Pawan Jury BhilwaraRj

हमें उड़िया, बांग्ला, मराठी, कन्नड़, तमिल आदि क्षेत्रीय भाषाओ को जानने वाले कार्यकर्ता चाहिए, जो राईट टू रिकॉल ग्रुप के अंग्रेजी या हिंदी स्तम्भो का नियमित अनुवाद कर सके।
.
दक्षिण और पूर्व के प्रदेशो में पाठ्यक्रम स्थानीय भाषा में होने के कारण पठन पाठन स्थानीय भाषा में ज्यादातर है। हिन्दी सिर्फ शहरी क्षेत्रो में एक छोटे तबके द्वारा पढ़ी-लिखी जाती है। शेष नागरिक हिन्दी सुन कर समझ और बोल तो सकते है, लेकिन पढ़ लिख नहीं पाते।
.
आंदोलन के देशव्यापी होने में यह बाधा आ रही है कि राईट टू रिकॉल ग्रुप का ज्यादातर विवरण अंग्रेजी और हिन्दी में उपलब्ध है। यदि शेष भाषाई प्रदेशो में जो भी कार्यकर्ता उपलब्ध है, यदि वे इनका अनुवाद करना शुरू करते है तो शेष प्रदेशो में भी राईट टू रिकॉल आंदोलन तेजी से फैलने लगेगा।
.
======