Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
Pawan Jury BhilwaraRj:
प्रश्न - आप तीन तलाक पर चुप क्यों है, इस विषय पर क्यों नहीं बोलते ?
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उत्तर - तीन तलाक का मुद्दा न तो राष्ट्र हित से जुड़ा हुआ है और न ही यह मेरे धर्म से सम्बंधित है। यह इस्लाम एवं उसका पालन करने वाले धर्मावलम्बियों से जुड़ा हुआ मसला है। मैं किसी अन्य धर्म के मामलात में तब तक दखल नहीं देता जब तक कि अमुक मसला देश या मेरे धर्म को हानि न पहुंचाए।
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तीन तलाक की प्रथा का विभिन्न क्षेत्रो पर पड़ने वाला असर :
(1) देश पर - तीन तलाक की प्रथा का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव यह है कि इससे मुस्लिम समुदाय में जन्म दर बढ़ जाती है। मुस्लिम पुरुष निकाह शुदा महिला से संतानोत्पत्ति करते है और तलाक तलाक तलाक बोल कर बिना कोई जिम्मेदारी वहन किये उसे छोड़ कर अन्य महिला से निकाह कर लेते है। इस तरह दूसरी एवं तीसरी महिला के साथ निकाह करके भी वे संतानोत्पत्ति करते है। इस वजह से मुस्लिम समुदाय में जन्म दर ऊँची है और भारत में धार्मिक जनसँख्या का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है।
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यदि आप तीन तलाक की प्रथा बंद कर देंगे तो तलाक की दर गिरेगी, एवं इस वजह से मुस्लिम समुदाय में जन्म दर में भी फौरी तौर पर गिरावट आएगी। किन्तु इससे अधिक लाभ नहीं होगा। क्योंकि मुस्लिम समुदाय में एक निकाह होने से भी जन्म दर अन्य धर्मो के तुलना में ऊँची ही है, और यह ऊँची बनी रहेगी। अत: बिगड़ते हुए जनसँख्या अंसतुलन का समाधान ट्रिपल तलाक को ख़त्म करने से नहीं किया जा सकता।
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इस समस्या का समाधान यह है कि देश में "टू चाइल्ड पॉलिसी" क़ानून को लागू कर दिया जाए। हमने टू चाइल्ड पॉलिसी का जो ड्राफ्ट दिया है उसमे व्यक्ति की सन्तानो की गणना में उसके जैविक संतान होने को आधार बनाया गया है। इस तरह से कोई व्यक्ति एक निकाह करे या 25 निकाह करे, उसे संतानोतपत्ति की छूट सिर्फ दो बच्चो ( दोनों पुत्र या एक पुत्र होने की स्थिति में। सभी पुत्रियां होने पर यह सीमा 4 तक ही रहेगी ) तक ही सीमित रहेगी। इस तरह से यह क़ानून जनसख्याँ के बिगड़ते धार्मिक संतुलन को भी ठीक करेगा और ट्रिपल तलाक में भी भारी कमी लाएगा। क्योंकि यदि कोई पुरुष निकाह करता है और दोनों के 2 संतान है तो वह तलाक देकर यदि दूसरा निकाह करता है तो भी वह नयी स्त्री से संतान पैदा नहीं कर सकेगा। अत: या तो वह तलाक नहीं देगा या फिर उसे संतान को पालने की जिम्मेदारी उठानी होगी।
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(2) लव जिहाद पर - इससे लव जिहाद को बढ़ावा मिलता है, क्योंकि नाबालिग ( 16 से अधिक एवं 18 की उम्र से कम आयु के ) मुस्लिम युवक हिन्दू युवती से शादी कर लेता है और तलाक तलाक तलाक बोल कर अपनी राह लेता है। मौजूदा जुवेनाइल एक्ट के तहत जुवेनाइल बोर्ड यह तय करता है कि उसे बालिग़ माना जाए या नाबालिग। बोर्ड के सदस्य घूस खाकर उसे नाबालिग मान लेते है। अत: अमुक युवक मुक्त हो जाता है। निर्भया का मुख्य आरोपी इसी क़ानून के चलते रिहा हुआ था।
