Pawan Jury BhilwaraRj

मायावती जी के कोई परिवार, बच्चे आदि नहीं है, अत: यह बात 100% तय है कि वह भ्रष्ट नहीं है।
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ममता बेगम के कोई परिवार/बच्चे वगेरह नहीं है। इसीलिए यह 100% तय है कि वह भ्रष्ट नहीं है। ।
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जयललिता अविवाहित थी। उनके परिवार बच्चे वगेरह नहीं थे। यह 100% तय है कि वह भ्रष्ट नहीं थी ।
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जहाँ तक सोनिया जी की बात है, उनके दोनों बच्चे सेटल्ड है और उन्हें अपने बच्चो की देखभाल के लिए रुपया नहीं चाहिए। सोनिया जी भी भ्रष्ट नहीं है।
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मनमोहन सिंह जी को $5000 से $10000 तक की पेंशन आई एम् ऍफ़ से और 1 लाख महिना की पेंशन भारत सरकार से आती है। वे पूर्व प्रधानमंत्री है, अत: उन्हें सारी सुविधाएँ भी सरकार की तरफ से मिलती है। उनकी तीनो बेटियां अमेरिकी नागरिक है और लाखों डॉलर सालाना कमाती है। अत: मनमोहन सिंह जी को भी रूपयों की जरूरत नहीं है, अत: वे भी भ्रष्ट नहीं थे !!!
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सोचने वाली बात यह है कि --- संघ की शाखाओं में स्वयंसेवकों को ऐसा कौनसा टॉनिक दिया जाता है जिसकी वजह से उनकी कल्पना शक्ति इतनी उर्वर हो गयी है कि वे बेहद विश्वसनीय तरीके से यह तर्क प्रस्तुत करते है कि, "मोदी साहेब के कोई परिवार, बच्चे वगेरह नहीं है। अत: यह अपने आप में सबसे बड़ा सबूत है कि मोदी साहेब 100% ईमानदार व्यक्ति है ?
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मायावती, ममता, जयललिता की ही तरह मोदी साहेब को भी 'पेड अर्नब पेड गोस्वामी' की तरह हजारो मीडियाकर्मियों को पालने की जरुरत है। और मोदी साहेब के प्रायोजको को पेड राजदीप सरदेसाई जैसे लोगो को भी टुकड़े डालने पड़ते है ( पेड सरदेसाई मोदी साहेब को एंटी मुस्लिम पुकारता है ताकि मोदी साहेब का हिन्दू वोट बैंक मजबूत हो )। मायावती, जयललिता एवं ममता बेगम की तरह ही मोदी साहेब को भी संघ ( संघ = संघ + बीजेपी यानी, गंगाधर = गंगाधर + शक्तिमान ) के अपने कार्यकर्ताओ को पालने के लिए रुपया खर्च करना पड़ता है। इनमे से कई मुफ्त में काम करते है किन्तु कईयों को पैसा भी देना होता है। मोदी साहेब का वेतन इन सब जरूरतों की पूर्ती करने के लिए पूरा नहीं पड़ता।
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तो सिर्फ वही व्यक्ति यह तर्क दे सकते है जो नियमित रूप से अफीम का सेवन करते है कि -- यदि किसी महिला/पुरुष ने शादी नहीं की है और उसके कोई परिवार नहीं है तो यह अपने आप में उसकी ईमानदारी की जमानत है। जबकि सच्चाई यह है कि ऐसे पदों पर पहुंचने और उन पर बने रहने के लिए ऐसे कई खर्चे करने पड़ते है जिन्हें वेतन से पूरा नहीं किया जा सकता।
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( शायद यह टॉनिक ही वह मुख्य वजह है कि संघ के स्वंयसेवक गाहे बगाहे नागरिको को संघ को समझने के लिए उनसे "शाखा में आने" का आग्रह करते नजर आते है। क्योंकि वे जानते है कि बिना टॉनिक गटके इतनी सुपीरियर थ्योरी को पचा पाना आम इंसान के लिए मुश्किल है। )
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दरअसल कोई व्यक्ति भ्रष्ट है या नहीं, यह बात की पुष्टि इससे नहीं की जा सकती कि उसके कोई संतान वगेरह है या नहीं। बल्कि इससे की जाती है कि पद पर रहते हुए वह किन क़ानून को लागू कर रहा है और किन कानूनों को लागू करने से इनकार कर रहा है।
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उदाहरण के लिए हाल ही में मोदी साहेब के आदेश पर गुजरात सरकार के विधायको ने एक क़ानून लागू किया है। यह क़ानून कहता है कि --- गुजरात के निजी स्कूल किसी छात्र से अधिकतम 28,000 रूपये शिक्षा शुल्क के रूप में ले सकता है, किन्तु यदि वे छात्रों से 28,000 रूपये सालाना से ज्यादा वसूलना चाहते है तो उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्त कमिटी से अनुमति लेनी होगी !!!
