Pawan Jury BhilwaraRj
Paid NDTV - : प्रणय रॉय पर सीबीआई का छापा ।
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पैड एनडीटीवी समेत भारत के सभी मीडिया समूह बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिकों एवं मिशनरीज़ के नियंत्रण में है । और मोदी साहेब मिशनरीज़ के एजेंडे पर ही काम कर रहे है । तो फिर क्या वजह है कि एनडीटीवी मोदी सरकार की आलोचना करता है , और सरकारी तोता एनडीटीवी पर छापे डालता है ?
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यदि सभी मीडिया समूह सरकार की स्तुति करेंगे तो :
१. सरकार के आलोचक, विपक्ष आदि के समर्थकों के पास कोई ठिकाना नही रहेगा । तब वे ख़बरों की खोज करेंगे या सूचनाओं के नए विकल्प तलाश करेंगे । इससे नए और छोटे मीडिया समूहों को आगे आने का अवसर मिल जाएगा ।
२. यदि सभी मीडिया समूह एक तरफ़ा रिपोर्टिंग करेंगे तो आम नागरिकों एवं कार्यकर्ताओं के दिमाग़ में संदेह उत्पन्न होगा और वे पूरे मीडिया को सरकार का भोंपू मानने लगेंगे । इससे पैड मीडिया पर उनका विश्वास और भी कम हो जाएगा ।
वे हमेशा सुरक्षित खेलते है ताकि धारा विपरीत हो जाने पर भी खेल में बने रह सके । तो एनडीटीवी इस समय दूसरे ध्रुव को संतुलित करने का काम कर रहा है । १० मीडिया समूहों को उन्होंने मोदी साहेब के महिमा मंडन में लगा के रखा है ताकि मोदी साहेब का इक़बाल बना रहे , और एक-दो मीडिया समूहों को आलोचना के लिए रख छोड़ा है । आलोचना कम और वंदना ज़्यादा ।
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जब उन्हें मोदी साहेब को गिराना होगा तो वे स्थिति पलट देंगे । तब एक-दो मीडिया समूह मोदी साहेब की स्तुति करेंगे और शेष आलोचना करने लगेंगे ।
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पर क्या एनडीटीवी वास्तव में मोदी साहेब की आलोचना करता है ?
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नही !!! दरअसल एनडीटीवी उन ख़बरों को रिपोर्ट नही करता जिससे मोदी साहेब के वोट कटे । वास्तव में एनडीटीवी सरकार की आलोचना चिल्लर मुद्दों पर करता है और इस तरह से ख़बरों को पेश करता है जिससे मोदी साहेब के वोट बढ़ते है । यह "प्रति ध्रुवीकरण" है ।
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उदाहरण के लिए, जब औवेसी अपने प्रायोजकों के कहने पर लोकसभा चुनाव से एन पहले इस तरह का विडियो जारी करता है जिसमें वह यह कहता नज़र आए कि -- "लोग कह रहे है कि मोदी वजीरे आज़म बन जाएगा । देखते है कैसे बनता है !! काहे का मोदी, किधर का मोदी !!!"
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तो औवेसी, उनके प्रयोजक एवं मोदी साहेब आदि सभी जानते है कि जितने लोग यह विडियो देखते जाएँगे उतने ही मोदी साहेब के वोट जुड़ते जाएँगे ।
या जब मीडिया चेनल्स लोकसभा चुनाव से एन पहले बार बार वह फूटेज दिखाते है जिसमें मोदी साहेब स्टेज पर जालीदार टोपी पहनने से इनकार कर रहे है एवं एंकर यह कहते है कि -- देखो मोदी साहेब ने स्कल केप पहनने से मना कर दिया । कितना असहिष्णु है ये आदमी !! तो वे जानते है कि यह सीन देखकर लाखों कट्टर हिंदुवादी मतदाता मोदी साहेब की और दौड़ लगा देंगे ।
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इसी तरह से जब पैड राजदीप सरदेसाई या पैड बरखा दत्त या पैड रविश कुमार जब यह बोलते है कि, मोदी साहेब हिंदुवादी एजेंडे पर कार्य कर रहे है ( जो कि एक सफ़ेद झूठ है ) तो उखड़ने को आमादा कई हिंदुवादी वोट फिर से मोदी साहेब से चिपक जाते है । इस तरह पैड एनडीटीवी मोदी साहेब की सरस आलोचना करके नागरिकों से वास्तविक सूचनाएँ छिपाता है और झूठी नकारात्मक धारणा बनाकर उनके वोट बढ़ाता है ।
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और जहाँ तक सीबीआई कार्यवाही का सवाल है -- यह एक स्टंट है । जो इस धारणा को मज़बूत बनाता है कि, एनडीटीवी सरकार का आलोचक है ।
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तो एबीपी, जी, आज तक, इंडिया टीवी से लेकर एनडीटीवी तक सभी एक ही थाली से चाटते और बाँटते है । जिसे जिस तरह से प्रॉपगैंडा खड़ा करने का पैसा मिलता है वह उस तरीक़े से यह काम करता है । इसीलिए सोनिया-केजरीवाल के अन्ध्भगतो को अपने ज़ेहन से यह बात निकाल देनी चाहिए एनडीटीवी वास्तविक रूप से मोदी साहेब का आलोचक है । और मोदी साहेब के अंध भगतो को भी यह बात समझनी चाहिए कि जी न्यूज़ और एनडीटीवी एक ही सिक्के के दो पहलू है ।
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बड़ी बारीक है वाइज़ की चालें
लरज़ जाता है आवाजे अजाँ से - इक़बाल
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समाधान ?
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मेरी फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल के कवर पेज को क्लिक करके डिस्क्रिप्शन में दर्ज प्रस्तावित कानूनो की सूची देखें । इसमें राईट टू रिकॉल दूरदर्शन का ड्राफ़्ट दिया गया है । इस क़ानून के आने से भारतीय मीडिया मिशनरीज़ के नियंत्रण से बाहर निकल कर आम नागरिकों के हाथ में आ जाएगा और निष्पक्ष मीडिया की स्थापना होगी ।
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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