Pawan Jury BhilwaraRj
मोदी साहेब ने गोद लेने की प्रक्रिया में जो संशोधन करने का आदेश दिया है उससे गोद लेने वाले "सम्पन्न दंपत्ति" को घूस में मोटी राशि चुकानी होगी !!!
.
http://indianexpress.com/article/india/no-pick-and-choose-for-couples-opting-for-adoption-4634246/
.
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने अनाथ बच्चो को गोद लेने के नियमो में परिवर्तन किया है। पहले दंपत्ति को गोद लेने वाले बच्चों के रूप में तीन विकल्प दिए जाते थे, किन्तु अब इसे बदल कर सिर्फ एक कर दिया गया है। मतलब अभिभावक जिस बच्चे को गोद लेना चाहते है उसे चुन नहीं सकेंगे। उन्हें जिस बच्चे का विकल्प दिया जाएगा उन्हें वही बच्चा गोद लेना होगा। और इसके लिए उन्हें सहमति अगले 48 घंटो में देनी होगी।
.
भारत में निम्न एवं मध्य वर्ग में अनाथ बच्चो को गोद लेने की दर काफी कम है। क्योंकि इस तबके में विवाह एवं जन्म दर संतुलित होने के कारण अव्वल तो गोद लेने की नौबत नहीं आती और जब आती है तो वे अपने परिवार या नजदीकी रिश्तेदारों में से ही किसी संबधी के बच्चे को गोद ले लेते है। अत: उन्हें किसी बच्चे को गोद लेने के लिए अनाथालय नहीं जाना पड़ता। किन्तु उच्च मध्य वर्ग एवं उच्च वर्ग में विवाह व संतान दर निम्न होने के कारण उन्हें ज्यादातर अनाथालयो से बच्चो को गोद लेना होता है। इसी श्रेणी में वे विदेशी भी आते है जो भारतीय बच्चो को गोद लेते है।
.
तो यदि अब से किसी दंपत्ति के पास यह विकल्प नहीं रहेगा कि वे बच्चे को चुन सके। मंत्रालय उन्हें इसके लिए जो विकल्प देगा उन्हें उस बच्चे को ही गोद लेना होगा। कहने की जरूरत नहीं है कि, यदि आप एक "संपन्न दंपत्ति" है तथा स्वस्थ एवं आदर्श बच्चे को गोद लेना चाहते है तो आपको मंत्री जो को ऊँचे दाम चुकाने होंगे। यदि आप घूस देंगे तो मंत्री जी अमुक बच्चे का विकल्प आपको उपलब्ध करवा देंगे वरना अमुक बच्चा उस दंपत्ति को दे दिया जाएगा जिसने मंत्री जो को मोटा पैसा दिया है।
.
उल्लेखनीय है कि, गोद लेने के दौरान दंपत्ति रंग, कद, स्वास्थ्य, समझ आदि के आधार पर बेहतर बच्चे की तलाश करते है। और यह पूरी तरह से वाजिब भी है। अनाथालय में मंदबुद्धि से लेकर दिव्यांग व विभिन्न मापदंडो पर अपेक्षाकृत कमतर गुणों वाले बच्चे भी होते है। सभी दंपत्ति चाहते है कि उन्हें बेहतर विकल्प मिले। इस तरह से मंत्री जी अब बेहतर गुणों वाले बच्चों की स्क्रूटिनी करके उनकी अनौपचारिक बोली लगवा सकेंगे ताकि गोद लेने के धनी प्रत्याशियों से पैसा खींचा जा सके।
.
हालांकि यह एक ऐसा विषय है जिससे बहुत ही कम लोगो को लेना देना होता है। किन्तु यह विवरण यह दर्शाता है कि सरकारें किस तरह जनता से पैसा उगाहने के रास्ते निकालती है। वे ऐसा हमेशा ही कानूनों के द्वारा करते है। वे अपने भाषणों में यह कभी नहीं कहेंगे कि हमें भ्रष्टाचार करना है, वे ऐसा करने के लिए क़ानून का इस्तेमाल करते है। वे पहले ऐसे क़ानून बनायेगे जिससे आम नागरिक को सामान्य अवसर मिलने का मौका ख़त्म हो जाए और जिसे बढ़त देनी हो उससे घूस लेकर उसे लाभ पहुचाया जा सके। इस तरह वे आपसे घूस वसूलेंगे और फिर वे ही यह कहेंगे कि जनता भ्रष्ट है !!! यह क़ानून मोदी साहेब के दिमाग की उर्वरा शक्ति को दिखाता है कि वे किस तरह से गोद लेने की प्रकिया में घूस वसूलने के अवसर पैदा कर सकते है।
.
सबक यह है कि - हमें नेताओं के भाषण सुनने ही नहीं चाहिए। भाषण में सभी नेता अच्छा अच्छा ही बोलते है। किन्तु अच्छे भाषण से देश को अच्छा नहीं बनाया जा सकता। हमें यह देखना चाहिए कि अमुक नेता पद पर रहते हुए किन कानूनों को देश में लागू कर रहा है। यदि देश में क़ानून अच्छे लागू होंगे तो ही व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
===========