Pawan Jury BhilwaraRj
यदि भारत पाकिस्तान के बीच आमने सामने की लड़ाई होती है तो टेक्टिकल न्यूक्लियर बम निर्णायक हथियार होगा। भारत के पास टेक्टिकल न्यूक्लियर बॉम्ब नहीं है जबकि पाकिस्तान टेक्टिकल न्यूक्लियर बम बना चुका है।
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टेक्टिकल न्यूक्लियर बम :
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ये बेहद खतरनाक छोटे परमाणु हथियार है। और इनका प्रयोग वास्तव में किया जा सकता है। इनका आकार छोटा तथा रेंज कम होती है। इनकी रेंज लगभग 50 किमी तथा तबाही का दायर 2-5 किमी तक होता है। इन्हें दूर से नहीं चलाया जा सकता। इन्हें बटालियन के साथ ही रखा जाता है। इन्हें किसी भी ट्रक पर रख कर चलाया जा सकता है। ये बम 2 किलोमीटर के दायरे में उपस्थित प्रत्येक चीज को पिघला देता है। इसे फायर करने का फैसला बटालियन के कमांडर को करना होता है। इसका प्रयोग आमने सामने की लड़ाई में ही किया जा सकता है। एक तरह से ये छोटे रॉकेट है।
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स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर बम :
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ये सिर्फ नुमाइशी हथियार है। क्यों ? क्योंकि इनका आकार बेहद बड़ा होता है और यदि इन्हें चलाया जाए तो 100 किलोमीटर तक के इलाके में तबाही होती है। इन्हें अग्नि जैसी लंबी दूरी की मिसाइलो पर रखकर चलाया जाता है। इन्हें चलाने का बटन राष्ट्राध्यक्ष के पास होता है। क्योंकि इन मिसाइलों को युद्ध के मैदान में नहीं ले जाया जा सकता है। ये 2000 से 5000 किमी दूर से छोड़ी जा सकती है। इन हथियारों से किसी सेना को निशाना नहीं बनाया जा सकता। बल्कि पूरे शहर को ही उड़ाया जा सकता है।
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भारत के पास स्ट्रट्रेजिक न्यूक्लियर वेपन है किन्तु टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन नहीं है। जबकि पकिस्तान के पास दोनों किस्म के हथियार है। टेक्टिकल वेपन पाकिस्तान नमे पिछले 4 वर्ष में बनाये है।
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चिंता की बात
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यदि भारत और पाकिस्तान की आमने सामने की लड़ाई होती है तो 3-4 दिनों के भीतर पाकिस्तान की सेना हार जायेगी। और जब पाकिस्तान की सेना बुरी तरह से हारेगी तो इस बात की कितनी संभावनाएं है कि पाकिस्तान की हारती सेना तब टेक्टिकल न्यूक्लियर बम का प्रयोग करे जबकि उन्हें मालूम है कि यह छोटा सा रॉकेट चलाने के साथ ही भारत की पूरी की पूरी बटालियन हवा में घुल जायेगी। मेरा मानना है कि वे ऐसे हालात में इसका प्रयोग करेंगे। खासकर तब जब यह फैसला लेने का अधिकार सेना के अफसरों के पास होगा। पाकिस्तान के पीएम के पास नहीं।
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टेक्टिकल न्यूक्लियर बम से सिर्फ वे सैनिक मारे जाते है जो युद्ध के मैदान में लड़ रहे थे। नागरिको की जाने नहीं जाती। इसीलिए इसे चलाने का फैसला करना आसान है। किन्तु स्ट्रेटेजिक मिसाइल पूरे शहर को निशाना बनाती है और इसमें उन नागरिको की जाने जाती है, जो युद्ध में शामिल नहीं थे। इसीलिए स्ट्रेटेजिक बम चलाने का फैसला करना आसान नहीं है। यह मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आता है।
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दूसरा पेच यह है कि भारत ने अमेरिका को यह बात लिख कर दे रखी है कि भारत कभी भी परमानु बम का पहले इस्तेमाल नहीं करेगा। यदि भारत ऐसा करता है तो उन्हें अमेरिका से अनुमति लेनी होगी। यदि भारत बिना अनुमति ऐसा करता है तो अमेरिका समझौता रद्द करने के एवज में अपनी सेना भारत में उतार कर भारत के परमाणु हथियार जब्त कर सकता है। और पूरी दुनिया इस मामले में अमेरिका का समर्थन करेगी।
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जबकि पाकिस्तान ने इस तरह की किसी संधि पर हस्ताक्षर नहीं किये है कि वे पहले परमाणु बम का प्रयोग नहीं करेंगे। उनका स्टेण्ड क्लियर है --- "ये टेक्टिकल बम भारत की सेना के साथ आमने सामने की लड़ाई में इस्तेमाल करने के लिए बनाये गए है और यदि भारत से हमारा युद्ध होता है तो हम इनका प्रयोग करेंगे। इसके आलावा भारत ने अमेरिका को यह भी लिखकर दे रखा है कि भारत अब से परमाणु परिक्षण नहीं करेगा, अनुसन्धान नहीं करेगा और नए परमाणु बम नहीं बनाएगा। जबकी पाकिस्तान ने ऐसे किसी समझौते पर हस्तास्क्षर नही किये है
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तो यदि भारत पाकिस्तान का आमने सामने का युद्ध होता है तो पाकिस्तान की सेना के पास ( इसे फिर से पढ़िए -- भारत के सामने लड़ाई लड़ रही मोर्चे पर स्थित पाकिस्तान की "सेना" के पास ) वे छोटे रोकेट होंगे जिन्हें वे चलाकर भारत की पूरी बटालियन को टैंको समेत हवा में घोल सकते है। इन छोटे रोकेट का उड़ान पथ नीचा होता है, अत: दिल्ली में स्थापित भारत के रडार उन्हें न तो पकड सकते है और न ही कोई मिसाइल इन्हें रोक सकती है। पाकिस्तान की लडती हुयी सेना इन्हें 10 किलोमीटर से फायर करेगी और ये हमारी सेना को तबाह कर देंगे।
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समाधान -- हमने तुरंत प्रभाव से टेक्टिकल परमाणु बम बनाने चाहिए। तथा अमेरिका के साथ हुआ परमाणु समझौता रद्द कर देना चाहिए।
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यह लगभग 2 वर्ष पुरानी खबर है, तथा मैंने लगभग डेढ़ वर्ष पहले इस पर संक्षेप में लिखा था। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए गूगल करे।
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