Pawan Jury BhilwaraRj

दूसरी बड़ी वजह*, जिसके चलते भारत के ज्यादातर युवा महात्मा चंद्रशेखर, भगत सिंह आदि के रास्ते पर चलने से चूक गए और आजादी आने में विलम्ब हुआ।

महादुरात्मा गांधी द्वारा 1921 में खिलाफत आन्दोलन का समर्थन करने के कारण हिंदुवादियो के एक बड़े वर्ग का कोंग्रेस से मोहभंग हो गया था और हिन्दू महासभा उन्हें तेजी से अपनी और खींच रही थी। महासभा के एजेंडे में चुनाव लड़ना, हिन्दुओ को हथियारों का प्रशिक्षण देना और हिन्दू राष्ट्र की स्थापना शामिल था। और महादुरात्मा गांधी के सर्कस से आजिज आकर महात्मा भगत सिंह, सान्याल, आजाद जैसे अनेक युवक क्रांतिकारी विचारधारा से प्रेरित होकर गरम दल की और आकर्षित हो रहे थे।
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ब्रिटिश को कुछ ऐसे संगठनो की जरूरत थी जो ऐसे युवाओं को अपनी और खींच कर उनका टाइम पास कर सके जो अंग्रेजो को भारत से खदेड़ना तो चाहते है किन्तु वे ; १) महादुरात्मा गाँधी की अहिंसा की चपेट में नहीं आ रहे है, २) जो हिन्दू महासभा की और आकर्षित हो रहे है, ३) जो चुनावी राजनीति में हिस्सा लेना चाहते है, ४) जो हिंदूवादी विचारधारा से प्रेरित है, ५) जो राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित है।
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यदि ऐसे संगठन युवाओं को अजीब किस्म की तरकीबो से यह विश्वास दिला सके कि देश को आजाद करवाने के लिए हिंसा भी अनुचित है और अहिंसा भी अनुचित है। चुनाव लड़ने और राजनीती में भाग लेने से भी आजादी नहीं आने वाली है। ये सभी अप्रभावी तरीके है। आजादी लाने के लिए हमें बिलकुल अलग तरीको से काम करना होगा। जैसे -- खून इकट्ठा करना, लोगो को शिक्षित करना, व्यायाम करना, गरीबो की सेवा करना, लोगो को जगाना और उन्हें संगठित करना, संस्कृत में श्लोको का वादन करना, लाठी चलाना सीखना ( बन्दुक और तीरंदाजी नहीं। क्योंकि हथियारों का प्रशिक्षण प्राप्त करने से आजादी आने की जगह और भी दूर चली जायेगी ), आपस में भातृत्व एवं बंधुत्व की भावना पैदा करना आदि आदि।
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इसी क्रम में ब्रिटिश साम्राज्य ने निम्नलिखित संगठनों की स्थापना करवाने में सहयोग किया :
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1) खुदाई खिदमतगार [ 1920 ] : यह संघठन खान अब्दुल गफ्फार खान ( जो कि कोंग्रेसी थे और देश वासियों को अहिंसा की कोकीन का नियमित सेवन कराते थे ) ने बनाया था। आजादी की लड़ाई में रुचि रखने वाले मुस्लिम युवा इस संगठन में जुड़ जाते थे और आजादी लाने के लिए नागरिको का खून इकट्ठा करते थे और उनमे शिक्षा का प्रसार करते थे।
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2) सेवा दल [ 1924 ] : इसकी स्थापना जवाहर लाल ( ये भी कोंग्रेसी थे और नियमित रूप से अहिंसा की कोकीन बांटते थे ) ने की थी। सेवा दल के कार्यकर्ताओ को संगठन में लेने से पहले यह शपथ दिलाई जाती थी कि, "वे किसी राजनैतिक संगठन से नही जुड़ेंगे और न ही किसी प्रकार की राजनैतिक गतिविधि में भाग लेंगे" !! यदि वे राजनीती में भाग नही लेंगे तो आजादी अपने आप ही आ जायेगी।
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3) " ???" [ 1925 ] : इस संगठन को हिन्दू युवाओं को खींच कर उनका टाइम पास करने के लिए बनाया गया था। इसकी स्थापना भी एक कोंग्रेसी ने ही की थी, और वे भी नियमित रूप से अहिंसा की कोकीन लेते थे और अपने संगठन के सभी सदस्यों को भी मुहैया कराते थे। इस संगठन के कार्यकर्ता आजादी लाने के लिए सुबह-शाम नियमति रूप से किसी पार्क या मैदान में वगेरह में इकट्ठे होकर संस्कृत के श्लोको का वाचन करते थे, व्यायाम करते थे, लाठी चलाना सीखते थे, और आपदा प्रबंधन की गतिविधियों में भाग लेते थे। इस संगठन के सदस्यों के लिए भी राजनैतिक गतिविधियों में भाग लेने की मनाही थी।
