Pawan Jury BhilwaraRj

केंद्र सरकार ने राम मंदिर मामले की सुनवाई रोजाना करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देने से इंकार कर दिया है !!

बीजेपी रुख है कि --- "राम मंदिर का मामला अदालत में है, अत: हमें इन्तजार करना चाहिए। यदि अदालत का फैसला मंदिर के खिलाफ आता है तो हम क़ानून बनाने की प्रक्रिया पर विचार करेंगे"। ( हालांकि बीजेपी ने यह रुख सत्ता में आने के बाद लिया है। वर्ना पिछले 25 साल से बीजेपी के नेता यही पुकारा लगा रहे थे कि हम सत्ता में आये तो मंदिर बना देंगे !! )
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यह मामला अदालत में 1949 से है। और कितने वर्षो तक बना रहेगा पता नहीं। सुप्रीम कोर्ट इसे अभी और 50 साल तक खींच सकती है। लेकिन यदि बीजेपी चाहे तो सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की सुनवाई रोजाना करने का आग्रह कर सकती है। इससे फैसला हफ्ते दो हफ्ते में आ जाएगा।
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लेकिन बीजेपी की केंद्र सरकार ने ऐसा कोई भी आग्रह करने से मना कर दिया है। यदि बीजेपी सुप्रीम कोर्ट से ऐसा आग्रह करती है और कोर्ट मना कर देती है तब सरकार अन्य विकल्पों पर विचार कर सकती है जिससे मंदिर निर्माण मामले में तेजी आये।
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यदि आप चाहते है कि सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की रोजाना सुनवाई हो और गाड़ी आगे बढे तो @pmoindia पर यह ट्विट भेजे -- @pmoindia , please ask apex court to daily hearing for ram mandir temple case. #DailyHearingRamMandirCase .
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इस सम्बन्ध में जब हमने बीजेपी एवं संघ के कार्यकर्ताओ से आग्रह किया कि वे भी इस तरह का ट्वीट भेजे तो उन्होंने कहा कि हमें ऊपर से इस तरह के निर्देश मिले हुए है कि , "हम सरकार पर राम मंदिर मुद्दे को जल्दी निपटाने के लिए कोई दबाव न बनाए। उन्होंने बताया कि, यह मामला इस समय एकदम सही जगह पर अटका हुआ है। फैसला आने से सरकार पर क़ानून द्वारा मंदिर निर्माण का दबाव बन जाएगा। और मंदिर बने या न बने मंदिर के नाम के जितने वोट है वो तो हमें वैसे ही मिल रहे है। तो फिजूल की कसरत से क्या लाभ है।" इसीलिए हम इस तरह के ट्वीट भेजने का समर्थन नहीं करते।
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यदि आप चाहते है कि राम मंदिर मामले की सुनवाई रोजाना हो ताकि जल्द फैसला आये तो @pmoindia पर ऊपर दिया गया ट्वीट भेजे।
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