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तो मोदी साहेब द्वारा लागू किया गया यह क़ानून असल में क्या कहता है ? यह क़ानून कहता है कि, यदि कोई निजी स्कूल छात्रों से फ़ीस के रूप में 28,000 से ज्यादा फ़ीस वसूलना चाहता है तो उन्हें मुख्यमंत्री के चमचो की कमिटी से अनुमति लेने के एवज में उन्हें भारी मात्रा में घूस देनी होगी। तो होगा यह कि यदि कोई स्कूल फ़ीस में बढ़ोतरी करके उसे 38,000 करना चाहता है तो मुख्यमंत्री के चमचे स्कूल संचालक से कहेंगे कि हम आपको फ़ीस बढाकर 45,000 करने की अनुमति दे देते है, बदले में 7000 रूपये ( 45,000 - 7000 = 38,000 ) प्रति छात्र आप हमें पकड़ा दीजिये। यदि किसी स्कूल में 1000 छात्र है तो यह राशि 70 लाख सालाना बैठती है !! कुल मिलाकर मोदी साहेब ने इस क़ानून को सिर्फ इसीलिए लागू किया है ताकि निजी स्कूल के संचालको से घूस इकट्ठी की जा सके। अन्य कोई वजह होने का कोई सवाल ही नहीं है। ये कानूनी हफ्ता है, जो अभिभावक स्कूलों के माध्यम से अब मोदी साहेब को चुकायेंगे।
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क्या यह क़ानून स्कूलों की फ़ीस और उनकी गुणवत्ता को सुधारने के लिए लागू किया गया है ? अच्छा !! तो जब मोदी साहेब 13 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो राज्य के सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने से उन्हें किसने रोक के रखा था ? बीजेपी के कितने विधायको एवं सांसदों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे है ? शून्य, जीरो, अंडा !!! मोदी साहेब का १३ साला शासन इस बात की जीती जागती मिसाल है कि सरकारी स्कूलों और यहां तक कि निजी स्कूलों को सुधारने की भी उनकी कोई मंशा नहीं है। और अचानक पिंक रिवोल्यूशन की तरह ही मोदी साहेब का दिल गुजरात की स्कूलों की दयनीय हालत पर रोने लगता है और वे स्कूल फ़ीस को प्रबंधित करने के लिए इस प्रकार का क़ानून लेकर आते है।
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( उल्लेखनीय है कि, 2002 में गुजरात में मांस का उत्पादन 9 लाख मीट्रिक टन था जो कि मोदी साहेब के रहते 2012 में 21 लाख मीट्रिक टन हो गया था !! पर लोकसभा प्रचार के दौरान में साक्षत्कार के दौरान रुआंसे होकर कह रहे थे कि पिंक रिवोल्यूशन के कारण मेरा दिल रोता है। और हम यह बात नहीं कर रहे है कि एंकर को पहले से ही यह सवाल नहीं पूछने के एवज में पैसा दे दिया गया था कि यह सवाल नहीं पूछे कि जब आपका दिल इस पर रोता है तो गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मांस का उत्पादन डबल कैसे हो गया ? )
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और मोदी साहेब ने कानून बनाते समय यह भी ध्यान रखा है कि अभिभावकों को राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं नहीं दी जानी चाहिए। इस वजह से यह खतरा मिट गया है कि, यदि अभिभावक यह पाते है कि कमिटी मेंबर घूस खाकर फ़ीस में बढ़ोतरी कर रहे है तो वे कमिटी के चैयरमेन या किसी सदस्य को नौकरी से निकाल सके !!! तो मोदी साहेब एक तरफ तो स्कूल फ़ीस को प्रबंधित करना चाहते है तथा ठीक उसी यह भी सुनिश्चित करते है कि जिन अभिभावकों की जेब से यह पैसा वसूला जाएगा उन्हें कमिटी मेंबर या कमिटी चेयरमेन को बदलने का अधिकार न मिले। इसमें जोखिम यह है कि यह अधिकार अभिभावकों के देने से ये कमिटी मेंबर अपनी नौकरी बचाने के लिए मोदी साहेब की चमचई करने की जगह अभिभावकों की चमचागिरी करने लगेंगे।
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कुल मिलाकर, कांग्रेस/आम आदमी पार्टी के तरह मोदी साहेब का भी लक्ष्य यही है कि निजी स्कूल संचालको से पैसा खींचना शुरू किया जाए।
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इसीलिए आपसे आग्रह है कि, किसी व्यक्ति के भ्रष्ट होने या न होने का पता लगाने के लिए इस भुलावे में न आये कि उसके पीछे कितना परिवार या कितने बच्चे है, बल्कि यह देखें कि अमुक व्यक्ति किन कानूनों को लागू कर रहा है और किन कानूनों को लागू करने से इंकार कर रहा है। तभी आप वास्तविक रूप से समझ पाएंगे कि अमुक व्यक्ति घूसखोर है या उसकी मंशा प्रशासन में सकारात्मक बदलाव लाने की है।
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