Pawan Jury BhilwaraRj
उत्तर प्रदेश में कौन जीतेगा ?
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शिक्षा, चिकित्सा, अदालतें और पुलिस ये चारो राज्यो के विषय है, और सरकार के मूल्यांकन में बड़ी भूमिका निभाते है।
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गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र के नागरिको को उत्तर प्रदेश के लोगो को यह बताना चाहिए कि भाजपा शासित इन राज्यो में भी कमोबेश सरकारी स्कूलों, सरकारी अस्पतालों, न्यायालयों और थानो की वही गत है जो सपा शासित उत्तर प्रदेश की है। कोंग्रेस के शासन के बारे में कहने के लिए कुछ बचा नहीं है। सभी वाकिफ है।
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आशय यह है की, चाहे बीजेपी बसपा के साथ मिलकर सरकार बनाये या कोंग्रेस-सपा गठबंधन सत्ता में आये, हालात बदलने वाले नहीं है। यह दावा इसीलिए किया जा सकता है क्योंकि सपा का शासन उत्तर प्रदेश में लोग देख ही रहे है, अतः सपा-कोंग्रेस जीती तो इसी शासन की पुनरावृत्ति होगी और यदि बीजेपी जीतती है तो वही मिलेगा जो राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात आदि को मिल रहा है।
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सभी राज्यों में पुलिस भ्रष्ट है क्योंकि बीजेपी ने पिछले 25 साल में और कोंग्रेस ने पिछले 70 सालो में पुलिस प्रशासन को सुधारने के लिए आवश्यक सभी कानूनों का विरोध किया। सरकारी स्कूलो और अस्पतालों की दशा लगातार बिगड़ रही है, क्योंकि कोंग्रेस-बीजेपी-सपा-बसपा-आपा आदि की नीतिया बिलकुल एक जैसी है। और अदालतों का ढर्रा आजादी के बाद से आज तक वैसा ही बना हुआ है। सारी चुनावी कवायद चेहरे बदलने की है।
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नेता बयान देकर माहौल बनाते है और पेड मिडिया इन बयानों को लगातार घोटता है ताकि धारणा बन सके। यदि बीजेपी का प्रचार तंत्र यह धारणा बनाने में कामयाब रहा कि सपा-कोंग्रेस हिन्दू विरोधी है तो बीजेपी जीत जायेगी और यदि सपा-कोंग्रेस यह धारणा बनाने में कामयाब रही कि बीजेपी की राजनैतिक इमारत साम्प्रदायिक अलगाव पर टिकी हुयी है तो सपा-कोंग्रेस सरकार बना लेगी। सभी पार्टियों के प्रचार तंत्र, नेता और कारिंदे पूरी ताकत के साथ इन धारणाओ को बनाने म जुटे हुए है।
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सत्ता में आने के बाद जो शासन सपा दे रही है वही शासन बीजेपी व बसपा देगी। परेशानियाँ जस की तस रहेगी लेकिन सरकार के चेहरे बदल जायेंगे।
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समाधान ?
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मतदाताओ को किसी भी पूर्वाग्रह या धारणा की लपेट में आकर वोट करने की जगह इस आधार पर वोट करना चाहिए कि कोई उम्मीदवार या पार्टी अपने घोषणा पत्र में किन कानून ड्राफ्ट्स को गेजेट में प्रकाशित करने का वादा कर रही है। क्योंकि प्रशासन में किसी भी प्रकार के परिवर्तन के लिए कानूनों में बदलाव की आवश्यकता होती है, अत: उन्ही उम्मीदवारों/पार्टी को वोट करे जिन्होंने अपने घोषणा पत्र में समस्याओं के समाधान के लिए कानूनी ड्राफ्ट दिए हो। यदि किसी भी पार्टी ने ऐसे ड्राफ्ट नहीं दिए है तो उनसे ऐसी मांग करे।
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