Pawan Jury BhilwaraRj

मतदाताओ द्वारा सांसद को नौकरी से निकालने के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट - ( लोक जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 ; संशोधन )
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यह क़ानून ड्राफ्ट किसी क्षेत्र के मतदाताओ को ऐसी प्रक्रिया उपलब्ध करवाता है जिसका प्रयोग करके किसी संसदीय क्षेत्र में मतदाता बहुमत का प्रयोग करके अपने सांसद को नौकरी से निकाल सकेंगे। इस क़ानून ड्राफ्ट के लागू होने से सांसदों पर क्षेत्र के मतदाताओ का अंकुश बना रहेगा और वे ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करेंगे। यह प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट मौजूदा 'जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951' में संशोधन के जरिये पूरे देश में लागू होगा। यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो अपने सांसद को sms करके तथा प्रधानमंत्री को @pmo पर ट्वीट करके यह निर्देश देवें कि इस क़ानून को संसद में वोटिंग के लिए रखा जाए।
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प्रधानमंत्री को किये जाने वाले ट्वीट का प्रारूप --
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@pmo, I instruct you to put this Rtr-mp proposal in parliament - https://mygov.in//comment/100362144, sha1 - 66a7014ae31dba573d13f23d6f3b802d1a0c8f06
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सांसद को भेजे जाने वाले SMS का प्रारूप --
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Hon MP, I instruct you to put this Rtr-mp proposal in parliament -- https://mygov.in//comment/100362144, sha1 - 66a7014ae31dba573d13f23d6f3b802d1a0c8f06, voter ID : ####"
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मतदाताओ द्वारा सांसद को बदलने के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट
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========ड्राफ्ट का प्रारम्भ========
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1. (1.1) इस अधिनियम में शब्द 'नागरिक' से आशय रजिस्टर्ड मतदाता है।
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(1.2) इस अधिनियम में शब्द 'कर सकता है' से आशय है -- कोई भी नैतिक-कानूनी बंधन नहीं। इसका आशय है कि 'कर सकता है' या 'करने की आवश्यकता नहीं है' है।
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2. ( जिला कलेक्टर के लिए निर्देश )

यदि भारत का कोई मतदाता सांसद के चुनाव में उम्मीदवार बनना चाहता है, तो वह जिला कलेक्टर के दफ्तर में सांसद-चुनाव के लिए तय राशि जमा कर सकेगा। जिला कलेक्टर उस व्यक्ति को आने वाले चुनाव में उम्मीदवार घोषित करके एक सीरियल नंबर जारी करेगा तथा उसका नाम प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर डालेगा।
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3. ( तलाटी या पटवारी के लिए निर्देश )

(3.1) यदि कोई मतदाता पटवारी के दफ्तर आकर 3 रू शुल्क देकर सांसद पद के लिए कम से कम पांच व्यक्तियों को अनुमोदित करता है तो पटवारी उसके अनुमोदन को कंप्यूटर में दर्ज करके उसको एक रसीद देगा। पटवारी मतदाता की पहचान पत्र संख्या, तारीख, समय और अनुमोदित उम्मीदवारों के नाम भी रसीद में दर्ज करेगा।
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(3.2) यदि पटवारी के पास कंप्यूटर आदि नहीं है तो जब तक पटवारी को कंप्यूटर उपलब्ध नही होता, जिला कलेक्टर यह कार्य तहसीलदार के दफ्तर को सुपुर्द करेगा।
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(3.3) जिला कलेक्टर या प्रधानमंत्री एक ऐसा सिस्टम बना सकते है जो क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर मतदाता को उसके अनुमोदनों के बारे में एस.एम.एस द्वारा अद्यतन जानकारी देगा।
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(3.4) प्रधानमंत्री का सचिव इस संचालन के लिए आवश्यक सॉफरवेयर तथा जिला कलेक्टर आवश्यक हार्डवेयर पटवारी को उपलब्ध करवाएगा।
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( 3.5 ) जिला कलेक्टर अनुमोदन को दर्ज करने की प्रक्रिया के दौरान मतदाता की फोटो और अंगुलीयों की छाप लेकर रसीद देने के लिए आवश्यक कंप्यूटर आदि उपकरण पटवारी को उपलब्ध करवा सकेगा।
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( 3.6 ) जिला कलेक्टर या प्रधानमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है जिससे मतदाता अपना अनुमोदन एटीएम, एसएमएस या इंटरनेट द्वारा दर्ज करवा सके।
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4.( पटवारी के लिए निर्देश )

