Pawan Jury BhilwaraRj

पुलिस प्रमुख की डोर जनता के हाथ में न होने का खामियाजा।
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कन्हैया कुमार, उमर खालिद और उनके साथियो पर "भारत तेरे टुकड़े होंगे" और कुछ इसी तरह के विभाजनकारी नारे लगाने का आरोप था। लेकिन घटना को एक वर्ष से अधिक बीत जाने के बावजूद दिल्ली पुलिस ने अब तक इनके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र तक दाखिल नही किया है !!!
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( क्यों नहीं किया है ? मुझे नहीं पता। पर दिल्ली पुलिस सीधे प्रधानमन्त्री के अधीन काम करती है। अत: इस बारे में उनसे ट्विट करके पूछिए )
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इसी तरह 2012 के वर्ष में दिल्ली पुलिस ने रात 2 बजे बाबा रामदेव के केम्प पर हमला किया था, और एक कार्यकर्ता की इस हमले में मृत्यु हो गयी थी।
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क्योंकि पुलिस प्रमुख को नौकरी से निकालने का अधिकार क्षेत्र के मतदाताओ के पास नहीं है, अत: तब भी दिल्ली पुलिस प्रमुख प्रधानमंत्री के हितो के लिए काम कर रहा था, और आज भी वह पीएम के हितो के लिए काम कर रहा है। जेएनयू प्रकरण की जो मिडिया ट्रायल की गयी, उससे बीजेपी का उद्देश्य पूरा हो चुका है। कार्यवाही करने में अब उनकी कोई रुचि नहीं है। शायद इसीलिए मोदी साहेब ने जांच को सुस्त बनाने के आदेश दे दिए है।
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अब कल्पना कीजिये कि दिल्ली के पुलिस प्रमुख की नियुक्ति दिल्ली क्षेत्र के मतदाताओ द्वारा की जाती है, तथा दिल्ली के नागरिको के पास ऐसी प्रक्रिया भी है जिससे वे किसी भी समय बहुमत साबित करके पुलिस प्रमुख को नौकरी से निकाल सके। तो क्या पुलिस प्रमुख इस तरह का दुस्साहस करेगा ?
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मेरे विचार में नहीं करेगा। और यदि करेगा तो वह अपनी नौकरी गवायेंगा। न तो प्रधानमन्त्री और न ही किसी अदालत का भ्रष्ट जज उसे बचा सकेगा।
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इसी स्थिति को पूरे देश पर लागू कीजिये। देश में लगभग 600 पुलिस प्रमुख है। और ये सभी पुलिस प्रमुख 36 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के निर्देशन में कार्य करते है। न तो देश के 90 करोड़ नागरिको के पास इन्हें चुनने का अधिकार है न ही नौकरी से निकालने का। अलबत्ता शिकायत करने का अधिकार है, लेकिन ऐसी लाखों शिकायते अदालतों में लंबित है। जज घूस खाते है और इन्हें दबाकर बैठ जाते है।
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प्रधानमंत्री भ्रष्ट है इसीलिए सिर्फ इसीलिए पुलिस प्रशासन भी भ्रष्ट है। मुख्यमंत्री भ्रष्ट है इसीलिए पुलिस प्रशासन भ्रष्ट है। पुलिस प्रमुख को अपनी नौकरी चलानी है अतः वह जनता की परवाह नहीं करता। उसे बस अपने राजनितिक आकाओ को खुश रखना है। यह व्यवस्थागत दोष है। और इसे जानबूझकर रचा गया है।
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अमेरिका में पुलिस प्रशासन ज्यादा ईमानदार है और वे आम नागरिको से तमीज से पेश आते है। लेकिन इसका कारण यह नहीं है कि उन्हें तमीजदार व ईमानदार बनाने के लिए कोई इंजेक्शन दिया जाता है। बल्कि कारण यह कि वहां के नागरिको के पास अपने क्षेत्र के पुलिस प्रमुख को नौकरी से निकालने का अधिकार है। नागरिक यदि पुलिस प्रमुख से असन्तुष्ट होंगे तो उसे नौकरी से निकाल बाहर करेंगे। और यही भय उन्हें नागरिको के प्रति ईमानदार बना देता है।
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भारत के सांसद. विधायक, पीएम, सीएम, व धनिक वर्ग नही चाहता कि पुलिस प्रमुख उनकी पकड़ से निकलकर आम नागरिको के हाथ में चला जाए। इसीलिए वे मौजूद व्यवस्था को ही बनाये रखना चाहते है। और यह कहते है कि, यदि पुलिस प्रमुख की नियुक्ति और निलम्बन का अधिकार हमारे हाथ से निकल गया तो 24 घण्टे में भी कयामत आ जायेगी और देश बर्बाद हो जाएगा।
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उनका तो ठीक है। लेकिन भारत में आम नागरिको की भी एक विशिष्ट श्रेणी पायी जाती है, जो यह कतई नही चाहते कि जिला पुलिस प्रमुख को नौकरी से निकालने का अधिकार भारत के आम नागरिकों को दिया जाए। वे आपको समझायेंगे कि अमेरिका के लोग समझदार है अतः वे अपने पुलिस प्रमुख को चुन सकते है। किन्तु भारतीय लोग गवाँर है। वे हमेशा यह कहेंगे कि भारत की जनता मूर्ख है, भ्रष्ट है, निकम्मी है, बेवकूफ है आदि आदि। और इसीलिए भारत के नागरिको के पास अपने जिला पुलिस प्रमुख को नौकरी से निकालने का अधिकार नही होना चाहिए। उनका मानना है कि भारत के लोगो को सिर्फ अपने विधायक एवं सांसद ही चुनने चाहिए। और पुलिस प्रमुखों चुनने व हटाने का फैसला हमें नेताओं के विवेक पर छोड़ देना चाहिए। मोदी साहेब-सोनिया-भागवत-केजरीवाल के अंध भगत और बीजेपी-कोंग्रेस-आम आदमी पार्टी के समर्थक इसी श्रेणी में आते है।
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किस तरह से किसी जिले के मतदाता अपने क्षेत्र के पुलिस प्रमुख को चुना सकेंगे व भ्रष्ट होने से नौकरी से निकाल सकेंगे इसकी प्रक्रिया निचे दिए गए लिंक में देखी जा सकती है। यदि आप इस बात में मानते है कि भारत के नागरिको के पास अपन जिला पुलिस प्रमुख को नौकरी से निकालने का अधिकार होना चाहिए तो अपने मुख्यमंत्री व प्रधानमन्त्री से मांग करे कि राइट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख के ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित किया जाए।

राईट टू रिकाल जिला पुलिस प्रमुख के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/668820996629431
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