Pawan Jury BhilwaraRj

श्री नरेंद्र मोदी साहेब ने जेटली को Gst का हिंदी अनुवाद जारी न करने के निर्देश क्यों दिए ?
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जीएसटी करो को लेकर देश में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव है। देश के सभी छोटे बड़े कारोबारी और समस्त नागरिक इससे प्रभावित होंगे। देश में पिछले 4 महीने से इस क़ानून पर बहस चल रही है और लोग इसके पेचीदगियों पर सिर खपा रहे है। देश के लगभग सभी छोटे-मझोले व्यापारियों का अंग्रेजी से कोई सरोकार नहीं है, वे सिर्फ हिंदी ही समझते है। देश के नागरिको का बहुमत भी हिन्दी भाषी है, और इनमे से ज्यादातर को अंग्रेजी समझ नहीं आती। और यह खुली हुयी बात है कि अंग्रेजी में उपलब्ध सामग्री को देश की जनसंख्या का 5-10% हिस्सा ही समझ पाता है।
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फिर क्या वजह है कि मोदी साहेब ने अरुण जेटली को आदेश दिया कि जीएसटी का हिन्दी अनुवाद जारी नहीं किया जाना चाहिए ?
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दरअसल हिन्दी ड्राफ्ट उपलब्ध होने से संभावनाएं बढ़ जाती कि ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ता/नागरिक/कारोबारी इसे पढ़ सके। ऐसा होने से इसके विभिन्न पहलुओं पर बहस आम जाती। तब नागरिक/व्यापारी/कार्यकर्ता जीएसटी के बारे में सूचनाओं के लिए पेड मीडिया/पेड अर्थशास्त्रियों/सीए आदि के भरोसे नहीं रहता। और ऐसा होने से जीएसटी से होने वाले नुकसान खुल कर सामने आ जाते। मोदी साहेब कतई नहीं चाहते थे कि ऐसा हो। इसीलिए उन्होंने यह क़ानून लागू होने के बावजूद अब तक इसका हिन्दी अनुवाद नहीं रखा है।
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अब हालात यह है कि, नागरिक/व्यापारी पेड मीडिया के भरोसे पर है। जो जानकारी पेड मीडिया छुपाना चाहता है वह छुपा रहा है। और जो दिखाना चाहता है वह दिखा रहा है। जब तक जीएसटी लोगो के समझ आएगा तब तक इसे लागू हुए साल निकल चुका होगा।
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संघ=बीजेपी उर्फ़ गंगाधर=शक्तिमान के सभी कार्यकर्ता भी मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन कर रहे है। जब संघ=बीजेपी उर्फ़ गंगाधर=शक्तिमान के कार्यकर्ताओ से हमने संपर्क करके हिन्दी अनुवाद उपलब्ध करवाने को कहा तो उन्होंने जवाब दिया --- "भारत माता की जय, हिन्दी-हिन्दू-हिंदुस्तान जिंदाबाद जिंदाबाद" !!! हमने उनसे कहा कि आप पीएम के ट्विटर हेंडल पर ट्वीट करके हिन्दी अनुवाद जारी करने के लिए कहे तो उन्होंने ऐसा कोई भी ट्वीट करने से साफ़ मना कर दिया। आप को विश्वास न हो तो आप खुद संघ=बीजेपी के कार्यकर्ताओ से पूछ सकते है। ये सभी लोग हिन्दी अनुवाद जारी न करने का समर्थन कर रहे है !!! क्यों कर रहे है ? ये आप उन्ही से पूछे।
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और मोदी साहेब गुजराती है और हिन्दी भाषी है। अंग्रेजी में उनका हाथ तंग है। ( मुतमईन होने के लिए आप 2008 में करण थापर को दिया गया उनका अधूरा इंटरव्यू देख सकते है। ) वे अपने गुजरात में अपने सभी भाषण गुजराती में और देश में सभी भासण हिन्दी में देते है। वे भासण हिन्दी और गुजराती में देते है क्योंकि वे चाहते है कि लोग उनका भासण सुने। इन्हे भाषणों से उन्हें वोट आते है। किन्तु देश पर जब वो क़ानून डालते है तो इसका हिन्दी-गुजराती अनुवाद देने से मना कर देते है !!! क्योंकि वे चाहते नहीं कि इस क़ानून को लोग पढ़े या समझे।
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यह किसी भी तरीके से लोकतांत्रिक नहीं है कि आप देश में उथल पुथल मचाने वाला क़ानून अंग्रेजी में रख कर देश की बहुसंख्य आबादी को इसे पढ़ने से वंचित कर दे। उल्लेखनीय है कि मोदी साहेब ने जुवेनाइल एक्ट एवं भूमि अधिग्रहण क़ानून का हिन्दी हिन्दी अनुवाद भी जारी करने से मना कर दिया था। अन्य विशिष्ट महानुभाओं की तरह क्या मोदी साहेब भी हिन्दी भाषियों को भेड़ बकरियाँ समझते है !!!

तेरी जुबान है झूठी जम्हूरियत की तरह
तू एक जलील सी गाली से बेहतरीन नहीं - ( दुष्यंत कुमार )
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पीएम को यह ट्विट भेजे -- " @pmoindia , please provide hindi translation of GST. #GstHindiTransaltion
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"