Pawan Jury BhilwaraRj
क्या भारत के राजा एवं योद्धा मध्यकाल में या उससे पहले या मध्यकाल के बाद लकड़ी के भालो का प्रयोग कर रहे थे ? यदि नहीं कर रहे थे तो इसका कारण क्या था ?
.
मुझे जानकारी नहीं है। यदि किसी के पास सटीक जानकारी हो तो कमेंट बॉक्स में बताएं।
.
जहां तक मुझे जानकारी है राजस्थान में लकड़ी के भालो का प्रयोग मध्य काल एवं उसके बाद भी नहीं किया जा रहा था। लोहे के भाले ही प्रयोग में लाये जाते थे। महाराणा प्रताप ( 16 वीं शताब्दी ) भी लोहे के काफी भारी भाले का प्रयोग करते थे। दक्षिण के राज्यों का हाल मुझे ज्ञात नहीं।
.
लकड़ी के भाले से आशय ऐसे भाले से है जिसका फल ( नोंक का लगभग 1 फुट हिस्सा ) लोहे का एवं शेष भाला लकड़ी का होता था। इससे वह ढोने और चलाने में हल्का हो जाता था किन्तु उसकी मारक क्षमता पर कोई फर्क नहीं आता था। जबकि लोहे का भाला वह है जो पूरी तरह से लोहे या भारी धातु का बना हो।
.
सिकंदर ने जब भारत पर हमला किया तब उनके पास 18 फुट लम्बे भाले थे जबकि इस घटना के 1700 साल बाद भी हम अधिकतम 7 फुट लम्बे भालो का प्रयोग कर रहे थे। ग्रीस ने ऐसी धातु का अविष्कार कर लिया था जो हल्की होने के साथ साथ मजबूत भी थी। अत: वे इतना लम्बा भाला बना पाए। हम ऐसी धातु का आविष्कार करने में विफल रहे अत: अतिरिक्त लम्बाई बढ़ाने से भाले में नम्यता ( झुकाव ) आ जाती थी। किन्तु लकड़ी का प्रयोग न करना समझ से परे है।
.
लकड़ी के भाले धातु के भालो से ज्यादा बेहतर थे। पर फिर भी हम उनका प्रयोग क्यो नहीं कर रहे थे ?
.
======