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इस तरह जो युवा कोंग्रेस की चपेट में आने से बच गए, उन्हें इन और ऐसे संगठनो ने अपने साथ चिपका कर ब्रिटिश साम्राज्य का सिर दर्द कम कर दिया था , और नतीजे में युवाओं की एक बड़ी संख्या महात्मा चंद्रशेखर आजाद, महात्मा भगत सिंह, महात्मा बटुकेश्वर दत्त और महात्मा सुभाष चन्द्र बोस के रास्ते पर चलने से वंचित हो गयी। सामान्य समझ रखने वाले सिर्फ कुछ युवा ही खुद को ब्रिटिश द्वारा बनाए गए इस फंदे की चपेट में आने से बचा पाए थे।
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(*) पहली बड़ी वजह पेड मिडिया था।
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आज की राजनीति में यह ऐतिहासिक संदर्भ इसीलिए प्रासंगिक है कि आज भी शासक वर्ग प्रतिरोध से बचने के लिए कार्यकर्ताओ का ध्यान मूल मुद्दों से हटा कर चिल्लर मुद्दों में उलझा दे रहे है और यह भी विश्वास दिला दे रहे है कि ये चिल्लर मुद्दे ही मूल मुद्दे है। दुसरे, वे कार्यकर्ताओ को वास्तविक समाधान तक पहुंचने से रोकने के लिए उन्हें उट पटांग समाधान पर कार्य करने की प्रेरणा दे रहे है। इससे कार्यकर्ताओ की उर्जा का ह्रास हो जाता है, और शासक वर्ग को राहत मिल जाती है।
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बीजेपी, कोंग्रेस, आम आदमी पार्टी, सपा, बसपा आदि राजनैतिक पार्टियों और पेड मिडिया द्वारा चलाये जा रहे मुद्दों को दरकिनार करके अपने दिमाग को खाली कीजिये। और उन चार समस्याओ की सूची बनाइये जो आज भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है। फिर गौर कीजिये कि इन मुद्दों को किसी भी राजनैतिक दल एवं पेड मिडिया ने अंतिम बार कब उठाया था। और फिर इन समस्याओ के अपने स्तर पर समाधान खोजिये। यदि आप समस्याओं तक पहुंच गए तो आप जान जायेंगे कि पूरा देश एक इतनी बड़ी गलतफहमी का शिकार है जो कि जानलेवा बन चुकी है।
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समस्याओ के अवलोकन के लिए आप इस संकेत को आदर्श मान सकते है कि - कोई भी राजनैतिक पार्टी और पेड मिडिया गंभीर समस्या पर बात नहीं करेगा, और यदि आप बात करेंगे तो वे उसकी अनदेखी करेंगे और फिर भी यदि आप अमुक समस्या पर बात करने को अड़े रहेंगे तो वे इसे समस्या मानने से ही इनकार कर देंगे या आपको इसके उट पटांग समाधान बताएँगे।
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जितना मैं देखता हूँ, भारत इन दो गंभीर समस्याओ से जूझ रहा है :

A) भारत की सेना इस हद तक कमजोर हो चुकी है कि यदि पाकिस्तान से हमारा युद्ध हो जाए और दोनों देशो की सेनाए बिना किसी विदेशी सहायता के आमने सामने की लड़ाई लडे तो भारत युद्ध हार जाएगा, व पाकिस्तान की सेना भारत के शहरो में घुस आएगी।

B) पिछले 20 साल से आ रही ऍफ़डीआई के चलते अमेरिका एवं मिशनरीज भारत में इतने मजबूत हो चुके है कि भारत आर्थिक-सामरिक रूप से पूरी तरह से उनके नियन्त्रण में है। और यह शिकंजा लगातार मजबूत हो रहा है।

C) यदि चीन भारत पर हमला कर देता है या पूर्वोत्तर के एक बड़े भाग पर कब्ज़ा कर लेता है और अमेरिका हमे देर से मदद देता है तो हम जीतना तो दूर चीन से लड़ने की हालत में भी नहीं है।
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ये तीन समस्याएं इतनी विराट और जानलेवा है कि इनके सामने अन्य समस्याओ की अवहेलना की जा सकती है। और व्यवहारिक रूप से ये तीन समस्यांए ही देश की अन्य सभी समस्याओं की जननी है।
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