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समाधान - हमने जुवेनाइल एक्ट में जो संशोधन प्रस्तावित किया है उसमे नाबालिग या बालिग़ होने का फैसला नागरिको की ज्यूरी करेगी। इस क़ानून के आने से लव जिहाद के लिए उकसाने वाले मौलवी ( सभी मौलवी नहीं। जिन्हे सऊदी अरब से इसके लिए पैसा आता है और वे इसे बढ़ावा देते है, वे ) के लिए युवको को कन्विंस करना मुश्किल हो जाएगा कि, "तुम्हे कुछ नहीं होगा, हम सब संभाल लेंगे" !! इस तरह नाबालिगों द्वारा किये जा रहे लव जिहाद में जोखिम बढ़ जाएगा और लव जिहाद में कमी आएगी।
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(3) गैर मुस्लिम महिलाओ एवं मुस्लिम महिलाओ पर : यदि कोई बालिग़ गैर मुस्लिम महिला या मुस्लिम महिला किसी बालिग मुस्लिम पुरुष से निकाह करती है तो पुरुष किसी भी समय ट्रिपल तलाक का इस्तेमाल करके बिना किसी जोखिम के उसे छोड़ सकता है।
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समाधान -
a) मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार मुस्लिम निकाह एक "करार" है। यह संस्कार नहीं है। अतः निकाह के दौरान एक निकाहनामा लिखा जाता है। इस निकाहनामे में लड़की वालो की तरफ से यह शर्त लिखी जा सकती है कि तलाक तलाक तलाक की रस्म लागू नहीं होगी तथा तलाक का फैसला न्यायलय में होगा। ऐसा लिख दिए जाने के बाद तलाक तलाक तलाक कहने से तलाक नहीं होगा। इसी निकाहनामे में तलाक के लिए मुआवजे की राशि भी तय की जा सकती है। यह निकाह नामा पूरी तरह से कानूनी होता है।
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b) यदि लड़की वाले चाहे तो आपसी निकाह के साथ साथ कोर्ट में भी शादी कर सकते है। कोर्ट में शादी होने से यह शादी "स्पेशल मैरिज एक्ट" के तहत दर्ज हो जाती है। और ऐसा होने से तलाक तलाक तलाक बोलने से तलाक नहीं होगा बल्कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत ही डिवोर्स हो सकेगा। और स्पेशल मैरिज एक्ट हिन्दू लॉ की कार्बन कॉपी है।
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तो यदि लड़की वाले इन दोनों में से कोई भी शर्त रखकर निकाह कर सकते है। यदि लड़के वाले इनकार करे तो लड़की वाला पक्ष निकाह से इनकार कर दे।
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(4) मुस्लिम समुदाय पर - ट्रिपल तलाक के कारण मुस्लिम समाज में परिवार नामक संस्था मजबूत नहीं हो पायी है। इस तरह के तलाक से तलाकशुदा महिला पर बच्चो एवं खुद को पालने की जिम्मेदारी आ जाती है। इससे बच्चो का पालन पोषण सही नहीं हो पाता और वे छोटी उम्र में ही शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतों से वंचित हो जाते है और उन्हें रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ता है। एक वजह यह भी है कि मुस्लिम समुदाय में शिक्षा दर बेहद कम है एवं यह समुदाय पिछड़ी हुयी अवस्था में है। इस तरह का वातावरण बच्चो को अपराध की तरफ भी ठेलता है। परिवार नामक इकाई मजबूती से विकसित न होने के कारण मुस्लिम महिलाओ की दशा गिरी हुयी है और इसका प्रभाव बच्चो पर आ जाता है। इसके उलट हिन्दू धर्म में विवाह एक संस्कार होने और परिवार नामक इकाई मजबूत होने से बच्चो का पालन पोषण ज्यादा बेहतर तरीके से हो पाता है।
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समाधान !!!
