Pawan Jury BhilwaraRj

१. रामू की "सत्या" में कुछ गालियाँ है। टेलीविजन प्रिंट में इन गालियों को सेंसर किया गया था अत: सत्या में इन गालियों की ध्वनि सुनाई नहीं देती थी। गालियों को म्यूट किया हुआ था। सत्या का प्रसारण पिछले 10 साल से टीवी पर हो रहा है। इसके टेलीविजन प्रिंट में गालियां सेंसर्ड थी। किन्तु परसों फिर से टीवी पर जब सत्या देखी तो मालूम हुआ कि इसके टेलीविजन प्रिंट को फिर से सम्पादित करके गालियां जोड़ दी गयी है !! कई अन्य हिन्दी फिल्मो के टेलीविजन प्रिंट को भी पुनर्संपादित करके उनमे अश्लील एवं उत्तेजक दृश्य जोड़ दिए गए है। इसके पुराने वर्जन में ये दृशय नहीं थे।
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२. हॉलीवुड की जिन फिल्मो को हिन्दी में डब करके हिन्दी चेनल्स पर प्रसारित किया जाता है उनमें से उत्तेजक एवं अश्लील दृश्यों को सेंसर कर दिया जाता है। हालांकि अंग्रेजी चेनल्स पर ये दृश्य नहीं हटाए जाते। किन्तु अब अंग्रेजी की हिन्दी डब फिल्मो को भी बिना सेंसर किये हिन्दी चेनल्स पर प्रसारित किया जा रहा है। फिल्म "2012" के टेलीविजन प्रिंट में जिस अश्लील दृश्य को सेंसर किया गया था उसे नए सम्पादित वर्जन में जोड़ दिया गया है।
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३. कॉन्डोम के विज्ञापन पहले रात 11 बजे बाद ही प्रसारित होते थे। किन्तु पिछले साल भर से इन विज्ञापनों को प्राइम टाइम ( 8 से 10 बजे के बीच ) पर दिखाया जा रहा है। और ये विज्ञापन सूचनार्थ नहीं है। क्योंकि इन विज्ञापनों की विषय वस्तु काफी उत्तेजक और अश्लील है।
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( मैं टीवी पर सिर्फ मूवी चेनल्स ही देखता हूँ। अत: न्यूज चेनल्स और धारावारिक चेनल्स की विषय वस्तु में अश्लीलता और अपसंस्कृति के स्तर पर क्या बदलाव आये है मुझे ठीक से जानकारी नहीं )
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इस नग्नता/अश्लीलता/फूहड़ता को रोकना मोदी- मनमोहन-सोनिया-केजरीवाल की हैसियत से बाहर है। बल्कि ये लोग इसे बढ़ावा ही दे रहे है।
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यह अश्लीलता क्यों और कैसे बढ़ रही है और टीवी एवं फिल्मो में बढ़ती इस अश्लीलता को कैसे रोका जा सकता है, इसका विवरण इस लिंक पर देखें -- https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/815779048540333
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