगे।
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४) गाय मंत्री को नौकरी से निकालने का अधिकार मतदाताओ के पास होगा।
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५) गाय मंत्री नस्ल परिक्षण आदि के लिए लेब आदि की का आधारभूत ढांचा उपलब्ध करवाएगा एवं गौ शालाओं का नियमन करेगा।
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६) देशी गायों का पंचायत स्तर पर पंजीकरण किया जाएगा।
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७) गाय मंत्री देश में विभिन्न स्तरों पर इस तरह के वैज्ञानिक अनुसन्धान एवं शोध करवाएगा जिससे इन तथ्यों की वैज्ञानिक रूप से पुष्टि हो कि भारतीय गाय का दूध किस तरह से एवं किन मायनों में सेहत के लाभदायक है। वह देश में नागरिको में इन तथ्यों के बारे में जानकारी भी फैलाएगा।
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ये कुछ सुझाव मोटे तौर पर दिए गए है। अवकाश होने पर मैं इसका विस्तृत ड्राफ्ट प्रस्तुत करूँगा।
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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