पटवारी मतदाताओ के वोटर आई.डी. नंबर तथा उन उम्मीदवारों के नाम जिनको उसने अनुमोदित किया है, को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा |
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5. ( पटवारी के लिए निर्देश )

यदि वोटर अपने अनुमोदन रद्द करने आता है तो तलाटी एक या अधिक अनुमोदन बिना कोई शुल्क लिए रद्द कर देगा |
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6. ( संसद के लिए निर्देश )

यदि किसी वैकल्पिक उम्मीदवार को इतने अनुमोदन मिल जाते हैं जो कि --

(6.1) वर्तमान सांसद को पिछले चुनावों में मिले वोटों की गिनती से अधिक हो, तथा यह संख्या क्षेत्र के कुल मतदाताओ के 10% से भी अधिक हो।

अथवा

(6.2) उस चुनाव-क्षेत्र के कुल मतदाताओं के 50% से ज्यादा हो।

तथा यह अनुमोदन पदासीन सांसद के अनुमोदनों से ज्यादा हो, तो चुनाव आयुक्त अमुक संसदीय क्षेत्र में रिकॉल-पोल/रिकॉल-इलेक्शन करवाने के लिए आदेश जारी करेगा।
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7. ( चुनाव आयोग के लिए निर्देश )

रिकॉल इलेक्शन के दौरान पदासीन सांसद के नाम को मतपत्र में पहले स्थान पर रखा जाएगा, तथा उसे नामांकन पत्र दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होगी। जिन 14 व्यक्तियों को सर्वाधिक अनुमोदन मिले है और जिन व्यक्तियों को प्राप्त अनुमोदनो की संख्या कुल मतदाताओ की संख्या के 5% से अधिक है, तो उनके नाम भी रिकॉल-इलेक्शन के मतपत्र में रखे जाएंगे। इनके अतिरिक्त अन्य किसी व्यक्ति का नाम मतपत्र में नहीं रखा जायेगा।
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8. ( चुनाव आयोग के लिए निर्देश )
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यदि किसी उम्मीदवार को इतने वोट मिल जाते है जो कि --

(8.1) वर्तमान सांसद के वोटों की गिनती से अधिक हो, तथा यह संख्या क्षेत्र के कुल मतदाताओ के 10% से भी अधिक हो।
(8.2) उस चुनाव-क्षेत्र के कुल मतदाताओं के 50% से ज्यादा हो।

अथवा

तथा यह वोट पदासीन सांसद को प्राप्त वोटो से ज्यादा हो तो चुनाव आयुक्त अमुक व्यक्ति को सांसद घोषित करेगा तथा पदासीन सांसद को पदभार से मुक्त कर देगा।
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9. ( चुनाव आयोग के लिए निर्देश )

धारा-6 के प्रयोजन के लिए उन मतदाताओं के अनुमोदन जिन्होनें उम्मीदवार के रूप में अपना नाम दर्ज किया है, नहीं गिने जाएँगे। प्रत्येक चुनाव-क्षेत्र के मतदाताओ की सही संख्या चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित की जायेगी और इस सम्बन्ध में चुनाव-आयोग का फैसला अंतिम होगा।
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10. ( सभी प्रत्याशियों के लिए निर्देश )