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ट्रिपल तलाक का क़ानून खत्म होने से मुस्लिम समाज में परिवार नामक संस्था मजबूत होगी, महिलाओ की दशा सुधरेगी, मुस्लिम समुदाय में शिक्षा एवं स्वास्थ्य का स्तर सुधरेगा और मुस्लिम समाज ज्यादा बेहतर एवं मजबूत बनेगा। इस तरह से यह एक शुद्ध धार्मिक सुधार है। पर मैं तो मुस्लिम नहीं हूँ !!! मैं तो हिन्दू हूँ। तो मुझे क्यों किसी अन्य धर्म में सुधार करने एक लिए मुहीम चलानी चाहिए ? और खासकर तब जबकि मुस्लिम समाज का एक बड़ा तबका इन सुधारो को लागू नहीं करना चाहता !! दूसरी तरफ हिन्दू धर्म के मंदिरो का प्रशासन बिगड़ा हुआ है और यह लगातार कमजोर होता जा रहा है, तो मैं मेरे धर्म को मजबूत करने के लिए आवश्यक क़ानून को लागू करने की मुहीम चलाने को तरजीह देता है। और मैंने इसके लिए वे कानूनी ड्राफ्ट भी प्रस्तावित किये है जिनके लागू होने से हिन्दू धर्म मजबूत होकर उभरेगा और भारत में इस्लाम में बढ़ते "गैर वाजिब" प्रभाव में कमी आएगी।
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मोदी साहेब को मुस्लिम धर्म में सुधार लाने में इसीलिए रुचि है क्योंकि वे अब एक धर्म निरपेक्ष देश के मुख्य नीति नियंता है। अत: उन्हें सभी धर्मो एवं तबको के नागरिको के स्तर में सुधार लाने की फ़िक्र करनी होती है। और यह पूरी तरह से जायज भी है। लेकिन मैं तो ऐसे किसी संवैधानिक पद पर नहीं बैठा हूँ कि मैं मेरे धर्म को साइड में रखकर किसी अन्य धर्म को मजबूत बनाने में अपनी शक्ति जाया करूँ। तो मेरा रूख है कि ट्रिपल तलाक से देश को होने वाले नुक्सान के लिए मैंने जो क़ानून ऊपर प्रस्तावित किये है वे इस समस्या का समाधान कर देंगे। मुस्लिम समाज और उनके धार्मिक कायदो में तब टांग लगाने की कोई तुक नहीं, जब तक उससे देश या मेरे धर्म को कोई हानि न हो।
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बहरहाल, ट्रिपल तलाक पर मेरा रूख यह है कि यह प्रथा खत्म होनी चाहिए। मैं इस प्रथा को खत्म किये जाने का समर्थन करता हूँ। अत: मैंने प्रधानमंत्री के ट्विटर हेंडल पर ट्रिपल तलाक को ख़त्म करने के लिए ट्वीट भेज दिया है। किन्तु इस बारे में मुहीम चलाने की जिम्मेदारी मेरी नहीं है। मुस्लिम कार्यकर्ताओ को इस हेतु मुहीम चलानी चाहिए। मुझे मेरे धर्म में सुधार लाने के लिए मुहीम चलानी है, क्योंकि हिन्दू धर्म को मजबूत बनाने के लिए जिन कानूनों की आवश्यकता है उन्हें लागू करवाने की मुहीम चलाने की उम्मीद मुस्लिम समुदाय से करना उनके साथ ज्यादती होगी।
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मोदी साहेब ने देश में "टू चाइल्ड पॉलिसी" लागू करने से मना कर दिया है। मोदी साहेब ने हिन्दू धर्म के प्रशासन को सुगठित करने और मंदिरो के प्रबंधन में सुधार लाने के लिए आवश्यक "राष्टीय हिन्दू देवालय ट्रस्ट" के क़ानून को लागू करने से भी इंकार कर दिया है। उन्होंने आरोपी के जुवेनाइल का निर्धारण करने का अधिकार नागरिको की ज्यूरी को देने से भी साफ़ मना कर दिया। मोदी साहेब ने अयोध्या में राम, मथुरा में कृष्ण एवं काशी में विश्वनाथ देवालय निर्माण के लिए देश में जनमत संग्रह करवाने से भी इंकार कर दिया है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी हिन्दू धर्म से जुड़े इन विषयो पर मोदी साहेब के साथ खड़ी है, और वे भी इन सभी कानूनों का विरोध कर रहे है। संघ भी इन कानूनों का विरोध कर रहा है।
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यदि आपको हिन्दू धर्म के प्रशासन में सुधारने, राम-कृष्ण-विश्वनाथ देवालय के निर्माण में एवं देश में जनसँख्या के निरंतर बिगड़ते धार्मिक असंतुलन को सुधारने में रुचि है तो निचे दिए गए कानूनों का समर्थन करे तथा @pmoindia पर ट्वीट भेजे कि इन कानूनों को गैजेट में प्रकाशित किया जाए।
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टू चाइल्ड पॉलिसी के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1153403921444509
राष्ट्रीय हिन्दू देवालय प्रबंधक ट्रस्ट के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/570764579768407
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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