चुनाव के समय उम्मीदवार चुनाव-आयोग में एक शपथपत्र दे सकता है कि वो 'राईट टू रिकाल-सांसद' क़ानून का समर्थन करता है या नहीं।
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11. [जनता की आवाज़ ]

11.1 ( जिला कलेक्टर के लिए निर्देश )

कोई भी गरीब मतदाता, दलित मतदाता, महिला मतदाता या कोई भी नागरिक मतदाता इस कानून में बदलाव चाहता हो तो वह जिला कलेक्टर के कार्यालय में जाकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस ऐफिडेविट को 20 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर दर्ज करेगा और स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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11.2 ( तलाटी अथवा पटवारी के लिए निर्देश )

कोई भी गरीब मतदाता, दलित मतदाता, महिला मतदाता, वरिष्ठ नागरिक मतदाता या कोई भी नागरिक मतदाता इस कानून अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा ऊपर दिए खण्ड 11.1 में प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर हां/नहीं दर्ज कराना चाहता हो तो वह अपना मतदाता पहचान पत्र लेकर तलाटी के कार्यालय में जाकर 3 रूपए का शुल्क जमा कराएगा। तलाटी मतदाता की हां/नहीं दर्ज कर लेगा और उसे इसकी रसीद देगा। इस हां/नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल दिया जाएगा।
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=======ड्राफ्ट की समाप्ति=======
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स्पष्टीकरण
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(क) मान लीजिए एक चुनाव-क्षेत्र में 15 लाख मतदाता है, जिनमे से 8 लाख ने मतदान किया। मान लीजिए जीतने वाले उम्मीदवार को 3 लाख 60 हज़ार वोट मिले। अब यदि किसी वैकल्पिक उम्मीदवार को 3,60,000 + 1,50,000 (15 लाख का 10% = 1.5 लाख) = 5,10,000 या इससे अधिक अनुमोदन मिलते है तो वो अगला सांसद बन सकता है।
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(ख) मान लीजिए एक चुनाव-क्षेत्र में 15 लाख मतदाता है। मान लीजिए उनमें से 9 लाख ने वोट किये तथा जीतने वाले उम्मीदवार को 8 लाख वोट मिले। अब यदि वैकल्पिक मतदाता को सभी मतदाताओं की संख्या के 50% यानी 7,50,000 अनुमोदन मिलते है तथा यदि यह अनुमोदन वर्तमान सांसद को मिले अनुमोदनों से ज्यादा है तो नया उम्मीदवार अगला सांसद बन सकता है।
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(ग) चूंकि नागरिक किसी भी दिन अपना अनुमोदन बदल सकते है, अतः मतदाताओं को उम्मीदवार द्वारा धमकाना या प्रलोभन देना संभव नहीं रह जाएगा।
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(घ) अनुमोदन को खरीदना संभव नहीं है – नागरिक किसी भी दिन अपना अनुमोदन रद्द कर सकते है। इसीलिए यदि कोई उम्मीदवार 5,10,000 वोटरों को 100 रु देकर अनुमोदन लेता है तो नागरिक अगले दिन ही अपना अनुमोदन रद्द कर सकते है।
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(च) अनुमोदन दर्ज करना बैंक के लेन-देन से ज्यादा सुरक्षित है -- व्यक्ति को दर्ज कराए गए अनुमोदनो की जानकारी एस.एम.एस द्वारा मिलती रहेगी, तथा मशीन उसका फोटो और अंगुली का छाप ले लेगी। हो सकता है शुरूआती चरण में ये सभी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो, लेकिन कलेक्टर इन प्रक्रियाओं को 3-6 महीनों में लागू कर सकता है या फिर नागरिक उसको निकालने की मांग कर सकते हैं। फोटो, अंगुली की छाप और एस.एम.एस की जानकारी के साथ ये सिस्टम बैंक के लेन-देन से ज्यादा सुरक्षित है। यदि इसको कोई हैक कर सकता है, तो उसके लिए किसी बैंक को हैक करना अधिक उपयोगी होगा।
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